भोपाल में 1.5 लाख फर्जी गरीब सरकार के निशाने पर, पक्के मकान वालों का कटेगा बीपीएल से नाम
मध्य प्रदेश की राजधानी में गरीबी रेखा (BPL) की सूची को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। शहर के आलीशान और पक्के मकानों में रहकर गरीबों के हिस्से का अनाज और सरकारी सुविधाएं डकारने वाले फर्जी गरीबों पर अब सरकार का शिकंजा कसने वाला है।
आगामी जनगणना अभियान (जनगणना 2027) के दौरान प्रशासन एक विशेष मैपिंग के जरिए ऐसे परिवारों को चिन्हित कर सूची से बाहर करने की तैयारी में है।
पक्के मकान और फर्जी BPL कार्ड की खुली पोल
राजधानी के 85 वार्डों में चल रही मैपिंग के दौरान एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, शहर में करीब डेढ़ लाख ऐसे पक्के मकान हैं, जिनके मालिकों ने गलत डॉक्यूमेंट्स तैयार करवाकर खुद को बीपीएल सूची में शामिल कर रखा है।
प्रशासन का मानना है कि ये परिवार आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद फर्जीवाड़ा कर गरीबों के हक का लाभ उठा रहे हैं। अब जनगणना के दौरान होने वाले मकान सर्वे में इन कार्डधारियों की विशेष रूप से पहचान की जाएगी।
सुनवाई का मिलेगा मौका
हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कार्डधारी का नाम सीधे तौर पर नहीं काटा जाएगा। सूची से बाहर करने से पहले संबंधित परिवार को सुनवाई का उचित मौका दिया जाएगा। उनसे इस श्रेणी में शामिल होने की जायज वजह पूछी जाएगी। यदि परिवार अपनी पात्रता साबित करने में असफल रहता है और जांच में दोषी पाया जाता है, तो उनका कार्ड तुरंत निरस्त कर दिया जाएगा।
पोर्टल से गायब हुई सूची, उठ रहे हैं बड़े सवाल
जिले में बीपीएल कार्डधारियों के आंकड़ों को लेकर पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। साल 2021 तक बीपीएल धारकों (bpl card) की सूची प्रशासनिक पोर्टल पर सार्वजनिक रहती थी, जिसे अब गुप्त रखा गया है। आंकड़ों पर गौर करें तो भोपाल में करीब 3.78 लाख लोगों के पास बीपीएल कार्ड हैं, जो शहर की कुल आबादी का लगभग 60 प्रतिशत है। इतनी बड़ी आबादी का गरीबी रेखा के नीचे होना प्रशासनिक विसंगतियों की ओर इशारा करता है।
जनगणना में हर समस्या का होगा समाधान
आगामी जनगणना अभियान इस फर्जीवाड़े को रोकने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा। इस दौरान घर, परिवार के सदस्य, वार्षिक कमाई और घर में मौजूद सुख-सुविधा के साधनों का बारीकी से पता लगाया जाएगा। सर्वे टीम जब घर-घर पहुंचेगी, तो पक्के मकान और जीवन स्तर को देखकर यह साफ हो जाएगा कि कौन वास्तव में पात्र है और कौन फर्जी तरीके से लाभ ले रहा है।
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