LPG Cylinder Crisis: सिलेंडर छोड़ इंडक्शन पर शिफ्ट हो रहे एमपी के रेस्टोरेंट
News In Short
- कमर्शियल सिलेंडर की कमी के कारण भोपाल के प्रमुख रेस्टोरेंट अब इंडक्शन कुकिंग पर शिफ्ट हो रहे हैं।
- एमपी की एक बड़ी फूड चेन ने अपने सभी 27 आउटलेट्स में इंडक्शन सिस्टम लागू कर दिया है।
- सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू कर घरेलू गैस सप्लाई को प्राथमिकता दी है।
- पश्चिम एशिया के तनाव ने गैस सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है।
- घरेलू गैस के लिए भी एजेंसियों पर ग्राहकों की लंबी कतारें लग रही हैं।
News In Detail
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इन दिनों कमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत (LPG Cylinder Crisis) देखी जा रही है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर अब शहर के जायके पर पड़ रहा है।
भोपाल के होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के सामने चूल्हा जलाने का संकट खड़ा हो गया है, जिससे निपटने के लिए अब नई तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।
रेस्टोरेंट में अब इंडक्शन पर पकेगा खाना
भोपाल की एक मशहूर फास्ट-फूड चेन ने सिलेंडर की कमी से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। इस चेन ने अपने किचन को गैस आधारित सिस्टम से हटाकर इंडक्शन कुकिंग पर शिफ्ट करना शुरू कर दिया है।
संचालक डोलराज गैरे के मुताबिक, फिलहाल करीब 60% खाना इंडक्शन पर बनाया जा रहा है, जिसे अगले कुछ दिनों में बढ़ाकर 80% करने का लक्ष्य है। हालांकि, इंडक्शन पर खाना पकने में गैस की तुलना में समय थोड़ा ज्यादा लग रहा है और बर्तनों में भी बदलाव करना पड़ा है।
MP के सभी 27 आउटलेट्स में नई व्यवस्था लागू
सिलेंडर संकट का असर केवल भोपाल तक सीमित नहीं है। इसलिए इस फूड चेन ने अपने प्रदेश भर के सभी 27 आउटलेट्स में इंडक्शन कुकिंग की व्यवस्था लागू कर दी है। प्रबंधन का कहना है कि वे नहीं चाहते कि गैस की कमी की वजह से कोई भी ग्राहक उनके रेस्टोरेंट से भूखा वापस जाए। सभी शेफ और टीम को इस नई तकनीक के साथ तालमेल बिठाने के निर्देश दिए गए हैं।
पश्चिम एशिया संकट और सरकार का सख्त कदम
दरअसल, यह संकट वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सप्लाई बाधित (Obstructed) होने के कारण पैदा हुआ है। हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू कर दिया है। सरकार की प्राथमिकता अब घरेलू उपभोक्ताओं को सुरक्षित रखना है।
घरेलू एलपीजी उत्पादन में 25% की बढ़ोत्तरी की गई है, जबकि कमर्शियल गैस के वितरण पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए गए हैं। फिलहाल केवल अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों जैसी आवश्यक सेवाओं को ही प्राथमिकता दी जा रही है।
आवश्यक वस्तु अधिनियम क्या है
आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) 1955 को आप आसान शब्दों में 'किल्लत रोकने वाला कानून' कह सकते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह पक्का करना है कि खाना-पीना, दवाइयां और पेट्रोल-डीजल जैसी जरूरी चीजों की कोई जमाखोरी या कालाबाजारी न कर सके।
यह कानून सरकार को यह पावर देता है कि वह इन चीजों की सप्लाई और कीमतों पर नजर रखे, ताकि कोई दुकानदार या व्यापारी इन्हें छिपाकर न रखे और आम जनता को ये चीजें सही दाम पर आसानी से मिलती रहें।
गैस एजेंसियों पर उमड़ी भीड़, आम जनता भी परेशान
भोपाल के हालात केवल रेस्टोरेंट तक ही सीमित नहीं हैं। यहां आम नागरिक भी घरेलू सिलेंडर के लिए परेशान नजर आ रहे हैं। शहर की गैस एजेंसियों पर सुबह से ही लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लोग इस डर से पहले ही बुकिंग करा रहे हैं कि कहीं आने वाले समय में घरेलू गैस की किल्लत और न बढ़ जाए, जिससे एजेंसियों पर दबाव काफी ज्यादा बढ़ गया है।
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