शिक्षकों के बाद अब एमपी में आउटसोर्सकर्मी राजधानी में ठोकेंगे ताल, नीलम पार्क में होगा शक्ति प्रदर्शन
News in Short
- 30 अप्रैल को नीलम पार्क में प्रदेश भर से आउटसोर्सकर्मी जमा होंगे।
- न्यूनतम वेतन और ठेका कंपनियों के शोषण से आक्रोश बढ़ रहा है।
- श्रम कानूनों की अनदेखी को लेकर भी कर्मचारी सरकार से नाराज हैं।
- बीजेपी कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी।
- सरकार की बेरुखी देख संघर्ष मोर्चा ने बीजेपी अध्यक्ष को चिट्ठी लिखी है।
News in Detail
29 अप्रैल को अतिथि शिक्षकों के बाद अब आउटसोर्स कर्मचारी 30 अप्रैल को भोपाल में ताल ठोकने की तैयारी में हैं। राजधानी के नीलम पार्क में प्रदेश भर से आउटसोर्स, अस्थायी कर्मचारी जमा हो रहे हैं।
पहले यह प्रदर्शन बीजेपी प्रदेश कार्यालय के सामने किया जाना था। प्रशासन से अनुमति न मिलने के बाद संघर्ष मोर्चा ने धरना प्रदर्शन की जगह बदल दी है।
कर्मचारी संगठन के बढ़ते दबाव के बाद प्रशासन ने देर रात नीलम पार्क में प्रदर्शन की अनुमति दी है।
न्यूनतम वेतन की मांग पर अड़े हैं आउटसोर्सकर्मी
मध्य प्रदेश में सरकारी विभागों के लिए आउटसोर्स कंपनियों के माध्य से 10 लाख से ज्यादा कर्मचारी कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों को कलेक्टर रेट से भी मानदेय का भुगतान नहीं हो रहा है।
इसे लेकर पहले भी प्रदर्शन हो चुके हैं। अब प्रदेश भर के आउटसोर्स कर्मचारी संघर्ष मोर्चा बनाकर न्यूनतम मानदेय की मांग पर अड़ गए हैं।
संघर्ष मोर्चा की अगुवाई कर रहे वासुदेव शर्मा का कहना है कि, श्रम कानूनों के तहत 12 हजार 425 से 16 हजार 769 रुपए की दर से मानदेय तय है। आउटसोर्स कंपनियां सरकार के विभागों से इसी दर से रुपया वसूलती हैं, लेकिन उन्हें देते समय कटौती कर ली जाती है।
श्रम विभाग को नहीं शोषण की परवाह
आउटसोर्स कर्मचारी सरकार की बेरुखी के साथ ही श्रम विभाग से भी नाराज है। उनका आरोप है कि, श्रम विभाग कारखानों पर तो दबाव बनाता है लेकिन विभागों में काम कर रहे कर्मचारियों के शोषण को अनदेखा करता है।
इस वजह से ठेका कंपनियां आउटसोर्स कर्मचारियों पर दबाव बनाकर निर्धारित से ज्यादा घंटे काम ले रही हैं। यही नहीं उन्हें निर्धारित मानदेय का भुगतान करने की जगह उसमें कटौती कर चार से आठ हजार रुपए ही देती हैं।
दबाव बनाने पर मिली प्रदर्शन की अनुमति
संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने बताया कि सरकार लंबे समय से उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है। इसको लेकर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को पत्र लिखा था। इससे उन्हें आउटसोर्स कर्मचारियों की हालत से अवगत कराया गया था।
संघर्ष मोर्चा ने बीजेपी प्रदेश कार्यालय पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, लेकिन बुधवार, 29 अप्रैल की शाम तक अधिकारी टालते रहे। अंत में संगठन के दबाव के बाद नीलम पार्क की अनुमति दी गई है।
राजधानी के साथ जिलों में भी होगा प्रदर्शन
आउटसोर्स कर्मचारी संगठन द्वारा भोपाल में प्रदेश स्तर पर धरना- प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान सरकार की बेरुखी तोड़ने के लिए जिला मुख्यालयों पर भी आंदोलन होंगे।
इसके लिए संगठन के पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही प्रदर्शन के दौरान संविदा, दैनिक वेतनभोगी और अस्थायी कर्मचारियों के दूसरे संगठनों से भी सहयोग का आव्हान किया गया है।
FAQ
- आउटसोर्स कर्मचारी 30 अप्रैल को भोपाल में क्यों आंदोलन कर रहे हैं?
सरकार ने न्यूनतम वेतन 12,425 से 16,769 तय किया है, लेकिन स्कूलों, पंचायतों, स्वास्थ्य विभाग में 3 से 8 हजार ही मिल रहे हैं। 50 हजार आवेदन देने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई। इसलिए अस्थाई, आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा ने 30 अप्रैल को नीलम पार्क में सांकेतिक सामूहिक आत्मदाह आंदोलन का ऐलान किया है। 26 हजार न्यूनतम वेतन की मांग है। - किन विभागों के कर्मचारियों को सबसे कम वेतन मिल रहा है?
राजस्व विभाग के लोक यूथ सर्वेयरों को 1 हजार, ग्राम पंचायत चौकीदार-पंप ऑपरेटर को 3-4 हजार, कोटवारों को 2-5 हजार, मध्यान्ह भोजन कार्यकर्ताओं को 4 हजार, योग सहायकों को 4,500 रुपए महीना मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के चतुर्थ श्रेणी आउटसोर्स कर्मचारियों को 7-8 हजार मिलते हैं, जबकि न्यूनतम वेतन 16,769 है। - आंदोलन भाजपा कार्यालय के सामने क्यों नहीं हो रहा?
मोर्चा अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को पत्र लिखकर कार्यालय के सामने आंदोलन की सूचना दी थी। पर वहां अनुमति नहीं मिली। अब 30 अप्रैल को नीलम पार्क में धरना-प्रदर्शन होगा। मोर्चा का कहना है कि 2023 चुनाव में भाजपा को 48.55% वोट मिले, जिसमें इन कर्मचारियों के वोट भी हैं, इसलिए हिसाब मांगने आ रहे हैं।
ये खबरें भी पढ़िए...
न्यूनतम वेतन नहीं दिला पा रहे श्रम कानून, आउटसोर्स संगठन ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष को लिखा पत्र
एमपी न्यूज: संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को मिलेगा न्यूनतम वेतन, सेवा को मिली मान्यता
एमपी टूरिज्म में चार करोड़ की गड़बड़ी, सरकारी पैसा पर्सनल अकाउंट में डालता था कर्मचारी
मध्यप्रदेश न्यूज: सरकार की वादाखिलाफी से नाराज अतिथि शिक्षकों ने दी आंदोलन की चेतावनी