भोपाल में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगों ने बुजुर्ग दंपती के साथ की क्रूरता, 36 लाख की ठगी

Sandeep Kumar | May 05, 2026, 24:03 IST
bhopal digital
भोपाल में ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए बुजुर्ग दंपती को 36 लाख रुपए की ठगी का शिकार बनाया और उनकी पत्नी को अस्पताल जाने की भी मोहलत नहीं दी।

News in Short

  • भोपाल के अरेरा कॉलोनी में बुजुर्ग दंपती से 36 लाख रुपए की ठगी हुई।
  • ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट की धमकी दी।
  • अविनाश कक्कड़ और उनकी पत्नी को मानसिक और शारीरिक तनाव में डाला गया।
  • ठगों ने पत्नी को घर में बंद कर दिया और मदद की अनुमति नहीं दी।
  • पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ठगों की गिरफ्तारी के लिए जांच शुरू की।

News in Detail

भोपाल में पहली बार डिजिटल अरेस्ट के नाम पर एक भयावह ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने बुजुर्ग दंपती को न केवल मानसिक और शारीरिक तनाव में डाला, बल्कि उन्हें 36 लाख रुपए की ठगी का शिकार भी बनाया। यह घटना अरेरा कॉलोनी के एक बुजुर्ग दंपती के साथ घटी। वृद्ध अविनाश कक्कड़ और उनकी पत्नी शशि कक्कड़ पर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट की प्रक्रिया लागू की और उन्हें गंभीर धमकियां दीं।



ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया

30 अप्रैल की रात, अविनाश कक्कड़ के मोबाइल पर एक वाट्सएप वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई पुलिस और सीबीआई का अधिकारी बताया और दावा किया कि उनके बैंक खातों में संदिग्ध लेन-देन हुआ है। ठग ने उन्हें डराया और कहा कि उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक जांच चल रही है। इसके बाद ठगों ने कक्कड़ से कहा कि उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रहना होगा, जिससे वे कहीं भी नहीं जा सकते।



मानसिक दबाव का शिकार हुआ परिवार

ठगों ने अविनाश और उनकी पत्नी को धमकाया कि वे किसी भी हालत में अपनी संपत्ति नहीं बचा सकते। इसके साथ ही, कक्कड़ से कहा गया कि वे अपने बैंक खाते से पूरी रकम "सुरक्षित जांच" के लिए ट्रांसफर करें। अविनाश कक्कड़ पर दबाव डाला गया, और उन्हें अंततः अपने खातों से 37.60 लाख रुपए ट्रांसफर करने पड़े। इसके बावजूद ठगों ने उनकी पत्नी को नजरबंद कर दिया और उन पर मानसिक दबाव बनाया।



पत्नी की मदद की भी नहीं दी मोहलत

अविनाश कक्कड़ जब बैंक गए तो ठगों ने उनकी पत्नी को एक कमरे में बंद कर दिया। वह वीडियो कॉल के जरिए घर में कैद रहीं। महिला घर में काम करते हुए गिर गई और उनके कूल्हे की हड्डी टूट गई, तो अविनाश ने ठगों से कुछ समय मांगा ताकि वह अपनी पत्नी को अस्पताल भेज सकें। लेकिन ठगों ने उन्हें एक पल के लिए भी मोहलत नहीं दी। इसके बाद अविनाश ने अपनी बेटी और दामाद को मदद के लिए बुलाया।



ठगों की क्रूरता का खुलासा

जैसे ही अविनाश के दामाद और बेटी उनके घर पहुंचे, उन्होंने मामले की जानकारी पुलिस को दी। फिर पुलिस ने ई-जीरो एफआईआर के माध्यम से हबीबगंज पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया। इस घटना में पुलिस ने अब तक ठगों की गिरफ्तारी के लिए जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने डिजिटल अरेस्ट की प्रक्रिया के नाम पर ठगों द्वारा किए गए अपराधों की गंभीरता को उजागर किया है।



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