सिलेक्टेड डॉक्टर ने छोड़ी नौकरी और निकली नई भर्ती, जीएमसी की मनमानी पर HC की रोक

Neel Tiwari | Jul 29, 2026, 13:30 IST
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गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल में चयनित डॉक्टर के इस्तीफे के बाद वेटिंग लिस्ट उम्मीदवार को नियुक्ति नहीं मिलने पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने नई भर्ती पर अंतरिम रोक लगाई।

समझें क्या है पूरा मामला

  • गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल ने 2023 में सहायक प्राध्यापक का पद निकाला था।
  • चयनित डॉक्टर ने जॉइन करने के तीन महीने बाद इस्तीफा दे दिया।
  • वेटिंग लिस्ट में दूसरे नंबर पर रहे डॉक्टर ने नियुक्ति की मांग की।
  • कॉलेज ने वेटिंग लिस्ट से नियुक्ति देने के बजाय नया नोटिफिकेशन जारी कर दिया।
  • अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने नई नियुक्ति पर अंतरिम रोक लगाकर जवाब मांगा है।

भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में चयनित डॉक्टर के इस्तीफा देने के बाद भी वेटिंग लिस्ट के उम्मीदवार को नियुक्ति नहीं मिली। नए नोटिफिकेशन को चुनौती देने पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फिलहाल नई नियुक्ति पर रोक लगा दी है और कॉलेज व राज्य सरकार से जवाब मांगा है।



सिलेक्ट कैंडिडेट के पद छोड़ने से चर्चा में मामला

सरकारी भर्ती में वेटिंग लिस्ट का मकसद साफ होता है। अगर चयनित उम्मीदवार नौकरी नहीं करता या बीच में पद छोड़ देता है, तब वेटिंग लिस्ट के उम्मीदवार को मौका मिल सकता है। लेकिन भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में ऐसा नहीं हुआ। इसी फैसले ने अब कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है।



मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने इस मामले में अहम अंतरिम आदेश दिया है। कोर्ट ने फिलहाल नए चयन पर रोक लगा दी है। साथ ही राज्य सरकार और गांधी मेडिकल कॉलेज से पूरा जवाब भी मांगा है।



कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

गांधी मेडिकल कॉलेज ने 10 अप्रैल 2023 को भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया था। अगले दिन संशोधित नोटिफिकेशन निकला। इसमें एनेस्थीसिया विभाग में सहायक प्राध्यापक का एक पद जोड़ा गया।



इस पद के लिए डॉ. पार्थ राय ने भी आवेदन किया। 27 जुलाई 2023 को इंटरव्यू हुआ। इसके बाद मेरिट सूची जारी हुई। मेरिट में डॉ. जितेंद्र कुशवाह पहले स्थान पर रहे। उन्हें नियुक्ति मिली। डॉ. पार्थ राय दूसरे स्थान पर रहे। उन्हें वेटिंग लिस्ट में पहला स्थान मिला।



चयनित डॉक्टर ने नौकरी छोड़ी, फिर आया नोटिफिकेशन

रिकॉर्ड के अनुसार चयनित डॉक्टर ने नौकरी जॉइन कर ली। उन्होंने करीब तीन महीने तक काम किया। इसके बाद 28 दिसंबर 2023 को उन्होंने इस्तीफा दे दिया।



यहीं से पूरा विवाद शुरू हुआ। डॉ. पार्थ राय का कहना है कि अब उन्हें नियुक्ति मिलनी चाहिए थी। क्योंकि वे वेटिंग लिस्ट में पहले नंबर पर थे। लेकिन कॉलेज ने ऐसा नहीं किया। इसके बजाय 5 जनवरी 2024 को उसी पद के लिए नया नोटिफिकेशन जारी कर दिया।



वेटिंग लिस्ट उम्मीदवार पहुंचे कोर्ट

डॉ. पार्थ राय ने पहले 4 जनवरी 2024 को कॉलेज प्रशासन के सामने आवेदन दिया। उन्होंने वेटिंग लिस्ट के आधार पर नियुक्ति की मांग रखी। जब कोई फैसला नहीं हुआ, तब उन्होंने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की। सिंगल बेंच ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने उस आदेश को चुनौती देते हुए रिट अपील दायर की।



मेरिट लिस्ट की अनदेखी और मनमानी के आरोप

अपीलकर्ता की ओर से कहा गया कि वेटिंग लिस्ट केवल नाम भर के लिए नहीं बनती। उसका मकसद ऐसी स्थिति से निपटना होता है, जब चयनित उम्मीदवार नौकरी छोड़ दे। यह भी कहा गया कि नया नोटिफिकेशन जारी करना मनमाना कदम था। पहले वेटिंग लिस्ट पर फैसला होना चाहिए था।



अपील में यह भी दलील दी गई कि जिस सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सहारा लिया गया, उसके तथ्य इस मामले से अलग थे। इसलिए उसे यहां लागू नहीं किया जा सकता।



गांधी मेडिकल कॉलेज सहित सरकार से मांगा जवाब

जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी. पी. शर्मा की खंडपीठ ने शुरुआती सुनवाई के बाद कहा कि मामले में कॉलेज और राज्य सरकार का विस्तृत जवाब जरूरी है। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि संबंधित पद पर किसी नए उम्मीदवार की नियुक्ति हुई है या नहीं। इसका पूरा विवरण भी मांगा गया है।



नई नियुक्ति पर फिलहाल रोक

हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई तक गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल में एनेस्थीसिया विभाग के सहायक प्राध्यापक पद पर नई नियुक्ति नहीं की जाएगी। यह रोक तभी तक रहेगी, यदि पहले से नियुक्ति नहीं की गई हो। मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त 2026 को होगी। उसी दिन कॉलेज और राज्य सरकार अपना विस्तृत जवाब पेश करेंगे।



इस आदेश का क्या असर हो सकता है?

यह मामला केवल एक डॉक्टर की नियुक्ति तक सीमित नहीं है। इसका असर भविष्य की सरकारी भर्तियों पर भी पड़ सकता है। यदि कोर्ट वेटिंग लिस्ट के पक्ष में फैसला देती है, तो कई संस्थानों को अपनी भर्ती प्रक्रिया पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। साथ ही यह भी तय हो सकता है कि चयनित उम्मीदवार के इस्तीफे के बाद वेटिंग लिस्ट को कितना महत्व दिया जाना चाहिए।



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