भोपाल मास्टर प्लान-2047 पर 16 नवंबर से सुनवाई, सड़क और कारोबार से जुड़ी 13 हजार आपत्तियों पर होगा फैसला
मास्टर प्लान के ड्राफ्ट पर 25 अक्टूबर तक लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे। इस दौरान 16 हजार से ज्यादा आपत्तियां मिली थीं। इनमें करीब 3 हजार आपत्तियां दो बार दर्ज की गई थीं। कुछ लोगों ने एक ही आपत्ति ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से जमा की थी। ऐसी आपत्तियों को हटाने के बाद अब करीब 13 हजार मामले बचे हैं।
सुनवाई के लिए तैयार हो रहा शेड्यूल
कलेक्टोरेट में हुई बैठक में तय किया गया कि 16 नवंबर से आपत्तियों की सुनवाई शुरू की जाएगी। नगर एवं ग्राम निवेश विभाग अब सुनवाई का Schedule तैयार कर रहा है। इसमें तय होगा कि किस क्षेत्र की आपत्तियां कब और कहां सुनी जाएंगी।
बैठक में सांसद आलोक शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, महापौर मालती राय, एडीएम प्रकाश नायक, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग के संयुक्त संचालक आनंद मोहन लिखार, ग्रामीण क्षेत्रों के सरपंच और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
66 गांवों के किसानों को जमीन की चिंता
मास्टर प्लान में सबसे बड़ी आपत्ति बड़ा तालाब के आसपास के 66 गांवों की कृषि भूमि को लेकर है। किसानों का आरोप है कि ड्राफ्ट में उनकी जमीन को रिवरफ्रंट, फॉरेस्ट, ग्रीन बेल्ट और दूसरी आरक्षित श्रेणियों में शामिल करने का प्रस्ताव है।
किसानों का कहना है कि इससे उनकी खेती और कमाई पर असर पड़ सकता है। वे चाहते हैं कि उनकी जमीन का Land Use कृषि ही रखा जाए।
भारतीय किसान संघ के तहसील अध्यक्ष अखिलेश मीणा ने भी किसानों की जमीन और अधिकारों से जुड़े प्रस्तावों पर आपत्ति जताने की बात कही है।
किसानों की तीन प्रमुख मांगें हैं। पहली, कृषि भूमि का उपयोग नहीं बदला जाए। दूसरी, BIZ-1 और BIZ-2 जोन हटाए जाएं। तीसरी, सभी 66 गांवों में ग्रामसभाएं कराकर किसानों की सहमति ली जाए।
किसानों का दावा है कि वर्ष 1995 के मास्टर प्लान और निरस्त किए गए 2031 के ड्राफ्ट में उनकी जमीन कृषि उपयोग के लिए थी। अब नए ड्राफ्ट में बदलाव का प्रस्ताव है। इसी कारण वे दोबारा विचार करने की मांग कर रहे हैं।
मिसरोद में 45 मीटर चौड़ी सड़क का विरोध
मिसरोद के रहवासियों ने पुरानी और घनी आबादी के बीच से प्रस्तावित 45 मीटर चौड़ी सड़क को हटाने की मांग की है। लोगों ने खसरा नंबर 205 से गुजरने वाले प्रस्तावित रास्ते पर आपत्ति दर्ज कराई है।
रहवासियों का कहना है कि सड़क बनने से पुराने मकान, सैकड़ों परिवार और प्राचीन मंदिर प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने शासकीय अस्पताल, सेवा सहकारी समिति, पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस, राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े कार्यालय और पाटीदार समाज के सामाजिक एवं मांगलिक परिसर को सुरक्षित रखने की मांग की है।
अवैध निर्माणों को नियमित करने पर भी सवाल
भोपाल के कई इलाकों के रहवासियों ने अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों को नियमित करने की संभावनाओं का विरोध किया है। इस मुद्दे पर करीब 2 हजार आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। लोगों की मांग है कि आवासीय इलाकों का मूल स्वरूप बना रहे। साथ ही तालाब, जंगल, पर्यावरण और वन्य जीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखा जाए।
अरेरा कॉलोनी, गौतम नगर, रोहित नगर, रचना नगर, बावड़ियाकलां, साकेत नगर, भेल, कोटरा, लालघाटी, शक्ति नगर, शाहपुरा विकास कुंज, कोलार रोड, नेहरू नगर, प्रिय दर्शन गुलमोहर, डीके कॉटेज, ग्रीन सिटी सोसाइटी और राम शरण सोसाइटी सहित कई इलाकों के लोगों ने आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
व्यापारियों ने कन्वर्जन फीस में राहत मांगी
व्यापारियों ने मास्टर प्लान में व्यावसायिक जमीन के उपयोग, FAR, कन्वर्जन फीस और सीलिंग की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनकी मांग है कि कन्वर्जन फीस एक बार में कुल 5 प्रतिशत तय की जाए। फीस जमा करने के बाद पूरा कमर्शियल FAR दिया जाए। इसके साथ ही पुराने बाजारों के व्यापारियों को राहत देने की मांग भी की गई है।
मास्टर प्लान में 61 हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन का प्रस्ताव
भोपाल मास्टर प्लान-2047 में विकास के लिए कुल 61,017 हेक्टेयर जमीन प्रस्तावित है। इसमें सबसे ज्यादा जमीन आवासीय उपयोग के लिए रखी गई है।
जमीन के उपयोग का प्रस्तावित बंटवारा इस प्रकार है:
- 43.85% जमीन आवासीय उपयोग के लिए
- 27.01% हरियाली के लिए
- 9.53% सड़क और परिवहन के लिए
- 8.01% सरकारी और सार्वजनिक संस्थाओं के लिए
- 4.01% मिले-जुले उपयोग के लिए
- 3.50% औद्योगिक क्षेत्र के लिए
- 2.21% दुकान, बाजार और व्यापार के लिए
- 1.26% भंडारण और माल परिवहन के लिए
- 0.42% पानी-बिजली जैसी सुविधाओं के लिए
- 0.20% विशेष उपयोग क्षेत्र के लिए
2047 तक 45 लाख आबादी का अनुमान
भोपाल मास्टर प्लान-2047 शहर के आने वाले वर्षों के विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इसमें 1016.90 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का प्रस्ताव है। ड्राफ्ट में 254 गांव शामिल होने का भी उल्लेख है।
योजना में वर्ष 2047 तक भोपाल की आबादी करीब 45 लाख होने का अनुमान लगाया गया है। इसी हिसाब से आवासीय क्षेत्रों, उद्योगों, सड़कों, परिवहन और दूसरी सुविधाओं की योजना बनाई जा रही है।
इसके साथ ही ग्रीन बेल्ट और जलस्रोतों को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। फिलहाल किसानों, रहवासियों और व्यापारियों की आपत्तियों पर सुनवाई होनी है। 16 नवंबर से शुरू होने वाली इस प्रक्रिया में लोगों को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा।