विकास कार्यों में बाधा न बने कोई भी धर्म या समुदाय, भोपाल मेट्रो विवाद पर बोले हिंदू संगठन

Sanjay Dhiman | May 11, 2026, 19:36 IST
Photograph: (the sootr)
भोपाल में मेट्रो निर्माण को लेकर वक्फ संपत्तियों पर विवाद बढ़ता जा रहा है। हिंदू संगठनों ने मेट्रो प्रोजेक्ट में धार्मिक स्थलों को लेकर एक जैसे नियम पालन की मांग की। मेट्रो प्रबंधन और वक्फ बोर्ड की सुनवाई 14 मई को होगी। जानें इस विवाद का पूरा सच।

News in Short

  • भोपाल मेट्रो का अंडरग्राउंड रूट पुराने कब्रिस्तानों के नीचे से गुजरने पर विवाद।
  • वक्फ बोर्ड ने काम पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर की है।
  • मेट्रो प्रबंधन 14 मई को वक्फ अधिकरण में अपना पक्ष मजबूती से रखेगा।
  • हिंदू संगठनों ने कहा कि विकास में धार्मिक स्थलों को बाधा नहीं बनना चाहिए।
  • संगठनों ने भेदभाव होने पर हिंदू धर्मस्थलों को न हटाने की चेतावनी दी।

News in Detail

भोपाल में मेट्रो निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। विवाद का केंद्र प्राचीन कब्रिस्तान और वक्फ संपत्तियां बन गई हैं। मेट्रो प्रोजेक्ट में अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन को वक्फ बोर्ड की संपत्तियों के नीचे से गुजारने की योजना है, जिसके विरोध में वक्फ बोर्ड ने मेट्रो निर्माण पर रोक लगाने की मांग की गई है। इधर अब इस विवाद में हिंदू संगठनों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। हिंदू संगठनों का साफ कहना है कि विकास कार्यों में किसी धर्म या समुदाय के हिसाब से काम नहीं होना चाहिए। सभी पक्षों के लिए एक जैसे नियम और मापदंडों का पालन किया जाना चाहिए।



वक्फ बोर्ड का विरोध

भोपाल के प्रमुख कब्रिस्तान जैसे मासूमा तकिया, अम्मनशाह मस्जिद, मस्जिद नूरानी, और मुल्लाशाह के नीचे मेट्रो लाइन बिछाने की योजना पर विवाद छिड़ गया है।इन कब्रिस्तानों में हजारों की संख्या में कब्रें हैं, जिन्हें लेकर मुस्लिम पक्ष विरोध कर रहा है।



हिंदू संगठनों की प्रतिक्रिया

इस विवाद को लेकर हिंदू संगठनों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि केवल मुस्लिम धर्मस्थलों के लिए मेट्रो का रास्ता बदला जाएगा तो हिंदू धर्मस्थलों को भी कोई नहीं हटा सकेगा। हिंदू उत्सव समिति भोपाल अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि हिंदू समाज हमेशा विकास कार्यों में सहयोग करता आया है। मेट्रो के लिए अगर केवल हिंदू धार्मिक स्थलों को हटाने की कोशिश होगी, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



विकास में धर्म का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए

चंद्रशेखर तिवारी ने यह भी कहा कि मेट्रो की जरूरत सरकार तय करती है, न कि विधायक। किसी भी धर्मस्थल या समुदाय को विकास कार्य में रुकावट डालने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। यदि यह विवाद धार्मिक आधार पर बढ़ता है, तो यह पूरी तरह से गलत होगा। मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर सरकार को हर धर्म के स्थानों को समान रूप से देखना चाहिए।



क्या है मेट्रो लाइन के बारे में विवाद?

मेट्रो निर्माण के लिए प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन भोपाल के प्रमुख कब्रिस्तानों के नीचे से गुजरेगी। इस पर वक्फ बोर्ड ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। वक्फ बोर्ड का कहना है कि इन कब्रिस्तानों का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। ऐसे स्थानों के नीचे मेट्रो लाइन का निर्माण धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है।



विकास कार्यों में धर्म का हस्तक्षेप न हो

इस विवाद के सुलझने के लिए मेट्रो प्रबंधन और वक्फ बोर्ड की सुनवाई 14 मई को होने वाली है। इस सुनवाई में मेट्रो प्रबंधन अपना पक्ष रखेगा। इस सुनवाई में इस विवाद का कोई समाधान निकालने का प्रयास किया जा सकता है। इस विवाद में प्रमुख सवाल यह है कि क्या विकास कार्यों में किसी भी धर्म या समुदाय को रुकावट डालने का अधिकार दिया जाना चाहिए।



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  • हिंदू उत्सव समिति भोपाल अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी