भोपाल डॉक्टर प्रदर्शन मामला: डिप्टी सीएम के संज्ञान के बाद कमिश्नर ने दिए जांच के आदेश

Sanjay Dhiman | Sept 08, 2026, 20:48 IST
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भोपाल में प्रदर्शनकारी डॉक्टरों पर वाटर कैनन छोड़ने के मामले में डिप्टी सीएम के संज्ञान लेते ही पुलिस कमिश्नर ने जांच के सख्त आदेश जारी कर दिए हैं।

भोपाल में डॉक्टरों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा वाटर कैनन इस्तेमाल करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश जारी किए गए हैं। भोपाल पुलिस कमिश्नर ने मामले की जांच की जिम्मेदारी पुलिस उपायुक्त जोन-2 विकास सहवाल को सौंपी है।



पुलिस कमिश्नर कार्यालय से जारी आदेश में बताया गया कि मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इस मामले को संज्ञान में लिया था। इसके बाद पूरे घटनाक्रम की जांच कराने का फैसला लिया गया।



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हमीदिया अस्पताल के गेट पर हुआ था प्रदर्शन

दरअसल, 7 सितंबर 2026 को भोपाल के हमीदिया अस्पताल गेट के पास डॉक्टरों का प्रदर्शन चल रहा था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था।



पुलिस की इस कार्रवाई में कुछ डॉक्टरों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद मामले को लेकर सवाल उठने लगे थे। डॉक्टर संगठनों ने भी कार्रवाई को लेकर अपनी आपत्ति जताई थी।



पुलिस कमिश्नर ने दिए निष्पक्ष जांच के आदेश

भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच जरूरी है। इसलिए DCP जोन-2 विकास सहवाल को जांच अधिकारी बनाया गया है।



जांच अधिकारी सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करेंगे। इसके बाद पूरी रिपोर्ट पुलिस कमिश्नर के सामने प्रस्तुत करेंगे। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।



जांच में क्या-क्या देखा जाएगा

इस मामले की जांच में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया जा सकता है। इसमें प्रदर्शन की स्थिति, पुलिस की कार्रवाई, वाटर कैनन इस्तेमाल की जरूरत और नियमों के पालन जैसे पहलुओं की जांच होगी।



इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि पुलिस कार्रवाई तय प्रक्रिया के अनुसार हुई थी या नहीं। प्रदर्शन के दौरान मौजूद डॉक्टरों, पुलिस अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों के बयान भी लिए जा सकते हैं।



डॉक्टरों के प्रदर्शन का मुद्दा क्या था

डॉक्टरों का प्रदर्शन अपनी मांगों को लेकर किया जा रहा था। प्रदर्शन के दौरान डॉक्टर और पुलिस आमने-सामने आ गए थे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का प्रयोग किया।



अब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि पुलिस कार्रवाई उचित थी या नहीं। फिलहाल पुलिस विभाग ने मामले में जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।



भोपाल पुलिस ने अपनाया जांच का रास्ता

इस मामले में पुलिस ने सीधे कार्रवाई करने के बजाय जांच का रास्ता चुना है। इससे पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।



भोपाल पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी। सभी पक्षों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा।



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