भोपाल में शत्रु संपत्ति पर एक्शन, मेपल हाउस समेत कई संपत्तियां जांच के दायरे में
समझें क्या है पूरा मामला...
- राजधानी भोपाल में नवाबों से जुड़ी संपत्तियां एक बार फिर जांच के घेरे में आ गई हैं।
- कलेक्टर कार्यालय ने उन सभी संपत्तियों का ब्यौरा मांगा है जिन्हें शत्रु संपत्ति घोषित किया था।
- एडीएम सुमित पांडे ने बैरागढ़, गोविंदपुरा, टीटी नगर, कोलार एसडीएम से इसकी जानकारी मांगी है।
- जांच में मेपल हाउस और रियाज मंजिल जैसी संपत्तियां भी शामिल हैं।
- प्रशासन यह पता लगा रहा है कि इन संपत्तियों का असली मालिक कौन है।
भोपाल में नवाबकाल से जुड़ी कई संपत्तियां एक बार फिर सरकारी जांच के दायरे में आई हैं। कलेक्टर कार्यालय ने इन संपत्तियों का पूरा ब्यौरा मांगा है। जांच में मेपल हाउस, रियाज मंजिल और नानी की कोठी जैसी ऐतिहासिक इमारतें शामिल हैं।
एडीएम सुमित पांडे ने छह इलाकों के एसडीएम से जानकारी तलब की है। इससे यह पता चलेगा कि इन संपत्तियों पर अभी किसका कब्जा है।
भोपाल की पुरानी हवेलियां फिर सुर्खियों में
राजधानी भोपाल के इतिहास में नवाबों का दौर बेहद अहम रहा है। उनकी भव्य हवेलियां और बड़ी जमीनें आज भी शहर में मौजूद हैं। इनमें से कुछ संपत्तियों का कानूनी दर्जा सालों से उलझा हुआ है।
अब कलेक्टर कार्यालय ने इन संपत्तियों की ताजा स्थिति जानने के निर्देश दिए हैं। एडीएम (अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट) सुमित पांडे ने बैरागढ़, शहर वृत्त, गोविंदपुरा, टीटी नगर, कोलार और बैरसिया के एसडीएम से जानकारी मांगी है। यह कार्रवाई केंद्र सरकार के निर्देश पर हुई है।
कौन-सी संपत्तियां जांच के दायरे में?
जांच में जो संपत्तियां शामिल हैं, वे नवाब हमीदुल्ला खां और उनके परिवार से जुड़ी हैं। इनमें मेपल हाउस, रियाज मंजिल और नानी की कोठी (जिसे नानी की हवेली भी कहते हैं) प्रमुख हैं। आबिदा सुल्तान बेगम और आफताब जहां बेगम से जुड़ी संपत्तियां भी इस सूची में हैं।
प्रशासन यह पता लगाएगा कि इनमें से कौन-सी संपत्तियां बेची या खरीदी जा चुकी हैं। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि इनका मौजूदा मालिकाना हक किसके नाम है। राजस्व अभिलेखों की भी जांच होगी।
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शत्रु संपत्ति क्या होती है?
भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद कई लोगों ने पाकिस्तान की नागरिकता ले ली, लेकिन उनकी संपत्तियां भारत में ही रह गईं। बाद के युद्धों में भी यही हुआ।
ऐसी संपत्तियों को शत्रु संपत्ति (भारत में शत्रु संपत्ति) कहा जाता है। इनका प्रबंधन केंद्र सरकार के अधीन सीईपीआई (CEPI – Custodian of Enemy Property for India) करता है। गृह मंत्रालय इन संपत्तियों की निगरानी रखता है।
2021 में भी हो चुकी ऐसी कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब इन संपत्तियों पर नजर डाली गई हो। गृह मंत्रालय और सीईपीआई ने 2021-22 में भी ऐसी संपत्तियों की सूची जिला प्रशासन को भेजी थी।
तब की जानकारी अधूरी रह गई थी। इसीलिए अब फिर से संबंधित एसडीएम और तहसीलदारों से पूरी जानकारी मांगी गई है। इस बार हस्तांतरण, बिक्री और राजस्व रिकॉर्ड तीनों की जांच होगी।
दशकों से निजी उपयोग में कई संपत्तियां
इस पूरी कार्रवाई का सबसे बड़ा पहलू यह है कि कई संपत्तियां लंबे समय से निजी या संस्थागत उपयोग में आ रही हैं। कुछ में रिहायश है तो कुछ में दूसरी गतिविधियां चल रही हैं।
जांच से यह साफ होगा कि इन संपत्तियों का कानूनी दर्जा क्या है।
FAQ
- शत्रु संपत्ति किसे कहते हैं?
उत्तर: जो लोग विभाजन या युद्ध के बाद पाकिस्तान या किसी शत्रु देश की नागरिकता ले लेते हैं, उनकी भारत में छूटी संपत्तियों को शत्रु संपत्ति कहा जाता है। इनका प्रबंधन केंद्र सरकार के CEPI के जरिए होता है। इन पर निजी दावा नहीं किया जा सकता। - भोपाल में कौन-सी संपत्तियां जांच के दायरे में हैं?
उत्तर: मेपल हाउस, रियाज मंजिल और नानी की कोठी समेत कई संपत्तियां जांच में शामिल हैं। ये सभी नवाब हमीदुल्ला खां और उनके परिवार से जुड़ी हैं। इनकी मौजूदा स्थिति और मालिकाना हक की पड़ताल हो रही है।
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