गैस की किल्लत या मुनाफाखोरी का खेल? घरेलू सिलेंडर के लिए मारामारी, बाजार में महंगे-छोटे सिलेंडर भरपूर

Aman Vaishnav | Oct 30, 2026, 07:49 IST
भोपाल में नए गैस कनेक्शन पर 9 महीने से रोक, 18 हजार लोग कतार में और महंगे छोटे सिलेंडर खरीदने की मजबूरी।
Over 18000 People in Bhopal Await New LPG Connections for 9 Months as Expensive Small Cylinders Flood the Market
एक तरफ दीपावली का त्योहार सिर पर है और घरों में पकवान बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में लोगों के सामने रसोई गैस का संकट खड़ा हो गया है। आम लोगों के लिए नया एलपीजी कनेक्शन लेना अब भी मुश्किल बना हुआ है।

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद फरवरी में नए कनेक्शन देने पर रोक लगा दी गई थी। इस फैसले को 9 महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक रोक नहीं हटाई गई है। प्रशासन और गैस एजेंसियों का कहना है कि गैस की भारी किल्लत है। इतना ही नहीं जिन लोगों के पास पहले से कनेक्शन मौजूद है, उनके लिए भी सख्त नियम लागू कर दिए गए हैं। वे 25 दिन पूरे होने से पहले दूसरा सिलेंडर बुक नहीं कर सकते हैं।



भोपाल में 18 हजार से ज्यादा परिवार कतार में

त्योहारों के इस मौसम में गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे लोगों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जानकारी के अनुसार गैस एजेंसियों का ऑनलाइन पोर्टल भी बंद पड़ा हुआ है। इस वजह से अकेले भोपाल शहर में 18 हजार से ज्यादा लोग नए गैस कनेक्शन (new gas connection) मिलने का इंतजार कर रहे हैं।



गैस एजेंसी चलाने वालों का कहना है कि हर एजेंसी में रोज 5 से 6 नए लोग कनेक्शन के बारे में पूछने पहुंच रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी उन परिवारों को उठानी पड़ रही है, जिनका हाल ही में भोपाल में ट्रांसफर हुआ है। इनमें से कई लोगों के पास पुराने शहर में पीएनजी की सुविधा थी, लेकिन भोपाल में वे जहां रह रहे हैं, वहां पाइपलाइन वाली गैस नहीं है।



पीएनजी का काम अधूरा, फिर भी एलपीजी पर पाबंदी

शहर में गैस सप्लाई को लेकर प्रशासन की तैयारी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। साल 2020 से थिंक गैस कंपनी भोपाल में पाइपलाइन से गैस सप्लाई यानी पीएनजी (Piped Natural Gas) का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है। हकीकत यह है कि इतने साल बीत जाने के बाद भी आधे शहर में पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा नहीं हो सका है।



ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि जब घर-घर पाइपलाइन से गैस पहुंचाने का काम पूरा ही नहीं हुआ है, तो फिर एलपीजी सिलेंडरों का विकल्प क्यों छीना जा रहा है?



महंगे 5 और 10 किलो के सिलेंडर हर जगह मौजूद

एक तरफ आम घरेलू सिलेंडर देने से मना किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ तेल कंपनियों ने आपदा में मुनाफा कमाने का रास्ता निकाल लिया है। ऑयल कंपनियों ने खुले बाजार में 5 किलो और 10 किलो वाले फ्री ट्रेड सिलेंडर बेचने शुरू कर दिए हैं।



हैरानी की बात यह है कि जहां 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कमी बताई जा रही है, वहीं ये छोटे सिलेंडर जितनी मर्जी चाहें उतनी तादाद में उपलब्ध हैं।



  • 5 किलो का सिलेंडर: इसे लेने के लिए 1902 रुपए चुकाने पड़ते हैं। जबकि इसे दोबारा भरवाने (रिफिल) का खर्च 781 रुपए आता है।
  • 10 किलो का सिलेंडर: इसकी शुरुआती कीमत 4 हजार 71 रुपए रखी गई है। इसे दोबारा भरवाने का खर्च 1585 रुपए है।

वाकई गैस की इतनी भारी किल्लत है, तो फिर दोगुने दाम वाले ये छोटे सिलेंडर बाजार में इतनी आसानी से कैसे मिल रहे हैं?



ब्लैक मार्केट में 2500 रुपए तक बिक रहा सिलेंडर

नया कनेक्शन न मिलने और छोटे सिलेंडरों के बेहद महंगे होने के कारण शहर में कालाबाजारी का खेल भी तेजी से शुरू हो गया है। जिनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है, वे मजबूरी में दो हजार से लेकर 2,500 रुपए तक देकर ब्लैक में गैस सिलेंडर खरीद रहे हैं।



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