भोपाल में 8 हजार नोटिस के बाद सीलिंग शुरू, लेकिन क्या सिर्फ खानापूर्ति ?
ऐसे समझें पूरा मामला
- भोपाल नगर निगम ने 31 अगस्त से सीलिंग कार्रवाई शुरू की।
- 4 घंटे में 15 से ज्यादा दुकानें बंद कर दी गईं।
- निगम ने 26 अगस्त तक 8264 नोटिस जारी किए थे।
- व्यापारी इसे सिर्फ खानापूर्ति और छोटे कारोबारियों पर अन्याय बता रहे हैं।
- मामला सुप्रीम कोर्ट में है, अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
31 अगस्त की सुबह भोपाल में हलचल मच गई। सुबह 9 बजे नगर निगम की टीम सड़कों पर उतरी। देखते ही देखते सीलिंग शुरू हो गई। सिर्फ 4 घंटे में 15 से ज्यादा दुकानें बंद कर दी गईं। इस अचानक कार्रवाई से व्यापारी सकते में आ गए। आसपास रहने वाले लोग भी नाराज नजर आए।
व्यापारियों का बड़ा आरोप
सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाने वाले विवेक त्रिपाठी ने सवाल उठाए। उनका कहना है कि निगम सिर्फ दिखावा कर रहा है। बड़े और रसूखदार लोगों को छोड़ दिया जा रहा है। सिर्फ छोटे कारोबारी ही निशाने पर हैं।
ई-3 अरेरा कॉलोनी में भी टीम पहुंची। यहां आरोप कुछ अलग है। जो दुकानें पहले ही बंद हो चुकी थीं, वहां सिर्फ नोटिस चिपकाए गए। कुछ दुकानदारों ने मोहलत मांगी। लेकिन अफसरों ने साफ मना कर दिया। उनका कहना था कि पहले ही कई दिन की मोहलत दी जा चुकी है।
आनंद सोनी की मांग
व्यापारी महासंघ अध्यक्ष आनंद सोनी ने द सूत्र से बात की। उन्होंने इसे व्यापारियों के साथ अन्याय बताया। उनकी मांग है कि सरकार जल्द मास्टर प्लान लागू करे। सरकार के पास ड्राफ्ट पहले से तैयार है। लेकिन अब तक लागू नहीं हुआ है।
सोनी ने दो और विकल्प भी सुझाए। पहला, 2012 का भूमि विकास अधिनियम संशोधित कर लागू किया जाए। दूसरा, 2022 का गुजरात मॉडल अपनाया जाए। उन्होंने चेतावनी भी दी। अगर हालात ऐसे ही रहे तो भोपाल का 90 फीसदी व्यापार बंद हो सकता है।
कुल कितने नोटिस जारी हुए
आंकड़ों की बात करें तो निगम ने 26 अगस्त तक 8264 नोटिस जारी किए। इसके बाद ही सीलिंग शुरू हुई। यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है। अगस्त के पहले हफ्ते में वहां सुनवाई हो चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ
यह सुनवाई आवासीय इमारतों के व्यावसायिक इस्तेमाल से जुड़ी थी। इसके साथ अवैध निर्माण का मामला भी जुड़ा है। इस सुनवाई में मध्यप्रदेश सरकार को झटका लगा था। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की 10 सदस्यीय जांच समिति पर रोक लगा दी। कोर्ट ने साफ कहा कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में कोई हस्तक्षेप मंजूर नहीं होगा।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होनी है। उसी सुनवाई में निगम को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट देनी है। इसी वजह से अभी सीलिंग तेज कर दी गई है।
रहवासियों की भी शिकायत
सिर्फ व्यापारी ही परेशान नहीं हैं। रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोग भी लंबे समय से शिकायत कर रहे थे। उनका कहना है कि आवासीय इलाकों में दुकानें चलना गलत है। इससे शोर बढ़ता है और भीड़ लगती है। कुछ लोगों ने असामाजिक तत्वों के जमावड़े की भी शिकायत की।
दूसरी तरफ व्यापारियों की अपनी दलील है। उनकी मांग है कि मास्टर प्लान जल्द लागू हो। या फिर मिक्स्ड लैंड यूज का प्रावधान (Mixed Land Use – एक ही जमीन पर रिहायशी और व्यावसायिक, दोनों गतिविधियों की कानूनी इजाजत) किया जाए। व्यापारियों का कहना है कि हालात अब रोने जैसे हो गए हैं। अगर यही चलता रहा तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
कर्मचारियों पर सबसे बड़ी मार
सबसे मुश्किल में वो लोग हैं जो इन दुकानों, मॉल और शोरूम में काम करते थे। अचानक दुकानें बंद होने से उनकी नौकरी छिन गई। अब उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा है। उनका कहना है कि नई नौकरी कहां से ढूंढें। परिवार का पेट पालना भी जरूरी है।
आगे क्या हो सकता है
अब सबकी नजर 15 सितंबर की सुनवाई पर टिकी है। उस दिन नगर निगम को अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करनी होगी। इससे पहले तक सीलिंग की कार्रवाई जारी रह सकती है। व्यापारी संगठन इस बीच सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि सिर्फ कार्रवाई से समस्या हल नहीं होगी। मास्टर प्लान या मिक्स्ड लैंड यूज जैसी स्थायी व्यवस्था जरूरी है।
दूसरी तरफ निगम अफसरों का रुख साफ है। उनका कहना है कि नोटिस पहले ही दिए जा चुके हैं। अब समय खत्म हो चुका है, इसलिए कार्रवाई जरूरी हो गई। लेकिन व्यापारियों को डर है कि आगे और भी दुकानें बंद हो सकती हैं। इससे रोजगार और कारोबार दोनों पर असर पड़ेगा।
कुल मिलाकर इस कार्रवाई से कोई खुश नहीं है। रहवासियों का आरोप है कि निगम सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है। वहीं व्यापारी पूछ रहे हैं कि आखिर उनकी गलती क्या है। यह सवाल अब सरकार से पूछा जा रहा है।
FAQ
- भोपाल में नगर निगम सीलिंग कार्रवाई क्यों कर रहा है?
रिहायशी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों और अवैध निर्माण को लेकर नगर निगम कार्रवाई कर रहा है। - व्यापारी सीलिंग कार्रवाई का विरोध क्यों कर रहे हैं?
व्यापारियों का कहना है कि बिना मास्टर प्लान लागू किए कार्रवाई करना गलत है और इससे रोजगार प्रभावित होगा।
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