भोपाल में हिडन हंगर की दस्तक: हट्टे-कट्टे दिखने वाले बच्चे भी कुपोषण का शिकार
समझें क्या है पूरा मामला
- भोपाल के सरकारी और निजी अस्पतालों में कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ रही है।
- प्रदेश में ऐसे बच्चे देखने में स्वस्थ और हट्टे-कट्टे लगते हैं।
- लेकिन जांच में उनमें आयरन और विटामिन-बी12 की कमी मिल रही है।
- डॉक्टर इसे 'हिडन हंगर' यानी छिपा हुआ कुपोषण बता रहे हैं।
- एक अध्ययन में सामने आया है कि करीब 50% बच्चों में विटामिन-डी की कमी है।
अस्पतालों में क्यों बढ़ रहे मामले
भोपाल के जीएमसी (GMC – Gandhi Medical College) और हमीदिया अस्पताल सहित कई सरकारी और निजी अस्पतालों में यह बात सामने आई है। यहां आने वाले बच्चों की जांच में शरीर से जुड़ी कमियां मिल रही हैं। बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ खाने की मात्रा नहीं, बल्कि सही पोषण की कमी का मामला है।
अध्ययन ने बढ़ाई चिंता
भोपाल आधारित एक अध्ययन में 91.6 प्रतिशत लोगों में विटामिन-डी की कमी मिली। इनमें से 49 प्रतिशत बच्चे थे। शहरी क्षेत्रों में यह समस्या ज्यादा पाई गई।
10 शहरों के 2,428 स्कूली बच्चों पर हुए एक राष्ट्रीय अध्ययन में भी चिंताजनक आंकड़े सामने आए। इसमें 39.7 प्रतिशत बच्चों में विटामिन-डी की कमी मिली। वहीं 49.4 प्रतिशत बच्चे एनीमिया (Anemia – खून की कमी) से ग्रस्त पाए गए। 33.4 प्रतिशत बच्चों में विटामिन-बी12 की कमी दर्ज हुई। इस अध्ययन में भोपाल के सरकारी स्कूल भी शामिल थे।
जंक फूड और धूप से दूरी बनी वजह
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. धीरज शुक्ला के अनुसार जंक फूड, स्क्रीन टाइम, शारीरिक गतिविधियों की कमी और धूप से दूरी बच्चों के शारीरिक विकास को प्रभावित कर रही है। उनका कहना है कि इससे बच्चों की सेहत से जुड़ी गंभीर चुनौतियां बढ़ने का खतरा बढ़ रहा है। राष्ट्रीय और भोपाल आधारित अध्ययन भी इस खतरे की पुष्टि करते हैं।
कैलोरी भरपूर, पोषण अधूरा
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीयूष पंचरत्न बताते हैं कि बच्चे पेट भरने लायक खाना तो खा रहे हैं। इससे उनकी कैलोरी की जरूरत पूरी हो रही है। लेकिन शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पा रहा है।
पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स, मीठे पेय और फास्ट फूड के बढ़ते सेवन से यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। बच्चों को जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व यानी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स (Micronutrients) नहीं मिल पा रहे हैं।
इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
डॉक्टरों ने कुछ लक्षणों को लेकर चेताया है, जिन्हें अनदेखा नहीं करना चाहिए।
- बार-बार थकान महसूस होना
- हीमोग्लोबिन का कम होना
- पढ़ाई में ध्यान न लगना
- हड्डियों और पैरों में दर्द
- बार-बार संक्रमण होना
- चिड़चिड़ापन बढ़ना
डॉक्टरों के मुताबिक अगर यह लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो इससे एनीमिया, कमजोर हड्डियां, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी और मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है।
एक्सपर्ट कोट्स
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. धीरज शुक्ला के अनुसार जंक फूड, स्क्रीन टाइम, शारीरिक गतिविधियों की कमी और धूप से दूरी बच्चों के शारीरिक विकास को प्रभावित कर रही है, जिससे स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चुनौतियां बढ़ने का खतरा है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीयूष पंचरत्न के अनुसार बच्चे पेट और कैलोरी भरने लायक खाना खा रहे हैं, लेकिन शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पा रहा है।
FAQ
- हिडन हंगर क्या है?
हिडन हंगर यानी छिपा हुआ कुपोषण उस स्थिति को कहते हैं जब बच्चे देखने में स्वस्थ लगते हैं। लेकिन उनके शरीर में आयरन, विटामिन-डी या बी12 जैसे जरूरी तत्वों की कमी होती है। यह कमी जांच में ही सामने आती है। - बच्चों में विटामिन-डी की कमी की वजह क्या है?
जंक फूड, स्क्रीन टाइम और धूप से दूरी इसकी बड़ी वजहें मानी जा रही हैं। शारीरिक गतिविधियों की कमी भी इसे बढ़ाती है। भोपाल आधारित अध्ययन में इसकी पुष्टि हुई है। - हिडन हंगर के लक्षण क्या हैं?
बार-बार थकान, हीमोग्लोबिन कम होना और पढ़ाई में ध्यान न लगना इसके मुख्य संकेत हैं। हड्डियों में दर्द और बार-बार संक्रमण होना भी इसके लक्षण हो सकते हैं। इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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