भोपाल मेट्रो GM को झूठा हलफनामा पड़ा भारी, जबलपुर हाईकोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार

Neel Tiwari | Mar 01, 2026, 17:11 IST
Photograph: (the sootr)
भोपाल मेट्रो निर्माण के विवाद में जबलपुर हाईकोर्ट ने GM हरिओम शर्मा को झूठे हलफनामे पर कड़ी फटकार लगाते हुए चेतावनी दी है। अगली सुनवाई 6 मार्च को होगी।

News in short

  • मेट्रो GM हरिओम शर्मा ने कोर्ट में गलत हलफनामा दिया था।
  • कलेक्टर की रिपोर्ट में मेट्रो का दावा गलत निकला।
  • जस्टिस विशाल मिश्रा ने GM को व्यक्तिगत रूप से तलब किया।
  • GM ने बिना शर्त माफी मांगी, कोर्ट ने चेतावनी देकर स्वीकार की।
  • अगली सुनवाई 6 मार्च 2026 को तय की गई है।

News in Detail

भोपाल में मेट्रो निर्माण को लेकर दाखिल याचिका में हाईकोर्ट का बड़ा आदेश सामने आया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के महाप्रबंधक को सख्त चेतावनी दी है। जस्टिस विशाल मिश्रा ने साफ कहा कि दोबारा कोर्ट को गुमराह किया तो जेल भी हो सकती है।



भोपाल के गौतम नगर निवासी श्रीनिवास अग्रवाल, सुदेश अग्रवाल और राजेश अग्रवाल मेट्रो निर्माण के चलते यातायात बैंडिट होने पर याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया कि भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 6 के पास चल रहे मेट्रो निर्माण के कारण उनके क्षेत्र तक जाने वाला रास्ता बंद हो गया है। लोगों को आने जाने में भारी परेशानी हो रही है।



मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने पहले कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि बैरिकेड हटा दिए गए हैं और रास्ता खोल दिया गया है। इसी दावे को लेकर विवाद खड़ा हुआ।



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कलेक्टर की रिपोर्ट से खुली सच्चाई

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं के वकील हरप्रीत सिंह गुप्ता ने कहा कि मेट्रो का दावा गलत है, तब जस्टिस विशाल मिश्रा ने 2 फरवरी 2026 को भोपाल कलेक्टर से जांच रिपोर्ट मांगी।



कलेक्टर की रिपोर्ट में सामने आया कि बैरिकेड पूरी तरह नहीं हटाए गए थे। वहां केवल लगभग 3.79 मीटर यानी करीब 10 फीट का वैकल्पिक रास्ता बाद में दिखाया गया, जबकि पहले मात्र पौने चार फीट का संकरा मार्ग उपलब्ध था। इससे साफ हुआ कि पहले दिया गया हलफनामा सही नहीं था।



कोर्ट की सख्ती और जेल की चेतावनी

सुनवाई के दौरान जस्टिस विशाल मिश्रा ने मेट्रो GM हरिओम शर्मा को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने को कहा। अगली सुनवाई में जब वह हाईकोर्ट में पेश हुए तो कोर्ट ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर भविष्य में फिर से गलत हलफनामा दिया गया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जेल भी भेजा जा सकता है।



कोर्ट की नाराजगी के बाद मेट्रो की ओर से बिना शर्त माफी मांगी गई। वरिष्ठ अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि हलफनामे में सही शब्दों का इस्तेमाल नहीं हुआ था।



माफी स्वीकार, लेकिन सख्त चेतावनी कायम

जबलपुर हाईकोर्ट ने GM द्वारा दी गई बिना शर्त माफी को स्वीकार कर लिया। साथ ही पहले वाला विवादित हलफनामा वापस लेने की अनुमति भी दे दी। हालांकि जस्टिस ने साफ कहा कि अदालत को गुमराह करना गंभीर मामला है और इसे हल्के में नहीं लिया जाएगा।



नया रास्ता देने का दावा

सुनवाई के दौरान मेट्रो कॉर्पोरेशन ने कहा कि अब याचिकाकर्ताओं को दो विकल्प दिए गए हैं। एक लगभग 3 फीट चौड़ा रास्ता और दूसरा रेलवे जमीन से होकर करीब 10 फीट चौड़ा वैकल्पिक मार्ग। कोर्ट ने इन नए प्रस्तावों पर याचिकाकर्ता पक्ष को जवाब देने के लिए समय दिया है।



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अगली सुनवाई 6 मार्च को

मामले की अगली सुनवाई 6 मार्च 2026 को तय की गई है। अब देखना होगा कि मेट्रो द्वारा दिया गया नया रास्ता स्थानीय लोगों की परेशानी दूर कर पाता है या नहीं। इस पूरे मामले ने साफ कर दिया है कि जबलपुर हाईकोर्ट गलत जानकारी पर सख्त रुख अपनाने से पीछे नहीं हटता।





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