भोपाल के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत: अब नहीं आएंगे मनमाने और भारी-भरकम बिल
समझें क्या है पूरा मामला
- भोपाल में अब मनमाने बिल से बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
- नए बिजली अधिनियम में एक सॉफ्टवेयर सुरक्षा कवच जोड़ा गया है।
- यह सिस्टम पिछले छह महीनों के औसत बिल पर नजर रखेगा।
- बिल औसत से पांच गुना बढ़ा तो सॉफ्टवेयर तुरंत उसे रोक देगा।
- बिजली कंपनी को 30 दिन के भीतर उस बिल की जांच करनी होगी।
बिजली बिल की मनमानी पर लगेगी लगाम
भोपाल के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक राहत भरी खबर है। अब बिजली कंपनियां रीडिंग में गड़बड़ी या तकनीकी खराबी के कारण हजारों रुपए का मनमाना बिल नहीं दे पाएंगी। नए बिजली अधिनियम में एक खास तकनीकी इंतजाम किया गया है।
बिजली कंपनियों के बिलिंग सॉफ्टवेयर में अब एक सुरक्षा कवच होगा। यह सिस्टम हर उपभोक्ता के पिछले छह महीनों के बिल का औसत देखता रहेगा। जैसे ही बिल उस औसत से पांच गुना ज्यादा हुआ, सॉफ्टवेयर उस बिल को तुरंत रोक देगा।
सिस्टम फ्लैग क्या है और कैसे काम करेगा
रुके हुए बिल पर एक सिस्टम फ्लैग यानी रेड अलर्ट लग जाएगा। इसका मतलब है कि सिस्टम ने मान लिया है कि इस बिल में कोई गंभीर गड़बड़ी है। इसके बाद वह बिल जांच के दायरे में आ जाएगा।
फ्लैग लगने के बाद बिजली कंपनी के संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी। उन्हें 30 दिनों के भीतर उस बिल का निराकरण करना होगा। इसके लिए अधिकारी को मौके पर जाना होगा या मीटर की जांच करनी होगी। उपभोक्ता को अब कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
हर महीने छह लाख बिल, 80 हजार शिकायतें
भोपाल जिले में हर माह लगभग छह लाख बिजली बिल जारी होते हैं। इनमें से करीब 80 हजार उपभोक्ता बिल से असंतुष्ट होकर शिकायत करते हैं। यह आंकड़ा खुद बताता है कि बिल विवाद कितना बड़ा मसला है।
मई महीने में एक और बड़ी समस्या सामने आई। डेढ़ लाख उपभोक्ता पांच से 25 यूनिट अतिरिक्त खपत के कारण सब्सिडी के दायरे से बाहर हो गए। इससे उनका बिल दस से बारह गुना तक बढ़ गया। बड़ी संख्या में शिकायतें आईं और कंपनियों को मीटर जांच के साथ समझाइश भी देनी पड़ी।
चार लाख स्मार्ट मीटर, अब लोड की जांच भी होगी
भोपाल जिले में अब तक चार लाख स्मार्ट मीटर (Smart Meter) लग चुके हैं। दो लाख और लगने बाकी हैं। इन स्मार्ट मीटर से कंपनी के पास हर उपभोक्ता के बिजली उपयोग की पूरी जानकारी आ गई है।
अब कंपनी इस डेटा के आधार पर एक नई जांच शुरू करेगी। यह जांच होगी "बिजली लोड" की। हर उपभोक्ता को कनेक्शन के समय एक स्वीकृत लोड मिला होता है। उसी के आधार पर उस इलाके में बिजली आपूर्ति तय होती है।
अतिरिक्त लोड पर लगेगी पेनाल्टी
यदि कोई उपभोक्ता स्वीकृत लोड से ज्यादा बिजली का उपयोग कर रहा है तो उसे अनुमति लेनी होती है और तय शुल्क देना होता है। अधिकांश उपभोक्ता यह नहीं करते।
स्मार्ट मीटर की बदौलत कंपनी के पास अब ऐसे सभी उपभोक्ताओं की सूची तैयार हो गई है। कंपनी अब अतिरिक्त लोड पर पेनाल्टी लगाने के साथ ही लोड बढ़वाने की प्रक्रिया भी शुरू करेगी। यह उपभोक्ताओं के लिए एक नई जिम्मेदारी होगी।
एमपीईआरसी का क्या है रुख
मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग एमपीईआरसी (MPERC – Madhya Pradesh Electricity Regulatory Commission) के सचिव उमाकांत पांडा ने बताया कि केंद्र और राज्य के तय नियमों को आयोग टैरिफ में शामिल करता है। कंपनियों को इन्हीं नियमों के तहत बदलाव के लिए निर्देश दिए जाते हैं। नए अधिनियम के तहत आयोग अपने क्षेत्राधिकार में काम करेगा।
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