बैरिकेड तोड़ भोपाल में घुसे 2 हजार किसान, शहर में जगह-जगह जाम, लोग परेशान

Sanjay Dhiman | Jul 28, 2026, 18:03 IST
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संयुक्त किसान मोर्चा की 'किसान क्रांति पैदल यात्रा' मंगलवार को भोपाल पहुंच गई। मंडीदीप स्थित भोपाल सीमा पर कलियासोत नदी के ब्रिज के पास पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़कर करीब 2 हजार किसान राजधानी में घुस गए।

मध्यप्रदेश में किसानों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया है। मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चा की पैदल यात्रा भोपाल पहुंच गई। हजारों किसान अपनी मांगों को लेकर राजधानी की ओर बढ़े।



यह यात्रा 100% सरकारी मूंग खरीदी और खाद वितरण में सुधार की मांग को लेकर निकाली गई थी। इसका नाम 'किसान क्रांति पैदल यात्रा' रखा गया। मंडीदीप में भोपाल सीमा के पास इसे रोकने की कोशिश हुई।



बैरिकेड तोड़कर भोपाल में एंट्री

कलियासोत नदी के ब्रिज के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाई थी। भारी पुलिस बल मौके पर तैनात था। लेकिन किसानों ने बैरिकेड तोड़ दिए।



करीब 2 हजार किसान पैदल भोपाल में घुस गए। उनके पीछे ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहन भी चल रहे थे। पुलिस इस दबाव के आगे रोक नहीं पाई।



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एमपी नगर से लेकर होशंगाबाद रोड तक जाम जैसे हालात

शहर में प्रवेश के साथ ही किसानों का हुजूम होशंगाबाद रोड से सीएम हाउस की ओर बढ़ रहा है। इधर किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने होशंगाबाद रोड से लेकर वीर सावरकर सेतु तक बैरिकेटिंग की है। लेकिन इस बैरिकेटिंग से शहर के अन्य हिस्सों में जाम जैसे हालात बन गए। पुलिस वाहनों को अलग-अलग रास्तों से डायवर्ट कर रही है, लेकिन इससे व्यवस्था सुधरने की बजाए और बिगड़ती दिख रही है।



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आक्रोश संभालने सड़क पर उतरे आला अधिकारी

किसानों के मार्च का इनपुट होने के बाद भी पुलिस पुख्ता व्यवस्था नहीं कर सकी। इधर लगातार शहर की ओर बढ़ती किसानों की भीड़ ने टेंशन और बढ़ा दी है। किसानों का आक्रोश संभालने के लिए खुद पुलिस कमिश्नर संजय सिंह, एडिशनल सीपी शैलेंद्र सिंह चौहान समेत 15 से ज्यादा थानों की पुलिस RAF,SAF बल मौके पर मौजूद है।



तिरंगा लेकर आगे बढ़े किसान

भोपाल में घुसने के बाद किसानों ने हाथों में तिरंगा थाम लिया। वे लगातार 'जय जवान-जय किसान' के नारे लगाते रहे। यह नजारा पूरे रास्ते देखने को मिला।



किसानों का काफिला अब मुख्यमंत्री आवास की तरफ बढ़ चुका है। ट्रैक्टर-ट्रॉली और वाहनों की कतार भी साथ चल रही है। प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।



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सात दिन का राशन साथ लाए किसान

यह आंदोलन लंबा खिंच सकता है। इसका अंदाजा किसानों की तैयारी से लग रहा है। वे ट्रैक्टर-ट्रॉली में सात दिन का राशन-पानी लेकर आए हैं।



कई किसान पहले से दाल-बाटी बनाकर भी लाए हैं। उनका कहना है कि मांगें पूरी होने तक वे पीछे नहीं हटेंगे। किसी भी परिस्थिति का सामना करने की तैयारी उन्होंने कर रखी है।



19 संगठन आंदोलन में शामिल

इस आंदोलन को अकेले किसी एक संगठन ने नहीं बल्कि 19 किसान संगठनों ने मिलकर खड़ा किया है। संयुक्त किसान मोर्चा इसका नेतृत्व कर रहा है। यह एकजुटता आंदोलन को और मजबूत बना रही है।



सुबह के समय औबेदुल्लागंज टोल प्लाजा के पास किसानों को कुछ देर रोका गया था। प्रशासन ने बातचीत कर उन्हें इंतजार करने का आग्रह किया। लेकिन किसान जल्द ही पैदल मार्च पर निकल पड़े।



20 दिसंबर 2010... जब किसानों के आंदोलन से थम गई थी भोपाल की रफ्तार

मंगलवार को किसानों के राजधानी में घुसने की घटना ने 16 साल पुरानी यादें ताजा कर दी। 20 दिसंबर 2010 में भारतीय किसान संघ के बैनर तले हजारों किसानों ने राजधानी में डेरा डाल लिया था। अचानक हजारों की संख्या में किसानों के राजधानी की सड़कों पर आने से भोपाल की रफ्तार थम गई थी। दो दिनों तक शहर में जाम की हालत बन गई थी। मंगलवार को भी दो हजार से अधिक किसान पुलिस बैरिकेटिंग तोड़कर राजधानी में पहुंच चुके है। यह किसान अपनी मांगों को लेकर सीएम हाउस के घेराव की घोषणा कर चुके है। जो अब सीएम हाउस की ओर बढ़ भी रहे है।



20 दिसंबर की सुबह का आंखों देखा हाल

20 दिसंबर 2010 की सुबह भोपाल के लोगों ने एक अलग ही नजारा देखा था। शहर की सड़कों पर अचानक बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टरों के साथ पहुंच गए थे। न्यू मार्केट से मुख्यमंत्री निवास आने वाले रास्ते पर सबसे पहले किसानों की भीड़ नजर आई थी।



कुछ ही समय में चेतक ब्रिज, राजभवन से पॉलीटेक्निक चौराहा, रोशनपुरा से कमला पार्क और सीएम हाउस से टीटीटीआई तक के इलाकों में सड़कें किसानों से भर गए थी। शहर की सड़कों पर हर तरफ ट्रैक्टर, किसान, अलाव और खाना बनाने की व्यवस्था दिखाई दे रही थी।



दो दिन तक प्रभावित रहा था जनजीवन

किसानों के इस आंदोलन का असर पूरे भोपाल पर पड़ा था। करीब दो दिन तक शहर की कई प्रमुख सड़कों पर किसानों का कब्जा रहा। प्रशासन को स्कूल-कॉलेज बंद करने पड़े और कई परीक्षाएं टालनी पड़ीं।



एयरपोर्ट और अस्पताल जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी अपने निवास तक पहुंचने में दिक्कत हुई। उन्हें पीटीआरआई से मानव संग्रहालय होते हुए कई रास्ते बदलकर वल्लभ भवन पहुंचना पड़ा था।



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