भोपाल के सरकारी हॉस्टल के खाने में कीड़े और पत्थरबाजी, उमंग सिंघार की CM से मांग
भोपाल के पंचशील नगर हॉस्टल से डराने वाली खबर आई है। यहां सरकारी कन्या छात्रावास की छात्राएं बहुत परेशान हैं। छात्राओं को खाने में बहुत खराब भोजन दिया जा रहा है। हॉस्टल (girls hostel) की सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह फेल हो गई है। रात के समय असामाजिक तत्व खिड़कियों पर पत्थर फेंकते हैं। प्रशासन इस गंभीर मामले पर पूरी तरह चुप बैठा है।
अब इस मुद्दे पर प्रदेश में राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने बेटियों की सुरक्षा को लेकर कड़े सवाल उठाए हैं। हॉस्टल की छात्राएं अब डर के साये में जी रही हैं। सरकार को इस मामले में तुरंत कड़ा एक्शन लेना चाहिए।
सुरक्षा में बड़ी चूक: वॉशरूम की खिड़कियों पर पथराव
रविवार को हॉस्टल में उस समय हड़कंप मच गया, जब अज्ञात असामाजिक तत्वों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। इस पथराव में गर्ल्स वॉशरूम (Girls Washroom) की कांच की खिड़कियां चकनाचूर हो गई हैं।
वीडियो सबूत के बावजूद पुलिस सुस्त
छात्राओं का आरोप है कि उनके पास इस पूरी घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है। इसके बावजूद, स्थानीय पुलिस और प्रशासन हमलावरों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने के बजाय मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रहे हैं।
सीसीटीवी कैमरों (CCTV Cameras) की कमी और सुरक्षा गार्डों की तैनाती न होने के कारण छात्राएं अपने ही हॉस्टल में असुरक्षित महसूस कर रही हैं।
रबर जैसा पनीर और कीड़े वाली खीर
हॉस्टल में भोजन की गुणवत्ता (Food Quality) इतनी खराब है कि छात्राओं का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है। 29 मार्च को परोसी गई खीर में कीड़े तैरते मिले, जिसने प्रबंधन की लापरवाही की पोल खोल दी।
पनीर का 'आयोडीन टेस्ट' (Iodine Test of Paneer)
छात्राओं ने जागरूक नागरिक की भूमिका निभाते हुए जब रबर जैसे दिखने वाले पनीर पर 'आयोडीन सॉल्यूशन' डाला, तो वह काला पड़ गया। विज्ञान के अनुसार, यह मिलावट और 'स्टार्च' की पुष्टि करता है। पिछले छह महीनों से छात्राओं को पानी जैसी पतली दाल और कच्ची रोटियां दी जा रही हैं।
उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा
इस मामले में मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने ट्वीट करते हुए सरकार को घेरा है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा...
भोपाल के शासकीय अनुसूचित जाति गर्ल्स हॉस्टल में एक बार फिर गंभीर लापरवाही सामने आई है। खाने में कीड़े, पनीर रबर जैसा, गर्ल्स वॉशरूम की खिड़कियां पत्थर मारकर असामाजिक तत्वों द्वारा तोड़ना बेहद चिंताजनक है। यह स्थिति न सिर्फ शर्मनाक है, बल्कि छात्राओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ है।
सिस्टम की नाकामी: शिकायतों को दबाने की कोशिश
छात्राओं ने अपनी समस्याओं को लेकर वार्डन से लेकर सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) तक गुहार लगाई, लेकिन समाधान के बजाय उन पर ही मानसिक दबाव (Mental Pressure) बनाया जा रहा है।
- कोरे कागज पर हस्ताक्षर: आरोप है कि वार्डन छात्राओं से कोरे कागज पर यह लिखवा रही हैं कि उन्हें कोई शिकायत नहीं है।
- अभिभावकों पर दबाव: शिकायत वापस लेने के लिए छात्राओं के माता-पिता को बुलाकर उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है।
- पुराना इतिहास: इससे पहले 7 नवंबर 2025 को भी लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन विभाग के आला अधिकारियों ने उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया।
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