पूर्व आईएएस राकेश अग्रवाल हत्याकांड में नया मोड़, 1.5 करोड़ का विवाद आया सामने, उधर केयरटेकर ने घर ब्लास्ट की रची थी साजिश
48 घंटे बाद भी हत्या की वजह साफ नहीं
भोपाल में 70 वर्षीय पूर्व आईएएस राकेश अग्रवाल की हत्या हुई थी। वारदात के 48 घंटे बीतने के बाद भी हत्या का मकसद साफ नहीं है। आरोपी केयरटेकर वरुण कपूर घटना के बाद से ही लगातार फरार चल रहा है।
लूट का केस दर्ज और पत्नी से पूछताछ
शुरुआत में पुलिस को घर में लूटपाट के कोई सबूत नहीं मिले थे। अब घर से अग्रवाल की घड़ी, सोने की अंगूठी और मोबाइल गायब मिले हैं। इसके अलावा अन्य जरूरी सामान भी गायब पाया गया है। पुलिस ने आरोपी वरुण पर हत्या के साथ लूट का केस दर्ज कर लिया है। वहीं अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद पत्नी निशि अग्रवाल से भी पूछताछ की गई।
डेढ़ करोड़ की पुरानी धोखाधड़ी और उधारी का एंगल
जांच के दौरान पुलिस के सामने आर्थिक लेन-देन का नया विवाद आया है। अग्रवाल ने 11 महीने पहले एक परिचित पर धोखाधड़ी का केस कराया था। अक्टूबर 2025 में दर्ज क्राइम ब्रांच केस में डेढ़ करोड़ के गबन का आरोप था।
कंपनी में निवेश पर भारी रिटर्न का झांसा देकर उनसे रकम ली गई थी। इस मामले में न मुनाफा मिला और न ही मूल रकम वापस लौटी। पुलिस इस मामले में अदालत में चालान पेश कर चुकी है। इसके अलावा अग्रवाल ने कुछ अन्य लोगों को भी रकम उधार दी थी। पुलिस अब इन सभी पुराने लेन-देन और आर्थिक विवादों की जांच कर रही है।
घर को आग से उड़ाने की खौफनाक साजिश
वारदात की रात पूरे घर में आग लगाने की साजिश रची गई थी। अमर सिंह पालीवाल के अनुसार एक गैस सिलेंडर की पिन में कुछ फंसाया था। इसके साथ ही दूसरे गैस सिलेंडर का रेगुलेटर भी खुला छोड़ दिया गया। प्रेस का प्लग काटकर उसके तार सीधे बिजली के स्विच बोर्ड में जोड़े।
चालू प्रेस को कपड़े पर छोड़ा गया ताकि फैलती गैस में आग लग सके। सुबह गैस की तेज गंध आने के कारण किसी ने लाइट नहीं जलाई। पुलिस जांच कर रही है कि क्या यह साजिश सबूत मिटाने के लिए थी।
अमर के अनुसार घटना की रात वरुण बंगले के बाहर काफी परेशान दिखा था। वह पहले भी बच्चों से नजदीकी बढ़ाने और घर आने की कोशिश करता था। गतिविधि संदिग्ध लगने पर अमर ने परिजनों को उससे बात न करने को कहा था।
जांच में सामने आईं तीन अहम नई कड़ियां
हत्याकांड की जांच में तीन बेहद महत्वपूर्ण कड़ियां पुलिस के सामने आई हैं। बंगले में मौजूद तीन पालतू कुत्ते अजनबी को देखकर हमेशा भौंकते थे। वारदात की रात तीनों पालतू कुत्तों में से एक भी नहीं भौंका था। आशंका है कि कुत्तों को कोई नशीला पदार्थ खिलाया या सुंघाया गया था। हालांकि इस नशीले पदार्थ की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
आरोपी का रूट ग्वालियर तक रेलवे और सीसीटीवी कैमरों से ट्रैक हो चुका है। वरुण रात 2:52 बजे एक व्यक्ति के साथ बाइक पर दिखाई दिया था। इसके बाद वह तड़के 4:12 बजे केरल एक्सप्रेस ट्रेन में सवार हुआ था। बीना के बाद ग्वालियर रेलवे स्टेशन के कैमरों में भी उसके फुटेज मिले हैं।
आरोपी का पुराना सिम एक्टिव हुआ है और लोकेशन के आधार पर तलाश जारी है। वरुण का परिवार ग्वालियर की वाल्मीकि कॉलोनी में रहता है। उसके पिता वहां मजदूरी करते हैं और उनकी तीन शादियां हुई हैं। वरुण पहली पत्नी का बेटा है और अक्सर बाहर ही घूमता रहता है। पुलिस ने पिता से पूछताछ की, लेकिन वरुण के ठिकाने की जानकारी नहीं मिली।
बीमारी के चलते रखा था केयरटेकर
रिटायर्ड आईएएस अग्रवाल कुछ दिन पहले बीमार पड़े थे। इसलिए केयरटेकर रखा गया था। एजेंसी ने पहले विनोद को भेजा था, जो शादी की छुट्टी पर चला गया। विनोद की जगह वरुण को भेजा गया, जिसने वारदात से तीन दिन पहले काम संभाला।
एजेंसी संचालक अखिलेश वर्मा के मुताबिक वरुण करीब 25 दिनों से एजेंसी के साथ था। वरुण ने एजेंसी को आधार और पटियाला पुलिस का वेरिफिकेशन दस्तावेज दिया था। हालांकि एजेंसी ने अपने स्तर पर उसके दस्तावेजों की कोई जांच नहीं कराई थी।
इससे पहले वरुण पंजाबी बाग में तीन दिन और शिवलोक फेज-3 में काम कर चुका था। एजेंसी संचालक ने बताया कि वे केयरटेकर को तीन-चार दिनों में बदलते रहते हैं। वरुण ने पहले नाइट ड्यूटी से मना किया था, इसलिए उसे काम से हटाया था। तीन-चार दिन बाद वह लौटा और नाइट ड्यूटी के लिए राजी हो गया। इसके बाद एजेंसी ने वरुण को पूर्व आईएएस राकेश अग्रवाल के घर भेजा था।
पांच राज्यों में पुलिस की दबिश और छापेमारी
आरोपी वरुण कपूर की तलाश में जोन-1 की 5 टीमें और क्राइम ब्रांच जुटी हैं। पुलिस टीमें ग्वालियर, मथुरा, आगरा, पटियाला और दिल्ली में लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार के मुताबिक इस मामले में कई अहम सुराग मिले हैं। पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि आरोपी के पकड़े जाने के बाद पूरा खुलासा होगा।