भोपाल में 218 करोड़ से बनेगा 7 मंजिला प्रशासनिक भवन, एक छत के नीचे होंगे कलेक्ट्रेट, कमिश्नर और SDM दफ्तर
भोपाल में बनेगा नया प्रशासनिक भवन
इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि सरकार को नया भवन बनाने के लिए अपनी जेब से सीधे पैसे नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके बदले सरकार निर्माण कंपनी को 3 अलग-अलग सरकारी परिसरों की कुल 33 हजार 600 वर्गमीटर जमीन देगी। कंपनी अपने खर्च पर सरकार के लिए एक शानदार बहुमंजिला प्रशासनिक भवन बनाकर देगी।
कंपनी को जो जमीन मिलेगी वहां वह अपनी जरूरत के हिसाब से नए मकान या दुकानें बना सकेगी। वहीं अभी का कलेक्ट्रेट परिसर करीब 41 हजार वर्गमीटर में फैला हुआ है।
जमीन की बोली से 31 करोड़ रुपए ज्यादा मिले
सरकार ने कंपनी को दी जाने वाली 33 हजार 600 वर्गमीटर जमीन की शुरुआती कीमत 257 करोड़ रुपए तय की थी। इसके बाद जब नीलामी हुई तो 5 बड़ी कंपनियों ने अपनी-अपनी बोली लगाई।
इनमें से सबसे ऊंची बोली 288 करोड़ रुपए की लगी। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि सरकार को अपनी तय शुरुआती कीमत से करीब 31 करोड़ रुपए ज्यादा की पेशकश मिल गई है।
कंपनी को मिलेंगी शहर की ये 3 प्रमुख जमीनें
- मौजूदा कलेक्ट्रेट परिसर की जमीन
- शहर के एसडीएम कार्यालय की जमीन
- बैरागढ़ एसडीएम कार्यालय (Bairagarh SDM Office) की जमीन
एक ही छत के नीचे सभी सरकारी सुविधाएं
अक्सर देखने में आता है कि लोगों को एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर जाने में पूरा दिन लग जाता है। कभी कमिश्नर दफ्तर, तो कभी कलेक्ट्रेट, तो कभी एसडीएम कोर्ट के चक्कर काटने पड़ते हैं। नए भवन के बनने से यह दिक्कत पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
यह नया प्रशासनिक भवन कुल सात मंजिलों का बनाया जाएगा। इसमें शहर के लगभग सभी बड़े सरकारी दफ्तर एक साथ काम करेंगे।
- कलेक्ट्रेट कार्यालय (Collectorate Office)
- संभागायुक्त कार्यालय (Divisional Commissioner Office)
- आईजी कार्यालय (IG Office)
- शहर और बैरागढ़ के एसडीएम कार्यालय (SDM Offices)
- लोक सेवा केंद्र (Lok Seva Kendra)
नए परिसर में आने वाले लोगों की सुविधाओं का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। यहां गाड़ियां खड़ी करने के लिए मल्टीलेवल पार्किंग बनाई जाएगी। इसके अलावा, सरकारी कार्यक्रमों और बैठकों के लिए बड़ा ऑडिटोरियम भी बनेगा। लोगों की जरूरतों को देखते हुए दूसरी जरूरी सुविधाएं भी जुटाई जाएंगी।
4 साल तक विवादों में क्यों उलझा रहा प्रोजेक्ट?
नए कलेक्ट्रेट को बनाने की यह योजना करीब चार साल तक अलग-अलग विवादों में फंसी रही थी। शुरुआत में हाउसिंग बोर्ड ने इसे प्रोफेसर्स कॉलोनी में बनाने का पूरा प्लान तैयार किया था।
जनवरी 2023 में इसका पहला प्रस्ताव एक उच्चस्तरीय समिति के सामने रखा गया था। इसके तुरंत बाद इस योजना को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में चुनौती दे दी गई। कोर्ट में लंबी कानूनी लड़ाई चली। इसके बाद जाकर प्रोफेसर्स कॉलोनी में निर्माण कराने की मंजूरी मिल पाई।
मगर कानूनी अड़चन दूर होते ही एक नया विवाद सामने आ गया। स्थानीय सांसद आलोक शर्मा ने प्रोफेसर्स कॉलोनी में इन बड़े दफ्तरों को ले जाने पर कड़ा ऐतराज जताया। उनका साफ कहना था कि अगर पुराने भोपाल से ये सभी बड़े सरकारी दफ्तर बाहर चले जाएंगे, तो इस पूरे इलाके पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।
सांसद के विरोध के बाद सरकार ने प्रोफेसर्स कॉलोनी वाला प्रस्ताव रद्द कर दिया। इसके बाद हाउसिंग बोर्ड ने तय किया कि पुराने कलेक्ट्रेट परिसर में ही नया सात मंजिला भवन बनाया जाएगा।
कब से शुरू होगा निर्माण कार्य?
हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों ने साफ किया है कि ठेके की कागजी प्रक्रिया पूरी होते ही कंपनी को काम शुरू करने का वर्क ऑर्डर जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद एक महीने के भीतर मौके पर निर्माण कार्य शुरू होने की पूरी उम्मीद है।