आदेश अक्टूबर का, फिर जुलाई से वसूली क्यों? भोपाल बायपास पर टोल वसूली को लेकर पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने उठाए सवाल

Amresh Kushwaha | Oct 20, 2026, 17:21 IST
भोपाल बायपास टोल की अधिसूचना पर पूर्व विधायक ने सरकार को घेरा।
भोपाल बायपास पर टोल वसूली को लेकर नया विवाद सामने आया है।सरकार ने 15 अक्टूबर 2026 को नई अधिसूचना जारी की थी। इसमें टोल वसूली की तारीख 19 जुलाई 2026 बताई गई है। दोनों तारीखों के बीच 88 दिन का अंतर है। पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने इस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि इन 88 दिनों में टोल किस आधार पर वसूला गया?
new controversy emerged regarding toll collection Bhopal bypass. government issued new notification October 15, 2026, specifies July 19, 2026, date commencement toll collection. Former MLA Paras Saklecha raised questions about asking basis toll collected during 88 days.

2031 तक टोल वसूली का प्रावधान

भोपाल बायपास की कुल लंबाई 51.963 किलोमीटर है। नई अधिसूचना में इसी हिस्से पर टोल वसूली का प्रावधान है। यह व्यवस्था 19 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2031 तक लागू बताई गई है।



अधिसूचना में इंडियन टोल एक्ट 1851 का आधार लिया गया है। इसके तहत धारा दो और धारा चार का उल्लेख है।



टोल वसूली मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम कर सकता है। इसके लिए चुनी गई यूजर फी एजेंसी को भी जिम्मेदारी मिल सकती है।



लोक निर्माण विभाग को यह अवधि पांच साल बढ़ाने का अधिकार भी दिया गया है।



गाड़ियों से कितना टोल वसूला जाएगा?

अधिसूचना में टोल की मूल दरें भी बताई गई हैं। इनकी गणना सितंबर 2007 की दरों के आधार पर होगी। कार के लिए मूल दर 35 पैसे प्रति किलोमीटर है। हल्के व्यावसायिक वाहन के लिए यह 85 पैसे है।



बस के लिए 1.75 रुपए प्रति किलोमीटर तय हैं। ट्रक के लिए यह दर 2.11 रुपए है। मल्टी-एक्सल ट्रक के लिए 4.21 रुपए निर्धारित हैं। ये मूल दरें प्रति यात्रा के हिसाब से दी गई हैं। इनमें हर साल बदलाव करने का प्रावधान भी है।



यह बदलाव थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर होगा। वास्तविक टोल राशि लागू गणना और संबंधित प्लाजा पर निर्भर करेगी।



304 करोड़ की सड़क पर 360 करोड़ वसूली का दावा

पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने टोल से हुई कमाई पर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार भोपाल बायपास का निर्माण ट्रांसट्राय कंपनी ने किया था। यह सड़क बीओटी (Build Operate Transfer) मॉडल पर बनी थी। कंपनी ने निर्माण पर करीब 304 करोड़ रुपए खर्च किए थे। सकलेचा के मुताबिक कंपनी ने 2013 से टोल वसूली शुरू की।



उनका दावा है कि कंपनी ने 11 दिसंबर 2019 तक करीब 150 करोड़ रुपए वसूले। इसके बाद सरकार की यूजर फी योजना (User Fee Scheme) लागू हुई। सकलेचा के अनुसार इस योजना से अब तक करीब 360 करोड़ रुपए वसूले गए।



सकलेचा का सवाल सड़क निर्माण पर सरकारी खर्च से जुड़ा है। उनके मुताबिक निर्माण का खर्च निजी कंपनी ने उठाया था। ऐसे में सरकार ने किस कानूनी आधार पर यूजर फी लगाई? उन्होंने इसकी जांच कराने की मांग की है।



241.97 करोड़ के मामले में क्या हुआ?

पूर्व विधायक सकलेचा ने कंपनी से जुड़े पुराने मामले का भी जिक्र किया है। उनके अनुसार 9 जुलाई 2020 को मिसरोद थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। मामला अनुबंध की शर्तों के कथित उल्लंघन से जुड़ा था। इसमें 241.97 करोड़ रुपए की वसूली संबंधी आरोप भी शामिल थे।



पूर्व विधायक का दावा है कि करीब तीन साल तक आरोपपत्र दाखिल नहीं हुआ था। वहीं, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 28 नवंबर 2023 को संबंधित आपराधिक कार्यवाही निरस्त कर दी थी।



पूर्व विधायक सकलेचा के अनुसार सरकार ने इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती नहीं दी। उन्होंने मामले की कानूनी पैरवी की जांच कराने की मांग की है। संबंधित दस्तावेजों और कथित लापरवाही की जांच भी मांगी है।



छह साल तक 21 करोड़ सालाना क्यों नहीं वसूले?

सकलेचा ने कंपनी के साथ हुए अनुबंध पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने अनुबंध के आर्टिकल 26 का हवाला दिया है। इसके अनुसार कंपनी से हर साल प्रीमियम लिया जाना था।



सकलेचा के मुताबिक यह राशि 2013 से 21 करोड़ रुपए सालाना थी। इसमें हर साल पांच प्रतिशत बढ़ोतरी का भी प्रावधान था। उनका आरोप है कि छह साल तक यह राशि नहीं वसूली गई थी।



उन्होंने पूछा कि विभाग ने समय पर Premium Fee क्यों नहीं वसूली? इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई?



राज्यपाल को भेजी जानकारी पर भी सवाल

पारस सकलेचा ने अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया की जांच मांगी है। उन्होंने विभागीय प्रस्ताव और विधि विभाग की राय जांचने को कहा है। संबंधित सरकारी रिकॉर्ड की जांच की भी मांग की है।



सकलेचा ने आशंका जताई कि राज्यपाल को अधूरी जानकारी दी गई होगी। उन्होंने भ्रामक तथ्य प्रस्तुत किए जाने की संभावना भी जताई है। हालांकि यह सकलेचा की आशंका है। इसकी पुष्टि के लिए सरकारी दस्तावेजों की जांच जरूरी है।



सकलेचा ने सरकार से क्या मांग की?

सकलेचा ने भोपाल बायपास की टोल वसूली निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने प्रीमियम वसूली में कथित लापरवाही की जांच भी मांगी है। जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।



इसके अलावा कंपनी के खिलाफ उच्चतर न्यायालय में कार्रवाई करने को कहा है। अब सबसे बड़ा सवाल 88 दिनों की टोल वसूली का है। सरकार को इसका कानूनी आधार स्पष्ट करना होगा। यह भी देखना होगा कि पहले कौन से आदेश लागू थे। इन्हीं दस्तावेजों से टोल वसूली की वैधानिकता स्पष्ट हो सकेगी।

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