भोपाल में EOW की कार्रवाई : 46,600 वर्गफीट 'स्कूल की जमीन' हड़पने वाले जिशान अली सहित कई पर FIR
News in Short
- EOW ने नरेला शंकरी में 46,600 वर्गफीट शैक्षणिक भूमि के अवैध हस्तांतरण का मामला दर्ज किया ।
- मुख्य आरोपी जीशान अली ने साजिश रचकर स्कूल की आरक्षित जमीन निजी नाम पर कराई ।
- जांच में जीशान अली, उसकी पत्नी और तत्कालीन उप अंकक्षक सहित अन्य पर FIR हुई ।
- सहकारिता अधिकारी को मदद के बदले रॉयल रेसिडेंसी में आवासीय प्लॉट और मकान दिया गया।
- आरोपियों ने गवाहों को व्हाट्सएप से जवाब भेजकर और पैसे देकर जांच प्रभावित करने की कोशिश की ।
News in Detail
BHOPAL.मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भ्रष्टाचार और जालसाजी का बड़ा मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपए की 'शैक्षणिक भूमि' को निजी संपत्ति में बदलने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में मुख्य आरोपी जीशान अली समेत कई रसूखदारों और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
नरेला शंकरी में 46,600 वर्गफीट जमीन का फर्जीवाड़ा
यह पूरा मामला ग्राम नरेला शंकरी स्थित खसरा क्रमांक 243 की जमीन से जुड़ा है। जांच में पाया गया कि लगभग 46,600 वर्गफीट जमीन, जो नक्शे में स्कूल या कॉलेज जैसे शैक्षणिक कार्यों के लिए आरक्षित थी, उसे साजिश के तहत हड़प लिया गया। जांच अधिकारियों के अनुसार, यह जमीन सहकारी समितियों के जरिए निजी नामों पर दर्ज करा दी गई थी।
सहकारी समितियों को बनाया गया ढाल
आरोपी जीशान अली ने इस पूरी साजिश को अंजाम देने के लिए सहकारी संस्थाओं का इस्तेमाल किया। सबसे पहले इस जमीन का आवंटन 'प्राईम एजुकेशन सोसायटी' को किया गया था। उस समय इस सोसायटी की अध्यक्ष जीशान अली की मां, निकहत शमीम थीं। इसके बाद जमीन को 'वाटिका गृह निर्माण सहकारी समिति' को बेच दिया गया।
यह है कि यह पूरी समिति जीशान अली के ही इशारों पर चल रही थी। ईओडब्ल्यू की जांच में यह सामने आया कि इस समिति का कोई वास्तविक कामकाज नहीं था। इसका गठन केवल जमीन को सरकारी रिकॉर्ड से हटाकर निजी हाथों में सौंपने के लिए किया गया था।
सरकारी अधिकारी को 'रिश्वत' में मिला प्लॉट!
इस खेल में सहकारिता विभाग के तत्कालीन उप अंकेक्षक (Deputy Auditor) आरके कातुलकर की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। आरोप है कि कातुलकर ने नियमों को ताक पर रखकर जीशान अली के अवैध कार्यों में सहयोग किया। इसके बदले में जीशान अली ने कातुलकर के परिजनों के नाम पर अपनी 'रॉयल रेसिडेंसी' कालोनी में एक कीमती प्लॉट पर मकान बनवाकर दिया।
शपथ पत्र और गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश
जीशान अली ने समिति के पंजीकरण के समय प्रशासन को झूठा शपथपत्र दिया कि वह किसी और समिति का सदस्य नहीं है। जबकि असलियत में वह और उसकी पत्नी नाजनीन अली पहले से ही अन्य समितियों में शामिल थे।
इतना ही नहीं, जब ईओडब्ल्यू की जांच शुरू हुई, तो आरोपियों ने गवाहों को व्हाट्सएप के जरिए रटे-रटाए जवाब भेजने और उनके बैंक खातों में पैसे डालकर जांच को प्रभावित करने की भी कोशिश की।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
ईओडब्ल्यू ने जांच के बाद जीशान अली, नाजनीन अली, आर के कातुलकर, एके तिवारी और रामपाल धौसले सहित अन्य पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 61(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1)(d) के तहत केस दर्ज किया है। अब विभाग इस घोटाले की गहराई तक जाने के लिए आगे की विवेचना कर रहा है।
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