भोपाल-ग्वालियर एक्सप्रेसवे: 100 किमी कम होगा सफर, जानें कितने किमी बनेगा यह रोड

Jitendra Shrivastava | Aug 05, 2026, 23:33 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. भोपाल और ग्वालियर के बीच 320 किमी लंबा फोरलेन एक्सप्रेसवे बनेगा। इससे दूरी 100 किमी कम होगी। एमपीआरडीसी ने डीपीआर के लिए टेंडर जारी किया है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • भोपाल से ग्वालियर अब 100 किमी कम दूरी में, नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवेतैयार।
  • 320 किमी लंबा फोरलेन बनेगा, साढ़े सात घंटे का सफर होगा कम।
  • भोपाल-ग्वालियर कॉरिडोर के लिए टेंडर जारी, 12 माह में डीपीआर तैयार।
  • नए ग्रीनफील्ड रूट से भोपाल-ग्वालियर की दूरी घटेगी, समय बचेगा।
  • 6.23 करोड़ से होगा सर्वे, तीन रूटों पर तय होगा फैसला।

भोपाल और ग्वालियर को जोड़ने के लिए नया फोरलेन एक्सप्रेसवे बनेगा। यह करीब 320 किलोमीटर लंबा होगा। एमपीआरडीसी ने इसकी डीपीआर तैयार कराने के लिए टेंडर जारी किया है। इससे मौजूदा दूरी करीब 100 किलोमीटर कम हो जाएगी। सर्वे के लिए 6.23 करोड़ रुपए तय किए गए हैं।



मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी – Madhya Pradesh Road Development Corporation) ने इस बड़ी परियोजना की दिशा में पहला कदम बढ़ाया है। भोपाल से ग्वालियर के बीच ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल फोरलेन कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इसके लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर – Detailed Project Report) तैयार कराने का टेंडर जारी हुआ है।



डीपीआर के दौरान तीन संभावित अलाइनमेंट का सर्वे किया जाएगा। इसी सर्वे के आधार पर अंतिम रूट तय होगा। साथ ही भूमि अधिग्रहण, बायपास और इंटरचेंज जैसे तकनीकी पहलुओं का भी अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद परियोजना का अंतिम स्वरूप सामने आएगा।



6.23 करोड़ की लागत से होगा सर्वे

अभी यह तय नहीं है कि यह फोरलेन किन शहरों और गांवों से होकर गुजरेगा। सर्वे के लिए 6.23 करोड़ रुपए की राशि तय की गई है। चयनित एजेंसी सर्वे पूरा करने के बाद संभावित अलाइनमेंट प्रस्तावित करेगी। इन्हीं की फिजिबिलिटी देखकर निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।



यह प्रोजेक्ट ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर के तौर पर बनेगा। इसका मतलब है कि सड़क पूरी तरह नए रास्ते पर बनेगी। वाहनों का प्रवेश और निकास सिर्फ तय इंटरचेंजों से ही हो सकेगा।



एमपीआरडीसी ने डीपीआर तैयार करने के लिए एक शर्त भी रखी है। कंसल्टेंट को अलग-अलग विकल्पों का सर्वे करना होगा। इसके बाद सबसे उपयुक्त अलाइनमेंट चुना जाएगा। इसमें भू-आकृति, यातायात, भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय असर, निर्माण लागत और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा।



जीआईएस आधारित परीक्षण, 12 माह की समय-सीमा

डीपीआर के दौरान तीनों संभावित रूटों की जीआईएस (GIS – Geographic Information System) आधारित जांच भी होगी। इसके बाद जरूरी विभागीय अनुमतियां ली जाएंगी। तकनीकी परीक्षण पूरा होने पर ही अंतिम रूट तय किया जाएगा।



एमपीआरडीसी ने पूरी डीपीआर तैयार करने के लिए 12 महीने का समय तय किया है। कंसल्टेंट को सड़क की डिजाइन, पुल-पुलिया, इंटरचेंज, बायपास, सर्विस रोड और जल निकासी जैसी सभी बातों का प्रस्ताव तैयार करना होगा। इसमें भूमि अधिग्रहण और उपयोगिताओं के स्थानांतरण की योजना भी शामिल होगी।



100 किलोमीटर घटेगी दूरी, बचेगा समय

अभी ग्वालियर से भोपाल जाने के लिए शिवपुरी-गुना वाले रास्ते से जाना पड़ता है। यह दूरी करीब 428 किलोमीटर है। इसे तय करने में साढ़े सात घंटे लगते हैं। भोपाल-ग्वालियर एक्सप्रेसवे बनने पर यह दूरी घटकर 320 किलोमीटर रह जाएगी। यानी करीब 100 किलोमीटर की बचत होगी।



कंसल्टेंट कंपनी को ऐसा रूट तैयार करना होगा, जिसमें भूमि अधिग्रहण में ज्यादा दिक्कत न आए। साथ ही निर्माण कार्य भी तेजी से पूरा हो सके। यह प्रोजेक्ट पूरा होने पर भोपाल और ग्वालियर के बीच तेज, सुरक्षित और नियंत्रित यातायात वाला नया कॉरिडोर मिलेगा।



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