भोपाल डीईओ कार्यालय में घोटाला, अफसर के साइन बिना पास हुआ 1.55 करोड़ का बिल
समझें क्या है पूरा मामला...
- डीईओ कार्यालय से एक करोड़ 55 लाख रुपए का हिसाब गायब हुआ है।
- बिना डीईओ साइन बिलों के ही का भुगतान हो गया।
- इससे पहले जबलपुर DEO में 2019 में तीन करोड़ क्रीड़ा निधि घोटाला हुआ था।।
- इंदौर DEO में 2017 में वेतन-बिल फर्जीवाड़ा मामला सामने आया था।।
- भोपाल DPI में भी 2021 में फर्जी बिलों का खुलासा हुआ था।
भोपाल के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में फिर बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। अप्रैल 2023 से दिसंबर 2025 के बीच जिला शिक्षा अधिकारी ऑफिस से खेल निधि के एक करोड़ 55 लाख 43 हजार 356 रुपए का हिसाब गायब है।
हिसाब गायब होने से घोटाले के अंदेशे को देखते हुए संयुक्त संचालक अरविंद चौरागड़े ने नोटिस जारी किया है। जेडी ने डीईओ कार्यालय से 15 दिन में जवाब मांगा है।
बता दें कि जो हिसाब गायब हुआ है उससे डेढ़ करोड़ से ज्यादा के बिल पास हुए है। इन बिलों की जानकारी होने से जिला शिक्षा अधिकारी ने इंकार किया है। जबकि पास हुए बिलों पर डीईओ के हस्ताक्षर पाए गए हैं।
शिक्षा विभाग में ऐसी आर्थिक गड़बड़ी का यह पहला केस नहीं है। इससे पहले जबलपुर, इंदौर और भोपाल स्थित DPI कार्यालय में कैश बुक- वाउचर में हेराफेरी और फर्जी बिलों से करोड़ों के गबन के मामले सामने आ चुके हैं। इन सभी गड़बड़ियों में एक जैसा पैटर्न पाया गया है।
डीईओ कार्यालय में डेढ़ करोड़ गायब
जांच टीम ने 1 अप्रैल 2023 से दिसंबर 2025 तक क्रीड़ा निधि की जांच की। इस जांच में कैश बुक-वाउचर रजिस्टर में खामियां मिलीं। इसमें एक करोड़ 55 लाख 43 हजार 356 रुपए का हिसाब पेश ही नहीं किया गया।
सबसे बड़ी गड़बड़ी तो ये है कि कुछ बिल बिना डीईओ के हस्ताक्षर और स्वीकृति किए बिना ही पास कर दिए गए। जेडी ने इसे सिविल सेवा आचरण नियम का उल्लंघन और घोर लापरवाही बताया।
जबलपुर DEO, 2019 - तीन करोड़ क्रीड़ा निधि घोटाला
जबलपुर DEO कार्यालय में 2019 में क्रीड़ा निधि और छात्रवृत्ति की राशि में बड़ा घोटाला पकड़ा गया था। जांच में तीन करोड़ से ज्यादा की राशि के फर्जी बिल और गायब वाउचर मिले थे।
तत्कालीन DEO और बाबुओं पर कार्रवाई हुई थी। यहां भी बिना सक्षम अधिकारी के साइन के भुगतान का खेल था।
इंदौर DEO, 2017 - वेतन-बिल फर्जीवाड़ा
इंदौर DEO ऑफिस में 2017 में फर्जी नियुक्ति दिखाकर वेतन आहरित करने का मामला सामने आया था। ऑडिट में कई शिक्षकों के नाम पर लाखों का वेतन ऐसे लोगों को गया जो कभी स्कूल में थे ही नहीं।
साथ ही कैश बुक में एंट्री और बैंक भुगतान में बड़ा अंतर मिला था। कई लिपिक निलंबित हुए थे।
भोपाल DPI, 2021 - फर्जी बिलों से निकासी
लोक शिक्षण संचालनालय यानी DPI भोपाल में 2021 में स्टेशनरी, फर्नीचर और मरम्मत के नाम पर फर्जी बिलों से निकासी पकड़ी गई थी। जांच में पाया गया था कि बिना सामान खरीदे ही करोड़ों के बिल पास कर दिए गए।
इसमें हस्ताक्षर की प्रक्रिया को बायपास (दरकिनार) कर बाबुओं ने खुद ही फाइलें आगे बढ़ा दी थीं।
बिना साइन, हिसाब गायब
मध्य प्रदेश में शिक्षा विभाग के ये सभी मामले एक जैसे हैं। क्रीड़ा निधि, छात्रवृत्ति, वेतन या स्टेशनरी - हर बार कैश बुक-वाउचर में गड़बड़ी, बिल बिना साइन पास और करोड़ों का हिसाब गायब।
जेडी का नोटिस और 15 दिन की मोहलत के बाद भी सिस्टम नहीं सुधरा। अब सवाल ये कि डेढ़ करोड़ के इस केस में कार्रवाई होगी या फाइल दब जाएगी?
ये खबरें भी पढ़िए...
भोपाल में शत्रु संपत्ति पर एक्शन, मेपल हाउस समेत कई संपत्तियां जांच के दायरे में
एमपी में मनरेगा घोटाला, मौके पर सन्नाटा, कागजों पर काम कर रहे सैकड़ों मजदूर
एमपी के स्कूल शिक्षा विभाग में मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों का घोटाला, अब कलेक्टर करेंगे जांच
सतना राशन घोटाला, गरीबों के करोड़ों का अनाज डकार गए बाबू, 12 पर FIR दर्ज