भोपाल मास्टर प्लान पर विवाद! 9 हजार से ज्यादा आपत्तियां दर्ज, दीपावली से पहले सुनवाई के आसार
किसानों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। इस बार पिछली योजना के मुकाबले तीन गुना से ज्यादा आपत्तियां आई हैं। इन पर दीपावली से पहले सुनवाई शुरू होने की उम्मीद है।
मास्टर प्लान पर 9 हजार आपत्तियां
भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट को लेकर किसानों के साथ कई रहवासी भी अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं।
नगर तथा ग्राम निवेश विभाग को नौ हजार से ज्यादा आपत्तियां मिल चुकी हैं। इनमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह के आवेदन शामिल हैं।
आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 24 अक्टूबर तय की गई है। शनिवार रात 12 बजे तक आवेदन स्वीकार किए जाने की जानकारी दी गई है।
पिछली बार के मुकाबले इस बार आपत्तियों की संख्या काफी ज्यादा है। इससे मास्टर प्लान के कई प्रस्तावों पर लोगों की नाराजगी सामने आई है।
किसानों की तीन प्रमुख मांगें
भोपाल मास्टर प्लान के विरोध में किसानों ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।
- पहली मांग कृषि भूमि के उपयोग से जुड़ी है। किसान चाहते हैं कि उनकी जमीन का लैंडयूज कृषि ही रहे।
- दूसरी मांग BIZ-1 और BIZ-2 जोन को हटाने की है। किसानों ने इन दोनों जोन के प्रस्तावों पर आपत्ति जताई है।
- तीसरी मांग 66 गांवों में ग्रामसभाएं कराने की है। किसान चाहते हैं कि ग्रामसभाओं में उनकी सहमति ली जाए।
किसानों का कहना है कि उनकी जमीन से जुड़े फैसलों में उनकी राय जरूरी है।
पिछली बार से तीन गुना ज्यादा विरोध
भोपाल मास्टर प्लान के पुराने ड्राफ्ट पर भी लोगों ने आपत्तियां दर्ज कराई थीं। लेकिन इस बार इनकी संख्या तीन गुना से ज्यादा हो गई है। टीएंडसीपी अधिकारियों के मुताबिक मास्टर प्लान 2031 पर कुल 3005 आपत्तियां मिली थीं।
इनमें आपत्तियों के साथ सुझाव भी शामिल थे। उस समय करीब दो हजार आपत्तियां बड़े तालाब से जुड़ी थीं। इनमें कैचमेंट क्षेत्र और ग्रीन एरिया के मुद्दे शामिल थे।
इस बार नौ हजार से ज्यादा आपत्तियां मिल चुकी हैं। इनमें सबसे ज्यादा विरोध जमीन के उपयोग को लेकर है। Bhopal Master Plan 2047 के ड्राफ्ट में कई इलाकों के प्रस्तावों पर सवाल उठे हैं।
कैचमेंट क्षेत्र पर 5500 आपत्तियां
मास्टर प्लान को लेकर सबसे ज्यादा विरोध कैचमेंट क्षेत्र में दिखाई दिया है। कुल आपत्तियों में करीब पांच हजार 500 आपत्तियां इसी मुद्दे से जुड़ी हैं। यह संख्या कुल आपत्तियों का लगभग 60 प्रतिशत है। किसानों ने बड़े तालाब के कैचमेंट और डूब क्षेत्र पर सवाल उठाए हैं।
किसानों का आरोप है कि जमीन के उपयोग में अलग-अलग नियम अपनाए गए हैं। कुछ अधिकारियों की जमीनों को आवासीय श्रेणी में रखा गया है। कुछ जमीनों को कृषि उपयोग के लिए भी रखा गया है। वहीं आसपास के किसानों की जमीन कैचमेंट क्षेत्र में शामिल कर दी गई है।
किसानों का कहना है कि इससे उनकी जमीनों की कीमत प्रभावित हुई है। उन्होंने जमीनों की कीमत गिरने का दावा किया है। दूसरी तरफ अधिकारियों की जमीनों की कीमत लगभग दोगुनी होने का आरोप लगाया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
खेती और निर्माण पर रोक की आशंका
किसानों को कैचमेंट क्षेत्र में जमीन शामिल होने से परेशानी की आशंका है। उनका कहना है कि भविष्य में खेती और निर्माण प्रभावित हो सकते हैं।
किसानों ने अपनी कृषि भूमि पर पहले जैसी सुविधाएं बनाए रखने की मांग की है। हालांकि कैचमेंट और बफर जोन में खेती पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं होती। इन क्षेत्रों में खेती की जा सकती है।
तालाब की सुरक्षा के लिए कुछ विशेष नियम लागू किए जाते हैं। इन नियमों का उद्देश्य जल क्षेत्र और आसपास के पर्यावरण को सुरक्षित रखना है। फिर भी किसानों को अपनी जमीन के उपयोग को लेकर चिंता है।
78 गांवों के किसानों ने उठाए सवाल
भारतीय किसान संघ ने भी मास्टर प्लान के प्रस्तावों का विरोध किया है। संगठन ने 78 से ज्यादा गांवों का मुद्दा उठाया है। इनमें भंवरी और बरखेड़ा सालम शामिल हैं। मुगालिया छाप और खेड़ा गांव भी इस सूची में हैं।
बगड़ौनी और फंदा के किसानों ने भी आपत्ति जताई है। नीलबड़ और रातीबड़ के गांवों का मामला भी सामने आया है। किसानों के मुताबिक इन गांवों को कैचमेंट और बफर जोन में शामिल किया गया है।
इनमें BIZ-01 और BIZ-02 क्षेत्र भी शामिल बताए गए हैं। किसानों ने इन जोन के प्रस्तावों पर विरोध दर्ज कराया है।
निजी संस्थानों को छूट देने का आरोप
भारतीय किसान संघ के तहसील अध्यक्ष अखिलेश मीणा ने कई आरोप लगाए हैं। किसान नेता मनोहर सिंह ठाकुर ने भी सवाल उठाए हैं।
दोनों नेताओं का कहना है कि किसानों पर जमीन के नियम सख्ती से लागू होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी संस्थानों को निर्माण में छूट मिल रही है। इनमें तालाब किनारे स्थित स्कूल और होटल शामिल हैं।
कॉलोनियों और दूसरे निजी संस्थानों के निर्माण पर भी सवाल उठाए गए हैं। किसान नेताओं का आरोप है कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। उन्होंने कैचमेंट क्षेत्र में दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है।
ये आरोप किसान नेताओं की ओर से लगाए गए हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
किसान संघ ने दीं 5 हजार आपत्तियां
भारतीय किसान संघ ने मास्टर प्लान के खिलाफ बड़ी संख्या में आपत्तियां दी हैं। संगठन ने करीब पांच हजार आपत्तियां सौंपने की जानकारी दी है।
इनमें कैचमेंट और बफर जोन से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं। किसान संघ ने आपत्तियां दर्ज कराने की समय सीमा बढ़ाने की मांग की है।
इसके अलावा सुनवाई करने वाली समिति में किसानों को प्रतिनिधित्व देने की मांग भी की गई है। संगठन का कहना है कि किसानों से जुड़े फैसलों में उनकी बात सुनी जाए।
नीलबड़ में जमीन के उपयोग पर विवाद
भोपाल के नीलबड़ क्षेत्र में भी मास्टर प्लान का विरोध हो रहा है। यहां जमीन के आवासीय वर्गीकरण को लेकर आपत्तियां आई हैं। कुछ किसानों की मांग है कि उनकी जमीन कैचमेंट क्षेत्र से बाहर की जाए।
दूसरी तरफ एलडीआर क्षेत्र के रहवासी भी आपत्ति जता रहे हैं। एलडीआर यानी कम घनत्व वाला आवासीय क्षेत्र होता है। यहां निर्माण का घनत्व सामान्य आवासीय क्षेत्रों से कम रखा जाता है।
इस क्षेत्र के लोगों की मांग है कि जमीन मुख्य आवासीय श्रेणी में रखी जाए। इस तरह नीलबड़ क्षेत्र में जमीन के उपयोग को लेकर अलग-अलग मांगें सामने आई हैं।
इन इलाकों से भी आईं आपत्तियां
मास्टर प्लान पर भोपाल के कई इलाकों से शिकायतें मिली हैं। ईंटखेड़ी क्षेत्र से जुड़े मामलों पर भी आपत्तियां आई हैं। अरेरा कॉलोनी और शाहपुरा के लोगों ने भी सवाल उठाए हैं। बावड़िया कला और कोलार क्षेत्र से भी आपत्तियां मिली हैं।
उपलब्ध आंकड़ों में इन क्षेत्रों से जुड़ी करीब 2600 आपत्तियों का उल्लेख है। भोपाल डेवलपमेंट जोन यानी BIZ के फुल ब्लॉक से जुड़ी करीब 2700 आपत्तियां बताई गई हैं।
मिसरोद क्षेत्र में प्रस्तावित सड़क को लेकर भी विरोध हुआ है। सड़क की दिशा बदलने के लिए करीब 225 आपत्तियां दर्ज हुई हैं। एक अन्य आवासीय वर्गीकरण से जुड़े मामले में करीब 2500 आपत्तियों का उल्लेख है।
इन आंकड़ों में अलग-अलग क्षेत्र और मुद्दे शामिल हैं।
अंतिम दिन भी खुला रहेगा कार्यालय
मास्टर प्लान पर आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 24 अक्टूबर तय है। शनिवार को सरकारी अवकाश होने के बावजूद टीएंडसीपी कार्यालय खोलने की व्यवस्था बताई गई है।
लोग कार्यालय पहुंचकर ऑफलाइन आवेदन दे सकेंगे। इसके अलावा ऑनलाइन आपत्तियां दर्ज कराने की सुविधा भी रहेगी। विभाग के मुताबिक अंतिम समय तक आने वाली आपत्तियां भी प्रक्रिया में शामिल होंगी।
इन आपत्तियों के आधार पर ड्राफ्ट में बदलाव से जुड़े प्रस्ताव तैयार किए जा सकते हैं।
सभी आपत्तियों की होगी जांच
नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के सामने बड़ी संख्या में आवेदन आए हैं। अधिकारियों के मुताबिक सभी आपत्तियों की पहले जांच और छंटनी होगी।
ऑनलाइन मिलने वाले आवेदनों की प्रतियां भी तैयार की जाएंगी। इसके बाद समान मुद्दों वाली आपत्तियों को एक साथ रखा जाएगा।
इससे एक जैसी शिकायतों पर सुनवाई करना आसान होगा। Bhopal Master Plan Objections की संख्या ज्यादा होने से सुनवाई की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है।
अधिकारियों के मुताबिक एक जैसे मुद्दों पर आपत्तियों की सुनवाई एक साथ की जा सकती है।
दीपावली से पहले सुनवाई की उम्मीद
टीएंडसीपी अधिकारियों के अनुसार सुनवाई की तैयारी शुरू की जाएगी। दीपावली से पहले सुनवाई शुरू होने की उम्मीद जताई गई है।
हालांकि सभी नौ हजार आपत्तियों की सुनवाई एक साथ नहीं होगी। अलग-अलग मामलों के लिए समय तय किया जाएगा। एक जैसे मुद्दों वाली आपत्तियां समूह में रखी जा सकती हैं।
इससे किसानों और रहवासियों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।
83 सदस्यों की कमेटी करेगी सुनवाई
मास्टर प्लान पर मिली आपत्तियों की सुनवाई के लिए समिति बनाई जाती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस समिति में कुल 83 सदस्य होते हैं।
इसमें सांसद और विधायक शामिल होते हैं। महापौर और चयनित जनपद सदस्य भी समिति में शामिल रहते हैं। कलेक्टर और अन्य संबंधित अधिकारी भी इसका हिस्सा होते हैं।
समिति में संयुक्त संचालक स्तर का अधिकारी भी शामिल रहता है। इस समिति का कोई एक स्थायी प्रमुख निर्धारित नहीं बताया गया है। सुनवाई के लिए विशेष कोरम भी तय नहीं बताया गया है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार एक सदस्य भी सुनवाई कर सकता है।
व्हाट्सएप पर मिलेगी सुनवाई की सूचना
आपत्ति दर्ज कराने वालों को सुनवाई की जानकारी भेजी जाएगी। इसके लिए आवेदन में दर्ज मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया जाएगा।
सुनवाई की सूचना व्हाट्सएप संदेश के माध्यम से भेजने की जानकारी दी गई है। सभी मामलों की सुनवाई अलग-अलग समय पर हो सकती है। इसके लिए आवेदकों को अलग स्लॉट दिए जाएंगे।
इस व्यवस्था से लोगों को अपनी सुनवाई की तारीख पता चल सकेगी।
आपत्तियों की छंटनी में लगेंगे 15 दिन
Bhopal Master Plan Objections की संख्या पांच हजार से ज्यादा पहुंच चुकी है। इससे विभाग के सामने बड़ा काम खड़ा हो गया है।
सबसे पहले विभाग को सभी आपत्तियों की छंटनी करनी होगी। इस प्रक्रिया में करीब 15 दिन लगने का अनुमान है। इसके बाद सुनवाई का शेड्यूल जारी किया जाएगा। सुनवाई में किसान और व्यापारी अपनी बात रख सकेंगे। रहवासियों की आपत्तियों पर भी सुनवाई होगी।
फिलहाल मास्टर प्लान का ड्राफ्ट ही जारी हुआ है। लोगों की आपत्तियां और सुझाव इसी ड्राफ्ट पर लिए जा रहे हैं। अब सबकी नजर आपत्तियों की सुनवाई पर है। सुनवाई के बाद ही आगे की प्रक्रिया स्पष्ट हो सकेगी।
सुनवाई के बाद तुरंत फैसला नहीं होगा
आपत्तियों पर सुनवाई होने के बाद तुरंत अंतिम फैसला नहीं आएगा। समिति पहले सभी संबंधित मुद्दों पर विचार करेगी। इसके बाद अपने सुझाव और प्रस्ताव तैयार करेगी।
इस प्रक्रिया में यह देखा जाएगा कि किन आपत्तियों पर बदलाव संभव है। हालांकि सुनवाई पूरी होते ही किसी आपत्ति को स्वीकार या खारिज करने का अंतिम निर्णय नहीं मिलेगा।
समिति अपना प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजेगी।
मास्टर प्लान पर अंतिम निर्णय सरकार लेगी
Bhopal Development Plan से जुड़े बदलावों पर अंतिम फैसला राज्य सरकार करेगी। सुनवाई समिति की भूमिका आपत्तियों पर विचार करने और प्रस्ताव तैयार करने की होगी।
इसके बाद राज्य शासन आगे का निर्णय लेगा। फिलहाल मास्टर प्लान 2047 का ड्राफ्ट ही सामने आया है। इसे अंतिम योजना नहीं माना जा सकता।
किसानों और रहवासियों ने अपनी जमीनों से जुड़े कई सवाल उठाए हैं। अब इन आपत्तियों की सुनवाई और सरकारी फैसले पर सबकी नजर रहेगी।
FAQ
- भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर कितनी आपत्तियां दर्ज हुई हैं?
भोपाल मास्टर प्लान 2047 के प्रस्तावित ड्राफ्ट पर 9 हजार से ज्यादा आपत्तियां दर्ज हुई हैं। यह पिछले ड्राफ्ट की 3005 आपत्तियों से करीब तीन गुना ज्यादा है। - भोपाल मास्टर प्लान पर सबसे ज्यादा विरोध किस बात का है?
सबसे ज्यादा विरोध बड़े तालाब के कैचमेंट और बफर जोन को लेकर है। करीब 5500 आपत्तियां इन क्षेत्रों से जुड़ी हैं। यह कुल आपत्तियों का लगभग 60 प्रतिशत है। - भोपाल मास्टर प्लान से कितने गांवों के किसान प्रभावित होने की आशंका जता रहे हैं?
भारतीय किसान संघ के अनुसार 78 से ज्यादा गांव कैचमेंट और बफर जोन में शामिल हैं। किसानों ने खेती और निर्माण पर पाबंदी लगने की आशंका जताई है। - भोपाल मास्टर प्लान की आपत्तियों पर सुनवाई कब शुरू होगी?
टीएंडसीपी अधिकारियों के अनुसार दीपावली से पहले सुनवाई शुरू होने की उम्मीद है। आपत्तियों की जांच के बाद सुनवाई का कार्यक्रम तय किया जाएगा।