अफसरों-नेताओं की पसंदीदा वादी में सड़कों की तैयारी! केरवा-कलियासोत के जंगलों पर मंडराया खतरा

Aman Vaishnav | Oct 27, 2026, 13:34 IST
केरवा-कलियासोत के जंगलों में चौड़ी सड़कों के प्रस्ताव से बाघों के कुदरती आशियाने और प्रजनन वाले सुरक्षित इलाकों पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है।
Proposed Wide Roads in Bhopal Kerwa Forest Threaten Natural Tiger Corridor and Urban Wildlife Habitat
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अफसरों और नेताओं की पसंदीदा जगह माने जाने वाले केरवा-कलियासोत के जंगलों में बड़ी सड़कें बनाने की तैयारी है। शहर के मास्टर प्लान में ऐसी जगहों पर भी सड़कें प्रस्तावित कर दी गई हैं, जहां न आबादी है और न ही लोगों की ज्यादा आवाजाही होती है। हैरानी की बात यह है कि कुछ सड़कें बाघों के रहने और प्रजनन वाले इलाकों से गुजरेंगी।

दूसरी ओर वन्यजीव विशेषज्ञों की तकनीकी रिपोर्ट में इस प्लानिंग पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।



अफसरों-नेताओं की पसंदीदा जगह पर बनेंगी चौड़ी सड़कें

बता दें कि भोपाल के केरवा और कलियासोत का इलाका (केरवा कलियासोत जंगल) घने जंगलों, पहाड़ियों और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है। इसे अफसरों और नेताओं की पसंदीदा जगहों में भी गिना जाता है। अब शहर के मास्टर प्लान में इस इलाके से कई चौड़ी सड़कें निकालने का प्रस्ताव रखा गया है।



इनमें 18 मीटर से लेकर 30 मीटर और 60 मीटर तक चौड़ी सड़कें शामिल हैं। सवाल यह है कि जिन इलाकों में लोगों की आवाजाही ही नहीं है, वहां इतनी चौड़ी सड़कों की जरूरत क्यों पड़ रही है? आरोप है कि सड़कें प्रस्तावित करने से पहले संबंधित इलाकों की जमीनी स्थिति की ठीक से जांच नहीं की गई।



जहां बाघ अपने बच्चों को पालते हैं, वहां बनेगी 60 मीटर चौड़ी सड़क

मास्टर प्लान में चंदनपुरा से मिंडोरी के बीच 60 मीटर चौड़ी सड़क प्रस्तावित की गई है। यह इलाका घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यहां का रास्ता काफी दुर्गम है। इंजीनियरिंग के जानकारों के मुताबिक इस इलाके में इतनी चौड़ी सड़क बनाना तकनीकी रूप से संभव नहीं है।



चिंता की बात यह भी है कि प्रस्तावित सड़क ऐसे जंगल से गुजरेगी, जहां आम लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित है। यह इलाका बाघों के प्रजनन और उनके शावकों के पालन-पोषण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। समसपुरा, केरवा, कलियासोत, चंदनपुरा और मिंडोरी के जंगल बाघों के प्राकृतिक आवास का हिस्सा हैं। ऐसे में यहां बड़ी सड़क बनाने से वन्यजीवों की गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका है।



बाघों के आने-जाने का रास्ता दो हिस्सों में बंटने का खतरा

भोपाल मास्टर प्लान (Bhopal Master Plan) में टीपीसीओ से चंदनपुरा तक 24 मीटर चौड़ी सड़क बनाने का भी प्रस्ताव है। यह सड़क घने वन क्षेत्र के बीच से गुजरेगी। खास बात यह है कि इसे किसी मौजूदा शहरी सड़क से भी नहीं जोड़ा गया है।



वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक इससे बाघों के आने-जाने का प्राकृतिक रास्ता दो हिस्सों में बंट सकता है। ऐसा हुआ तो बाघों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। साथ ही जंगल से निकलकर बाघों के आबादी वाले इलाकों की तरफ आने और मानव-बाघ संघर्ष का खतरा बढ़ने की आशंका भी जताई गई है।



केरवा डैम के पास 45 मीटर चौड़ी सड़क का प्रस्ताव

सड़क निर्माण का एक और प्रस्ताव केरवा डैम (Kerwa Kaliasot Forest) के पास का है। इसमें बेतापुरा नालों से केरवा घाट होते हुए मिंडोरी तक 45 मीटर चौड़ी सड़क बनाने की योजना है। इस रास्ते की एक तरफ संरक्षित जंगल की खड़ी पहाड़ी है। जबकि दूसरी तरफ केरवा डैम का गहरा पानी है।



तकनीकी जानकारों के मुताबिक ऐसी जगह पर सड़क को 45 मीटर चौड़ा करना लगभग नामुमकिन है। यहां सड़क बनाने से जंगल और वन्यजीवों के प्रजनन स्थल प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा सड़क से गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।



वन्यजीव विशेषज्ञों की रिपोर्ट में उठे गंभीर सवाल

वन्यजीव विशेषज्ञों ने भोपाल के जंगलों और बाघों के आने-जाने वाले रास्तों का Technical Audit किया है। इसमें मास्टर प्लान की कई खामियां सामने आने की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक जंगलों में बिना जरूरत चौड़ी सड़कें बनाने से भोपाल के अर्बन टाइगर यानी शहरी इलाकों के आसपास रहने वाले बाघों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंच सकता है।



विशेषज्ञों का कहना है कि सड़कें बनाने से पहले इलाके की भौगोलिक स्थिति, वन्यजीवों की आवाजाही और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर की जांच जरूरी है।



अफसरों की प्लानिंग पर सवाल, आखिर किसके लिए बन रही सड़कें?

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सड़कों की जरूरत को लेकर उठ रहा है। जिन जंगलों में न घनी आबादी है और न नियमित यातायात, वहां 24 से 60 मीटर तक चौड़ी सड़कें क्यों प्रस्तावित की गई हैं?



केरवा-कलियासोत पहले से ही अफसरों और नेताओं की पसंदीदा जगह के रूप में चर्चा में रहता है। ऐसे में इस इलाके में बड़ी सड़कों की योजना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।



हालांकि, इन सड़कों का प्रस्ताव किसी खास नेता या अधिकारी को फायदा पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है, इसका कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।



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