अनुकंपा नियुक्ति मिलते ही बदली बेटी की नीयत, लकवाग्रस्त बुजुर्ग पिता को घर से निकाला
भोपाल में होने वाली कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में इस बार शिकायतों का अंबार लग गया। कुल 188 लोग अपनी-अपनी परेशानियां लेकर कलेक्टर के पास पहुंचे।
इनमें से तीन मामले ऐसे थे जिन्होंने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। इसमें पारिवारिक विवाद से लेकर सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी और बैंक घोटाले तक के मामले शामिल हैं।
केस 1 बेटी ने बुजुर्ग पिता को घर से निकाला
जनसुनवाई में सबसे भावुक कर देने वाला मामला ईदगाह हिल्स के रहने वाले 81 साल के पूरन सिंह यादव का था। पूरन सिंह यादव ने रोते हुए कलेक्टर को अपनी आपबीती सुनाई।
क्या है पूरा विवाद?
- पूरन सिंह की पत्नी सरकारी नौकरी में थीं। उनकी मौत के बाद पूरन सिंह ने अपने बेटों को छोड़कर अपनी बेटी को अनुकंप नियुक्ति दिलाई थी।
- नौकरी मिलते समय बेटी हेमा ने वादा किया था कि वह अपने बुजुर्ग पिता और भाइयों का पूरा ख्याल रखेगी।
- नौकरी मिलने के बाद बेटी अपने वादे से पलट गई। पूरन सिंह का आरोप है कि बेटी ने उन्हें उनके ही घर से बाहर निकाल दिया है। साथ ही मकान पर कब्जा कर लिया है। वह उन्हें रहने और खाने-पीने के लिए कुछ भी नहीं देती है।
बुजुर्ग पिता की हालत और बेटी की संपत्ति
पूरन सिंह यादव को लकवा की बीमारी है। इजिसकी वजह से उन्हें चलने-फिरने में बहुत ज्यादा परेशानी होती है। हैरानी की बात यह है कि बेटी हेमा यादव के पास पहले से ही दो प्लॉट और शीतल नगर में एक मकान है।
इसके बावजूद वह वहां न रहकर अपने बुजुर्ग पिता के मकान पर कब्जा जमाए बैठी है।
इस मामले को सुनने के बाद कलेक्टर ने तुरंत एक्शन लिया। उन्होंने आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए एसडीएम बैरागढ़ को जिम्मेदारी सौंपी है।
केस 2 अवैध तरीके से बंट रहे पीएम आवास
जनसुनवाई में दूसरी बड़ी शिकायत बैरसिया इलाके से आई। बैरसिया के रहने वाले बजरंग दास ने कलेक्टर को एक शिकायती आवेदन सौंपा। इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है।
निजी जमीन पर अवैध कब्जा
बजरंग दास का कहना है कि इलाके का सचिव सुरेंद्र सिंह राजपूत नियमों के खिलाफ जाकर निजी जमीन पर पीएम आवास का फायदा बांट रहा है। इस काम में बलवन सिंह नाम का एक व्यक्ति इलाके में डर और दहशत फैला रहा है।
इसे सचिव का पूरा साथ मिला हुआ है। बलवन सिंह दूसरों की प्राइवेट जमीन पर जबरन प्रधानमंत्री आवास बनवा रहा है। इसकी वजह से इलाके में आए दिन विवाद और लड़ाई-झगड़े की स्थिति बन रही है।
केस 3 पात्रता से अधिक वेतन देने का मामला
तीसरा मामला वित्तीय गड़बड़ी से जुड़ा हुआ है। भोपाल को-ऑपरेटिव बैंक के एक रिटायर्ड कर्मचारी एमएस उदय शंकर ने जनसुनवाई में पहुंचकर बैंक प्रबंधन की पोल खोली।
जांच के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
उदय शंकर का आरोप है कि बैंक में 14 कर्मचारियों को उनकी पात्रता से कहीं ज्यादा वेतन मिल रहा है। साथ ही दूसरे वित्तीय लाभ भी दिए जा रहे हैं। इस मामले में संयुक्त आयुक्त सहकारिता की जांच रिपोर्ट भी आ चुकी है।
इसमें गड़बड़ी की बात साबित हो चुकी है। इसके बावजूद अब तक दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। न ही पैसों की वसूली की गई। इस वजह से बैंक को लगातार आर्थिक नुकसान हो रहा है। उन्होंने कलेक्टर से इस मामले में जल्द से जल्द जांच और रिकवरी की मांग की है।
जनसुनवाई के मुख्य मामलों पर एक नजर
| मामला | शिकायतकर्ता | मुख्य आरोपी / विभाग | शिकायत का कारण |
| पारिवारिक विवाद | पूरन सिंह यादव (81 वर्ष) | बेटी हेमा यादव | अनुकंपा नियुक्ति के बाद पिता को घर से निकाला और मकान पर कब्जा किया। |
| पीएम आवास घोटाला | बजरंग दास | सचिव सुरेंद्र सिंह और बलवन सिंह | निजी जमीन पर अवैध तरीके से प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ देना। |
| बैंक में वित्तीय गड़बड़ी | एमएस उदय शंकर (रिटायर्ड कर्मचारी) | भोपाल को-ऑपरेटिव बैंक के 14 कर्मचारी | पात्रता से अधिक वेतन देना और जांच रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई न करना। |
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