आंदोलन बिखराः अधूरी मांगों के साथ आधी रात घर की ओर लौटने लगे किसान

Sanjay Sharma | Jul 30, 2026, 24:45 IST
किसान आंदोलन
भोपाल में मूंग की 100 फीसदी सरकारी खरीद और ई-टोकन व्यवस्था खत्म करने की मांग को लेकर चल रहा किसान आंदोलन आखिरकार बिखर गया। सरकार ने ई-टोकन व्यवस्था बदलने और मूंग खरीद कोटा बढ़ाने पर सहमति दी, लेकिन MSP पर पूरी खरीद की मांग अधूरी रह गई।

      समझें क्या है पूरा मामला

      • भोपाल पहुंचे किसानों का आंदोलन तीन दिन बाद खत्म हो गया।
      • किसान मूंग की 100 फीसदी सरकारी खरीद की मांग कर रहे थे।
      • खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था खत्म करने की भी मांग थी।
      • सरकार ने ई-टोकन व्यवस्था बदलने पर सहमति दी।
      • MSP पर पूरी खरीद की मांग आखिर तक अधूरी रह गई।

      आंदोलन कैसे बिखरा

      समर्थन मूल्य पर 100 फीसदी मूंग की खरीद की मांग को लेकर किसान भोपाल पहुंचे थे। साथ ही खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था खत्म करने की भी मांग थी। लेकिन यह आंदोलन सरकार की चतुराई के आगे टिक नहीं पाया। शाम होते-होते आंदोलन बिखरने लगा। किसान संगठनों का प्रतिनिधि मंडल सरकार से हुई बातचीत में अपनी बात पूरी तरह मनवा नहीं सका। आखिर में किसानों को अधूरी मांगों के साथ ही वापस लौटना पड़ा।



      मंत्रियों से बातचीत बेनतीजा

      सरकार की ओर से कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग और मंत्री कृष्णा गौर ने किसानों से बातचीत की। यह बातचीत दो चरणों में हुई। सरकार ने ई-टोकन व्यवस्था में खामी होने की बात तुरंत मान ली। इसे बदलने का भरोसा भी दिया गया। लेकिन मूंग की 100 फीसदी खरीद पर सरकार पूरी तरह राजी नहीं हुई। सरकार सिर्फ प्रति एकड़ 3 क्विंटल तक खरीद बढ़ाने पर अड़ी रही। किसान संगठन के प्रतिनिधि इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं थे। फिर भी वे इसे मांग पर विचार का आश्वासन मानकर रोशनपुरा लौट आए।



      बाणगंगा पर किसानों की कोशिश

      प्रतिनिधि मंडल की घोषणा के बाद कुछ किसान नाराज हो गए। ये किसान बाणगंगा चौराहे की ओर बढ़ गए। वे बैरिकेड तोड़कर सीएम हाउस जाना चाहते थे। लेकिन तब तक ज्यादातर किसान वापस लौट चुके थे। बचे किसानों की संख्या भी काफी कम थी। इसी वजह से पुलिस बल के आगे उनकी कोशिश कामयाब नहीं हो पाई। कुछ उत्साही युवा किसानों ने आगे बढ़ने की कोशिश जरूर की। लेकिन पुलिस ने उन्हें वहीं से वापस लौटा दिया।



      पुलिस की चतुराई काम आई

      बाणगंगा चौराहे पर किसानों का एक समूह अब भी डटा हुआ था। पुलिस ने काफी देर तक बातचीत कर स्थिति टालने की कोशिश की। इस दौरान समय बीतता गया और किसानों की संख्या भी घटती रही। जब वहां 100 से भी कम किसान बचे तो पुलिस ने नई रणनीति अपनाई। अधिकारियों ने लाउडस्पीकर पर एक अहम घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि शराब पीने वालों की जांच कराई जाएगी। पुलिस ने दावा किया कि कुछ बाहरी लोग शराब पीकर माहौल बिगाड़ना चाहते हैं। इस घोषणा के बाद कुछ ही देर में भीड़ बैरिकेड से छंट गई। इसी बीच कुछ युवा किसानों और पुलिस के बीच झड़प जैसी स्थिति भी बनी।



      रात में हुआ आंदोलन का अंत

      आखिरकार किसानों को अपनी अधूरी मांगों के साथ ही लौटना पड़ा। रात करीब 11 बजकर 20 मिनट पर पुलिस ने रोशनपुरा चौराहा भी खाली करा लिया। यहां मौजूद किसानों को बसों से रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड भेजा गया। इसी के साथ नर्मदापुरम से शुरू हुआ आंदोलन खत्म हो गया। इस आंदोलन का नेतृत्व 19 किसान संगठन कर रहे थे। तीन दिन तक चला यह संघर्ष आखिरकार बिना पूरी मांग पूरी हुए थम गया।



      क्या मिला, क्या रहा अधूरा

      तीन दिन के संघर्ष के बाद सरकार ने एक बड़ी मांग तुरंत मान ली। सरकार ने खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था तुरंत बंद करने की मांग स्वीकार कर ली। लेकिन मूंग की 100 फीसदी खरीद वाली सबसे बड़ी मांग अधूरी रह गई। हालांकि सरकार ने खरीद की सीमा बढ़ाने का ऐलान जरूर किया। पहले यह सीमा प्रति एकड़ एक क्विंटल 20 किलो थी। अब इसे बढ़ाकर प्रति एकड़ 3 क्विंटल कर दिया गया है। इससे किसानों को कुछ आंशिक राहत जरूर मिली है। लेकिन पूरी फसल की सरकारी खरीद का सपना अभी अधूरा ही रहा।



        जरूरी FAQ

        भोपाल में किसान आंदोलन किस मांग को लेकर हुआ था?


        किसान मूंग की 100 फीसदी सरकारी खरीद समर्थन मूल्य पर चाहते थे। साथ ही वे खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था को पूरी तरह खत्म करने की मांग कर रहे थे। यह आंदोलन नर्मदापुरम से शुरू होकर भोपाल तक पहुंचा था।



        सरकार और किसानों के बीच बातचीत में क्या तय हुआ?


        सरकार ने खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था तुरंत बंद करने पर सहमति दी। साथ ही मूंग खरीद की सीमा प्रति एकड़ एक क्विंटल 20 किलो से बढ़ाकर 3 क्विंटल कर दी गई। लेकिन 100 फीसदी खरीद की मांग पूरी नहीं हुई।



        आंदोलन आखिर में कैसे खत्म हुआ?


        बातचीत के बाद ज्यादातर किसान रोशनपुरा लौट गए, जबकि कुछ नाराज किसान बाणगंगा चौराहे की ओर बढ़ गए। पुलिस ने सूझबूझ से भीड़ कम कराई और रात करीब सवा ग्यारह बजे रोशनपुरा चौराहा भी खाली करा लिया, जिसके साथ आंदोलन समाप्त हो गया।



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