भोपाल में हटाई जा रही 70 साल पुरानी बस्ती, विरोध में धरने पर बैठे कांग्रेस नेता
भोपाल के पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित मानस भवन के पास से बस्ती को हटाया जा रहा है। पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया है और बैरिकेडिंग कर दी है, जिससे लोगों की आवाजाही बंद है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, नगर निगम नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी और आसिफ जकी समेत कई नेता मौके पर पहुंचे और आदिवासी बस्तीहटाने का विरोध किया। वे धरने पर बैठ गए। एक युवक टावर पर चढ़ गया, जिसे पुलिस ने समझाकर नीचे उतार लिया।
जैसे-जैसे हंगामा बढ़ा, पुलिस एक्शन में आ गई और हल्का लाठी चार्ज किया। लेकिन जब कांग्रेसी नहीं हटे, तो पुलिस ने शबिस्ता जकी, आसिफ जकी और कुछ अन्य लोगों को हिरासत में ले लिया, हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।
असल में, 27 परिवारों को इस बस्ती से हटाकर भौंरी, कलखेड़ा और मालीखेड़ी में शिफ्ट किया जाना है। करीब 70 साल पुरानी इस बस्ती को हटाने के लिए 95 अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने साधा निशाना
कांग्रेस नेता और विधासभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार पर हमला करते हुए कहा कि आदिवासियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जा रहा है। उनके शहर से हटाकर भौंरी, कलखेड़ा और मालीखेड़ी जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में शिफ्ट कर रहे हैं।
रहवासियों की परेशानी
इस दौरान कई परिवारों ने अपने घरों में ताला लगाकर सामान की सुरक्षा पुलिस को सौंप दी। लोग परेशान हैं क्योंकि उन्हें पर्याप्त समय नहीं मिला और जरूरी सामान और दस्तावेज घरों में ही रह गए। एक छात्रा ने रोते हुए बताया कि उसकी नीट परीक्षा के दस्तावेज घर में रह गए हैं, अब वह क्या करेगी?
स्थानीय लोग परेशान हैं क्योंकि उन्होंने सालों की मेहनत से अपने घर और सामान तैयार किया था। अचानक इस कार्रवाई से उनका रोजगार, बच्चों की पढ़ाई और रोज़मर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। कई परिवारों को चिंता है कि दूर जाने के बाद उनकी जिंदगी और भी मुश्किल हो जाएगी।
पुनर्वास पर उठे सवाल
कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने प्रशासन पर सवाल उठाए और कहा कि सिर्फ बस्ती हटाना समाधान नहीं है। प्रभावित परिवारों के लिए सम्मानजनक पुनर्वास जरूरी है। उन्होंने यह भी पूछा कि नए स्थानों पर रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं कैसे दी जाएंगी।
प्रशासन की कार्रवाई जारी
प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई (बुल्डोजर से घर गिराया) न्यायालय के आदेशों के तहत की जा रही है और प्रभावित परिवारों को नए स्थान पर बसाया जाएगा। हालांकि, इस कार्रवाई ने शहर में पुनर्वास नीति और मानवीय मुद्दों पर नई बहस शुरू कर दी है।
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