एमपी में न्याय की लंबी कतार: 3.57 लाख केस पेंडिंग, एक मामले में 32 साल और 150+ तारीखें
समझें क्या है पूरा मामला
- भोपाल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में 1.50 लाख से ज्यादा केस पेंडिंग हैं।
- 20 हजार 302 मामले सिर्फ गवाहों के पेश न होने से अटके हैं।
- करीब 18 हजार केसों में सरकारी गवाह पेश नहीं हो रहे हैं।
- कुछ केस 32 साल तक पुराने हैं और 150 से ज्यादा बार तारीख दी जा चुकी है।
- एक्सपर्ट वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से गवाही और कंटेंप्ट की कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
कौन से सरकारी गवाह नहीं आ रहे
करीब 18 हजार मामलों में सरकारी गवाह पेश नहीं हो रहे हैं। इन केसों में पुलिस अधिकारी, डॉक्टर और फॉरेंसिक एक्सपर्ट शामिल हैं। फॉरेंसिक एक्सपर्ट यानी वे जानकार जो जांच में मिले सबूत को कोर्ट में समझाते हैं। बता दोें 1994 से लेकर अब तक के कई मामले सिर्फ गवाही पूरी न होने की वजह से फाइलों में पड़े हैं।
समन और वारंट के बाद भी नदारद गवाह
रिपोर्ट के मुताबिक, बार-बार समन और वारंट जारी होने के बावजूद अधिकारी कोर्ट से नदारद रहते हैं। गवाह के लिए समन और वारंट (Witness summons warrant) का मतलब है कि कोर्ट गवाह को बुलाने के लिए पहले नोटिस भेजती है। इसके बाद तारीख पर पेश न होने पर वारंट भी जारी किया जाता है। फिर भी कई गवाह नहीं पहुंचते हैं।
इसका सीधा असर आम फरियादियों (Complainants) पर पड़ रहा है। सालों-साल चक्कर काटने के बाद उन्हें सिर्फ अगली तारीख मिलती है। जानकारों का कहना है कि जब तक सरकारी गवाहों की जवाबदेही तय नहीं होगी और कड़े नियम नहीं बनेंगे। तब तक पेंडेंसी का बोझ कम नहीं होगा।
आखिर गवाह क्यों नहीं पहुंच रहे
- समन या नोटिस की तामील न होना और पता बदल जाना।
- सरकारी कर्मचारी का ट्रांसफर या रिटायरमेंट होने से उसे पेश कराना मुश्किल होना।
- दूसरी जगह पदस्थ होने के कारण तारीख पर न आ पाना।
- दस्तावेज समय पर उपलब्ध न होने से गवाही टलना।
- कई बार गवाह जान-बूझकर बचते हैं, क्योंकि पुराने मामले उन्हें ठीक से याद नहीं होते हैं।
32 साल पुराना मामला: 150 से ज्यादा तारीखें
यह 32 साल पुराना मामला 1994 में भोपाल में दर्ज हुआ था। यह धोखाधड़ी का केस है, जो सरकारी गवाह का बयान न होने से पेंडिंग में पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें अशरफ हुसैन, अनिल कुमार और देवेंद्र जैन को आरोपी बनाया गया था। ये नाम अभियोजन (Prosecution) के आरोप के तौर पर हैं। इन पर अभी कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ है।
इस केस में अब तक 150 से ज्यादा बार तारीख दी जा चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार अशरफ और अनिल के खिलाफ 2006 में सीबीआई ने भी केस दर्ज किया था। वह केस भी सरकारी गवाही न होने के कारण पेंडिंग है।
2005 से लंबित, 100 से ज्यादा सुनवाई
ऐसा ही एक और धोखाधड़ी का मामला 2005 से पेंडिंग है। यह 21 साल पुराना केस है। इसमें अब तक 100 से ज्यादा बार सुनवाई हो चुकी है। फिर भी सरकारी गवाह के पेश न होने से फैसला नहीं हो सका। लंबा समय बीतने के बाद भी मामला हल नहीं हुआ। इसकी वजह से सुनवाई और गवाहों की पेशी की व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।
एमपी में कितने मामले पेंडिंग हैं
| क्षेत्र | पेंडिंग मामले |
|---|---|
| प्रदेश | 3.57 लाख |
| इंदौर | 33,210 |
| रीवा | 31,868 |
| ग्वालियर | 17,382 |
| जबलपुर | 12,901 |
एक्सपर्ट की राय: वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और जुर्माना
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज दीपक अग्रवाल ने इसका हल बताया है। उनके मुताबिक, कई सरकारी गवाहों का दूसरी जगह ट्रांसफर हो जाता है। इस वजह से वे कोर्ट में पेश नहीं हो पाते हैं।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से गवाही क्यों
उन्होंने कहा कि कोर्ट को ऐसे गवाहों के बयान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से लेने चाहिए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से गवाही होने पर गवाह को बार-बार दूसरे शहर से आना नहीं पड़ेगा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि जो गवाह जान-बूझकर पेश नहीं हो रहे हैं। उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना (contempt of court) की कार्रवाई हो सकती है। इसमें जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
आगे क्या देखना होगा
अब सवाल यह है कि क्या अभियोजन (Prosecution) और अदालतें इन 18 हजार से ज्यादा मामलों के लिए कोई स्पेशल अरेंजमेंट करेगी। देखना होगा कि क्या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से गवाही की व्यवस्था बढ़ाई जाती है। यह भी देखना होगा कि क्या गैरहाजिर गवाहों पर जुर्माने जैसे कड़े कदम उठते हैं। तब तक फरियादियों (Complainants) को अगली तारीख का इंतजार ही रहेगा।
यह खबर क्यों जरूरी है
देर से मिला न्याय कई बार न्याय न मिलने जैसा होता है। संविधान में हर नागरिक को समय पर न्याय का अधिकार मिला है। जब सरकारी अफसर ही गवाही के लिए नहीं पहुंचते, तो आम फरियादी और आरोपी, दोनों सालों तक अटके रहते हैं। 32 साल पुराने केस में तो पीढ़ियां बदल जाती हैं। इसलिए सरकारी गवाहों की जवाबदेही तय होना जरूरी है।
FAQs
- भोपाल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में कितने मामले पेंडिंग हैं?
भोपाल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में 1.50 लाख से ज्यादा मामले पेंडिंग हैं, जिनमें से 20,302 मामले गवाहों के पेश न होने के कारण अटके हुए हैं। - सरकारी गवाह क्यों पेश नहीं हो रहे हैं?
सरकारी गवाह कई कारणों से पेश नहीं हो रहे हैं, जिसमें समन और नोटिस की तामील न होना, जगह का बदलना, ट्रांसफर या रिटायरमेंट शामिल हैं। - क्या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से गवाही की व्यवस्था की जाएगी?
यह पता नहीं है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से गवाही की व्यवस्था कब बढ़ाई जाएगी, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे गवाहों को कोर्ट में पेश होने की आवश्यकता कम होगी।