भोपाल के सीबीएसई स्कूलों में नई किताबों की मनमानी खत्म, पुरानी मान्य
News In Short
- भोपाल के स्कूलों में अब बच्चे पिछले साल की पुरानी किताबों से पढ़ाई कर सकेंगे।
- निजी स्कूलों ने अभिभावकों को मैसेज भेजकर जानकारी दी।
- अभिभावकों की मदद के लिए शहर में पुरानी किताबों की अदला-बदली का मेला लगाया जाएगा।
- नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर जिला शिक्षा अधिकारी ने सख्त कार्रवाई और नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
- 1 अप्रैल से शुरू हो रहे नए सत्र में करीब 150 CBSE स्कूलों के छात्रों को इसका फायदा मिलेगा।
News In Detail
भोपाल के प्राइवेट स्कूलों में नई किताबों के नाम पर होने वाली मनमानी पर अब लगाम लगती नजर आ रही है। प्रशासन की सख्ती के बाद शहर के कई निजी स्कूलों ने अभिभावकों को मैसेज भेजकर जानकारी दी है कि बच्चे अब पुरानी किताबें भी स्कूल ला सकते हैं।
नई किताबें खरीदने की कोई जरूरी नहीं होगी। इस फैसले से उन हजारों माता-पिता ने राहत की सांस ली है, जो हर साल किताबों के बढ़ते बोझ और खर्च से परेशान थे।
बुक एक्सचेंज मेले की अनूठी पहल
इस बदलाव के बाद अब शहर में बुक एक्सचेंज मेला का आयोजन किया जाएगा। पालक संगठनों ने इसकी पहल की है, ताकि एक कक्षा पास कर चुके छात्र अपनी किताबें जूनियर छात्रों को दे सकें।
इससे न केवल पैसों की बचत होगी, बल्कि कागजों की बर्बादी भी रुकेगी। राजधानी भोपाल में लगभग 150 सीबीएसई स्कूल हैं, जिनमें 1 अप्रैल से करीब 2 लाख विद्यार्थियों का नया सत्र शुरू होने जा रहा है।
नई किताबों के नाम पर लूट का खेल
अक्सर देखा गया है कि स्कूल केवल कवर बदलकर कोर्स बदलने का दावा करते हैं और अभिभावकों पर नई किताबें खरीदने का दबाव बनाते हैं। इस साल भी ऐसी कई शिकायतें सामने आईं, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया।
शिकायतों के आधार पर कई स्कूलों को नोटिस जारी किए गए। इसी सख्ती का असर है कि स्कूलों को अब पीछे हटना पड़ा और उन्हें पुरानी किताबों को मान्य करने के लिए मैसेज भेजने पड़े।
शिक्षा विभाग की सख्त मॉनीटरिंग
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) नरेंद्र अहिरवार ने साफ कर दिया है कि किताबों और कोर्स के नाम पर मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि विभाग लगातार मॉनीटरिंग कर रहा है और दोषी स्कूलों को नोटिस दिए जा रहे हैं। कोई भी स्कूल अभिभावकों को एनसीईआरटी (NCERT) कोर्स से हटकर महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है।
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