अब दीवार पर दर्ज होगा प्रॉपर्टी का हिसाब-किताब, मकानों-दुकानों के बाहर लगेंगी QR कोड वाली मेटल प्लेट

Aman Vaishnav | Oct 11, 2026, 09:43 IST
भोपाल में मकानों के बाहर लगेगी क्यूआर कोड डिजिटल नंबर प्लेट
भोपाल नगर निगम अब मकानों और दुकानों की पहचान आसान बनाने के लिए नई व्यवस्था शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत जीपीएस से जुड़ी क्यूआर कोड वाली मेटल नंबर प्लेट लगाई जाएंगी। मोबाइल से कोड स्कैन करते ही प्लॉट का आकार, निर्माण की अनुमति और पुराने प्रॉपर्टी टैक्स का बकाया पता चल जाएगा। हालांकि, इससे मकान मालिक का नाम या मोबाइल नंबर जैसी निजी जानकारी नहीं दिखेगी।

घर के बाहर नेमप्लेट जैसा क्यूआर

इस व्यवस्था से कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल से QR कोड स्कैन करके प्रॉपर्टी की पूरी जानकारी देख सकेगा। इसमें पता चलेगा कि नगर निगम ने कितने हिस्से और कितनी मंजिलों के निर्माण की मंजूरी दी थी। साथ ही मौके पर असल में कितना निर्माण हुआ है, यह भी पता चल जाएगा। इसके अलावा प्रॉपर्टी टैक्स कितना है कितना पुराना बकाया बाकी है। टैक्स की रसीद भी मोबाइल पर तुरंत दिख जाएगी।



नई व्यवस्था से शहर और लोगों को क्या फायदे ?

डिजिटल नंबर प्लेट लगने के बाद शहर की व्यवस्था में कई बड़े सुधार देखने को मिलेंगे।



  • अवैध निर्माण पर तुरंत रोक: सिस्टम में स्वीकृत अनुमति और मौके पर मौजूद निर्माण दोनों का रिकॉर्ड दर्ज रहेगा। अगर किसी ने तय नक्शे से अलग एक्स्ट्रा मंजिल बनाई या कवर्ड एरिया बढ़ाया, तो वह गड़बड़ी तुरंत पकड़ में आ जाएगी।
  • टैक्स वसूली में पारदर्शिता: प्रॉपर्टी टैक्स, जल कर और कचरा प्रबंधन शुल्क कितना बना, कितना जमा हुआ और कितना बकाया बचा है, यह सब स्कैन करते ही साफ हो जाएगा।
  • हर साल जियो-टैग फोटो से अपडेट: मकानों में होने वाले बदलावों को ट्रैक करने के लिए हर साल इमारत की नई फोटो जियो-टैगिंग के साथ सिस्टम में अपलोड की जाएगी। इससे यह पता चल जाएगा कि कहीं बाद में कोई अतिरिक्त निर्माण तो नहीं कर लिया गया।
  • इमरजेंसी में तेजी से पहुंचेगी मदद: जीपीएस लोकेशन दर्ज होने की वजह से एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, पुलिस और जरूरी डिलीवरी सेवाओं को घर का सही पता ढूंढने में कोई परेशानी नहीं होगी।

अभी की व्यवस्था में क्या अड़चन है?

फिलहाल भोपाल नगर निगम में संपत्तियों का रिकॉर्ड सिर्फ जोन अधिकारियों और टैक्स कलेक्टरों की फाइलों तक ही सीमित रहता है। इस वजह से न तो टैक्स का सही असेसमेंट हो पाता है। न ही समय पर सही टैक्स कलेक्शन हो पाता है। कई बार निर्माण की सही जानकारी सामने न आने से निगम को राजस्व का बड़ा नुकसान भी उठाना पड़ता है।



इंदौर और रायपुर के अनुभवों से सीखेगा भोपाल

यह योजना जितनी आधुनिक दिखती है, इसे लागू करना उतना ही चुनौतीपूर्ण भी रहा है। इससे पहले रायपुर और इंदौर में भी ऐसी ही डिजिटल नंबर प्लेट व्यवस्था शुरू की गई थी। वहां फंड की कमी की वजह से यह सिस्टम टिक नहीं पाया और फेल हो गया।



रायपुर-इंदौर के सिस्टम का अध्ययन

FAQ



  1. भोपाल में डिजिटल नंबर प्लेट प्रणाली के क्या लाभ हैं?
    डिजिटल नंबर प्लेट प्रणाली से अवैध निर्माण पर रोक, प्रॉपर्टी टैक्स में पारदर्शिता, और आपातकालीन सेवाओं को तेज पहुंचाने में मदद मिलेगी।
  2. भोपाल में संपत्तियों का रिकॉर्ड वर्तमान में कैसे प्रबंधित किया जाता है?
    भोपाल में संपत्तियों का रिकॉर्ड सिर्फ जोन अधिकारियों और टैक्स कलेक्टरों की फाइलों तक सीमित है, जिससे सही टैक्स असेसमेंट और कलेक्शन में समस्याएं आती हैं।
  3. रायपुर और इंदौर के डिजिटल प्लेट सिस्टम से भोपाल को क्या सीखने को मिलेगा?
    भोपाल के लिए रायपुर और इंदौर के डिजिटल प्रणाली का अध्ययन किया जाएगा, ताकि तकनीकी और वित्तीय स्तर पर जो कमियां थीं, उन्हें समझा जा सके और सफल प्रणाली विकसित की जा सके।
Tags:
  • घर के बाहर नेमप्लेट जैसा क्यूआर
  • डिजिटल नंबर प्लेट
  • भोपाल नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन
  • भोपाल नगर निगम
  • भोपाल में डिजिटल नंबर प्लेट
  • भोपाल में संपत्तियों का रिकॉर्ड