वकीलों को नहीं लगाना पड़ेंगे इंदौर-जबलपुर के चक्कर, भोपाल को मिली ये बड़ी सौगात
मप्र हाई कोर्ट ने भोपाल में सीबीआई की विशेष अदालत बनाई है। इसका क्षेत्राधिकार भोपाल समेत 18 जिलों तक रहेगा। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर यह अधिसूचना जारी हुई। नई अदालत की पहली जज गजल पाहवा सिंह होंगी। जबलपुर और इंदौर के सीबीआई मामले अब भोपाल आएंगे।
भोपाल को मिली बड़ी सौगात
सीबीआई से जुड़े मामलों में राजधानी भोपाल समेत 18 जिलों को बड़ी राहत मिली है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इसके लिए बड़ा फैसला लिया है।
हाई कोर्ट ने भोपाल में सीबीआई की विशेष अदालत बनाने की अधिसूचना जारी की। इस अदालत का क्षेत्राधिकार भोपाल समेत आसपास के 18 जिलों तक रहेगा।
यह अधिसूचना कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर जारी हुई है। हाई कोर्ट रजिस्ट्री ने इसे औपचारिक रूप दिया है।
नई अदालत की पहली पीठासीन अधिकारी गजल पाहवा सिंह होंगी। वे भोपाल में सीबीआई मामलों की सुनवाई करेंगी। इस अदालत का मुख्यालय भोपाल में ही रहेगा।
भोपाल आएंगे जबलपुर-इंदौर केस
जबलपुर-इंदौर के मजिस्ट्रेट स्तर के सीबीआई मामले अब भोपाल ट्रांसफर होंगे। इन मामलों की सुनवाई अब भोपाल में ही हो सकेगी।
हाई कोर्ट ने जबलपुर और इंदौर के प्रधान जिला न्यायाधीशों को निर्देश दिए हैं। उनसे कहा गया है कि भोपाल के क्षेत्राधिकार वाले मामले नई अदालत भेजे जाएं।
इसके लिए दोनों शहरों में मामलों की पहचान की जा रही है। यह काम जल्द पूरा होने की उम्मीद है।
भोपाल के प्रधान जिला न्यायाधीश को भी निर्देश दिए गए हैं। उन्हें नामांकित मजिस्ट्रेट को यह मामले सौंपने के लिए कहा गया है।
मामलों की पहचान और स्थानांतरण पूरा होते ही ट्रायल भोपाल में शुरू होगा। इससे मामलों के निपटारे में भी तेजी आएगी।
18 जिले, नया क्षेत्राधिकार
नई अदालत का क्षेत्राधिकार भोपाल, सीहोर, रायसेन, ग्वालियर, भिंड और मुरैना तक रहेगा। इसके अलावा शिवपुरी, दतिया, टीकमगढ़ और विदिशा भी इसमें शामिल हैं।
छतरपुर, बैतूल, नर्मदापुरम, गुना और राजगढ़ के मामले भी अब यहीं सुने जाएंगे। हरदा, श्योपुर और अशोकनगर भी इस सूची में हैं। अदालत का मुख्यालय भोपाल में ही रहेगा।
वकीलों-पक्षकारों को बड़ा फायदा
भोपाल में सीबीआई की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत आने से वकीलों को बड़ा फायदा होगा। पक्षकारों को भी अब राहत मिलेगी।
अभी तक पैरवी के लिए वकीलों को इंदौर या जबलपुर जाना पड़ता था। सुनवाई की सुविधा सिर्फ इन दो शहरों में ही थी।
इससे वकीलों और पक्षकारों दोनों का समय और पैसा खर्च होता था। छोटे शहरों से आने वाले पक्षकारों को खासतौर पर दिक्कत होती थी। कई बार पेशी पर पहुंचना मुश्किल होता था।
अब एमपी हाई कोर्ट के नोटिफिकेशन के बाद भोपाल में भी सुनवाई होगी। आसपास के 18 जिलों के मामले अब यहीं सुने जाएंगे। इससे लोगों को काफी राहत मिलेगी।
पहले क्या व्यवस्था थी
अभी तक सीबीआई मामलों की सुनवाई सिर्फ दो शहरों में होती थी। ये शहर जबलपुर और इंदौर थे। राज्य के बाकी हिस्सों के मामले भी इन्हीं दो अदालतों में जाते थे।
इस वजह से भोपाल, ग्वालियर जैसे शहरों के लोगों को लंबा सफर तय करना पड़ता था। हर पेशी पर यह सफर दोहराना पड़ता था। कई बार पक्षकार समय पर नहीं पहुंच पाते थे। इससे मामलों में देरी भी होती थी।
नई व्यवस्था से क्या बदलेगा
भोपाल में विशेष अदालत बनने से यह पूरी प्रक्रिया आसान हो जाएगी। वकीलों को अब हर सुनवाई के लिए दूसरे शहर नहीं जाना पड़ेगा।
इससे केस लड़ने का खर्च भी कम होगा। पक्षकारों के समय की भी बचत होगी। वे आसानी से अपनी सुनवाई में शामिल हो सकेंगे।
कानूनी जानकारों का मानना है कि ऐसी व्यवस्था से न्याय प्रक्रिया तेज होती है। इससे पक्षकारों का भरोसा भी बढ़ता है। मामलों के जल्दी निपटारे की उम्मीद भी बढ़ी है।
हाई कोर्ट की भूमिका
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट जिला अदालतों का ढांचा लगातार बेहतर बना रहा है। भोपाल की यह नई अदालत भी इसी दिशा में एक कदम है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर यह पूरी प्रक्रिया शुरू हुई। हाई कोर्ट रजिस्ट्री ने अधिसूचना जारी करके इसे प्रभावी बना दिया।
आगे क्या होगा
आने वाले दिनों में जबलपुर और इंदौर से मामलों की सूची तैयार होगी। संबंधित न्यायाधीश लंबित मामलों की पहचान करेंगे। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से केस भोपाल शिफ्ट होंगे।
भोपाल की नई अदालत जल्द पूरी तरह काम करने लगेगी। शुरुआती दौर में मामलों के ट्रांसफर पर ही ध्यान रहेगा। इसके बाद नियमित सुनवाई शुरू होगी।
इस बदलाव से 18 जिलों के हजारों वकीलों और पक्षकारों को सीधा फायदा मिलेगा। आने वाले समय में यह व्यवस्था और मजबूत होने की उम्मीद है।
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