हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद, भोपाल गैस पीड़ितों को नहीं मिला साफ पानी
News in short
- हाईकोर्ट ने मई माह के पहले सप्ताह तक दी थी मियाद।
- UCIL मिट्टी-भूजल जांच के लिए सरकार ने मांगा था समय।
- 3 मार्च को ACS हेल्थ के साथ हुई थी बैठक।
- सर्वे-एजेंसी चयन पर सहमति बनने पर भी नहीं किया अमल।
- गैस पीड़ित परिवार दूषित पानी पीने को मजबूर।
News in Detail
गैस त्रासदी पीड़ित हजारों परिवारों को स्वच्छ पानी अभी भी मुश्किल है। हाईकोर्ट के आदेश और समय देने के बाद भी इसकी प्लानिंग नहीं हो पाई है। गैस राहत विभाग की उदासीनता के कारण मई माह का पहला सप्ताह पूरा होने पर भी सर्वे तक शुरू नहीं हुआ है। वहीं इसके लिए प्लान तैयार करने वाली एजेंसी पर भी अधिकारी चुप्पी साधे हैं।
40 साल से साफ पानी मिलने की आस
गैस त्रासदी पीड़ितों की 40 साल बाद भी अनदेखी जारी है। यूनियन कार्बाइड के पास की बस्तियों में रसायन के कारण पानी जहरीला हो चुका है। हाईकोर्ट ने मई के पहले सप्ताह तक शुद्ध पानी का प्लान मांगा था। इसके लिए दी गई समय सीमा समाप्त होने जा रही है। उधर अधिकारी हाईकोर्ट जस्टिस विवेक कुमार सिंह और अजय कुमार निरंकारी की बेंच के प्लानिंग के निर्देश को अनदेखा कर रहे हैं। यह स्थिति तब है जबकि सरकार ने स्वयं हलफनामा देकर प्लानिंग तैयार करने समय मांगा था। 3 मार्च 2026 को ACS हेल्थ के साथ गैस राहत और प्रशासनिक अधिकारी बैठक भी कर चुके हैं।
पानी के प्लान की डेडलाइन फेल
हाईकोर्ट ने 22 बस्तियों के लिए शुद्ध पानी का प्लान मांगा था। मई पहले सप्ताह डेडलाइन थी। समय निकल गया। गैस राहत विभाग और प्रशासन एजेंसी तक नहीं चुन सका। जेपी नगर, काजी कैंप, अन्ना नगर में हैंडपंप का पानी जहरीला है। जांच में लेड, मरकरी, क्लोरोफॉर्म मिला। लोग बीमार हो रहे हैं। कैंसर और किडनी फेल के केस बढ़े हैं।
UCIL की सफाई कराने मांगा समय
यूनियन कार्बाइड कचरा सफाई का मामला हाईकोर्ट में है। जस्टिस सिंह और निरंकारी की बेंच सुनवाई कर रही है। सरकार ने हलफनामा दायर किया है। इसमें UCIL कारखाने के अंदर और आसपास की दूषित मिट्टी, भूजल, दबे कचरे की जांच का प्लान देने के लिए समय मांगा है। साथ ही UCIL प्लांट को विषमुक्त करने और समयबद्ध सफाई का प्लान भी बाकी है।
बैठक के निर्णय पर नहीं अमल
3 मार्च 2026 को स्वास्थ्य विभाग के ACS और अफसरों की बैठक हुई थी। इसमें ऐसी संस्थाओं को बुलाया गया जो जांच और सफाई कर सकें। पिछले माह हाईकोर्ट के आदेश पर गैस राहत विभाग ने भी बैठक की थी। इसमें सर्वे और प्लान के लिए एजेंसी चयन पर सहमति बनी थी। पर एजेंसी कौन सी चुनी गई? प्लान बना या नहीं? अफसर इस पर मौन हैं।
एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल, पर काम नहीं
सरकार हाईकोर्ट में एक्शन टेकन रिपोर्ट का हलफनामा जमा कर चुकी है। पर जमीन पर काम नहीं दिख रहा। UCIL परिसर के 21 गड्ढों में जहरीला कचरा दफन है। सोलर एवापोरेशन पॉन्ड में कीचड़ पड़ा है। इसकी सफाई की टाइमलाइन भी नहीं दी गई।
40 साल से तारीखों में दबी प्लानिंग
भोपाल गैस त्रासदी पीड़ित: 1984 की गैस त्रासदी में हजारों लोग मारे गए थे। कारखाने का केमिकल जमीन में अब भी रिस रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में सफाई को कहा था। हाईकोर्ट भी कई आदेश दे चुका है। इसके बावजूद न शुद्ध पानी मिला, न कचरा हटा। पीड़ित रशीदा बी कहती हैं, बैठक होती है, कागज बनते हैं। पर हम जहर पी रहे हैं।
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