भोपाल नगर निगम टैक्स घोटाला: सिस्टम से खेल कर एक करोड़ डकार गए कर्मचारी!
समझें क्या है पूरा मामला..
- भोपाल नगर निगम में टैक्स घोटाला में एक नया खुलासा हुआ है।
- आरोपी ऑनलाइन टैक्स भरने वालों का यूटीआर नंबर दोबारा इस्तेमाल करते थे।
- इसी नंबर पर नकद टैक्स भरने वालों की फर्जी रसीद बना देते थे।
- सिस्टम में दोनों का टैक्स जमा दिखता था, लेकिन नकद पैसा आरोपियों की जेब में जाता था।
- अब तक 14.69 लाख रुपए का गबन पकड़ा गया है।
- अब लगभग एक करोड़ रुपए के भुगतानों की जांच चल रही है।
एक यूटीआर, दो रसीदें
बता दें कि आरोपियों का तरीका बेहद सोचा-समझा था। जब कोई संपत्ति मालिक बड़ी रकम आरटीजीएस या ऑनलाइन माध्यम से भरता था, तो आरोपी उसका यूटीआर नंबर सिस्टम में दर्ज कर लेते थे।
इसके बाद जब उतनी ही राशि वाला कोई दूसरा व्यक्ति नकद भुगतान करने आता, तो उसकी एंट्री सिस्टम में हो जाती थी। लेकिन उसमें भी पहले वाला ही यूटीआर नंबर दोबारा डाल दिया जाता था।
नतीजा यह होता था कि सिस्टम में दोनों संपत्तियों का टैक्स जमा दिखने लगता था। असल में दूसरे व्यक्ति से लिया गया पूरा नकद पैसा बैंक में जमा होने के बजाय आरोपियों के पास ही रह जाता था।
भोपाल नगर निगम में सरकारी सिस्टम के पासवर्ड हुए लीक, 14 लाख का किया फ्रॉड
कहीं भी टैक्स भरने का फायदा
नगर निगम के नियम के अनुसार कोई भी नागरिक किसी भी वार्ड या जोन कार्यालय में जाकर टैक्स जमा कर सकता है। जैसे वार्ड नंबर 1 का निवासी चाहे तो वार्ड 85 के दफ्तर में भी टैक्स भर सकता है। पैसा कहीं भी जमा हो, रसीद उसी के वार्ड की आईडी से बनती है।
इस केंद्रीकृत व्यवस्था का आरोपियों ने खूब फायदा उठाया। उन्होंने दूसरे वार्डों के लॉगिन का इस्तेमाल किया। इससे उन्हें आसानी से पकड़ में आने से बचने में मदद मिली।
बैंक भेजने की जगह जेब में
नियम कहता है कि वार्ड कार्यालयों में जमा होने वाला कैश हर दूसरे दिन सुबह 11 बजे बैंक कर्मचारियों को सौंपा जाना चाहिए। लेकिन आरोपी इस कैश को बैंक भेजने के बजाय खुद अपने पास रख लेते थे। यही तरीका लंबे समय तक चलता रहा।
पांच जोन, एक करोड़ की जांच
जानकारी के अनुसार ऑडिट टीम ने जोन नंबर 10, 7, 13, 17 और 3 में हुए भुगतानों पर गंभीर आपत्ति जताई थी। इसके बाद निगम कमिश्नर के निर्देश पर संदिग्ध फाइलें संबंधित जोनों को भेजी गईं। इन फाइलों की कुल राशि करीब एक करोड़ रुपए बताई जा रही है।
संदिग्ध भुगतानों की मैपिंग
भोपाल नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने बताया कि संदिग्ध भुगतानों की मैपिंग की गई है। मैपिंग के दौरान जो भी एंट्रियां फर्जी या संदिग्ध पाई गई हैं, उन्हें आधिकारिक जांच के दायरे में ले लिया गया है। वहीं जिन एंट्रियों का रिकॉर्ड सही पाया गया उन्हें जांच से अलग कर दिया गया है।
लोक अदालत के दिन था हुआ खेल
जानकारी के अनुसार यह फर्जीवाड़ा 14 मार्च 2026 को हुआ था। इस दिन नगर निगम में वित्तीय वर्ष की लोक अदालत आयोजित थी। आरोप है कि इसी भीड़भाड़ और व्यस्तता का फायदा उठाया गया था।
इस फर्जीवाड़े के लिए वार्ड क्रमांक 33 की यूजर आईडी से 14 लाख 69 हजार 798 रुपए की रसीदें जारी हुई थी। यह रसीदें फर्जी आरटीजीएस और एनईएफटी लेनदेन की बताई जा रही हैं। हैरानी की बात है कि असली भुगतान निगम के खाते में कभी पहुंचा ही नहीं।
वार्ड प्रभारी ने की शिकायत
हद तो तब हुई कि वार्ड क्रमांक 33 के प्रभारी रघुवीर तिवारी को इसकी जानकारी बाद में मिली। उन्हें पता चला कि उनकी आईडी से लाखों की रसीदें जारी हुई हैं। जबकि उन्होंने खुद ऐसा कोई लेनदेन नहीं किया था।
इसके बाद रघुवीर तिवारी ने तुरंत जोनल अधिकारी को सूचना दी थी। साथ ही निगम मुख्यालय को भी लिखित शिकायत भेजी शिकायत में साफ कहा गया कि उनकी लॉगिन डिटेल का दुरुपयोग हुआ है।
पहले धीमी रही कार्रवाई
यह मामला शिकायत के बाद मामला अरेरा हिल्स भोपाल थाने पहुंचा। लेकिन शुरुआत में पुलिस कार्रवाई की रफ्तार धीमी रही। मामला तब तेज हुआ जब निगम की अपर आयुक्त (राजस्व) आईएएस अंजू अरुण कुमार ने हस्तक्षेप किया।
अंजू अरुण कुमार ने थाना प्रभारी को पत्र लिखकर तुरंत कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस ने जांच में तेजी लाई। तकनीकी साक्ष्य जुटाने का काम शुरू हुआ।
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