एमपी में पेट्रोल पंप पर ग्राहकों के साथ खेला, बेच रहे पानी मिला डीजल
समझें क्या है पूरा मामला...
- एक पेट्रोल पंप पर बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई।
- यहां डीजल में पानी मिलाया जा रहा था।
- जांच टीम ने पंप का औचक निरीक्षण किया।
- जांच में 9 हजार 787 लीटर मिलावटी डीजल जब्त किया गया।
- प्रशासन ने पंप का टैंक और चारों नोजल सील कर दिए।
इंडेन कंपनी के पंप पर मिली गड़बड़ी
दरअसल राजधानी भोपाल में पेट्रोल-डीजल की गुणवत्ता जांचने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत गोविंदपुरा स्थित इंडेन कंपनी के मेसर्स दम्मो फिलिंग स्टेशन की जांच की गई। जांच में यहां गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
जानकारी के अनुसार टीम ने पाया कि पंप पर ग्राहकों को तय मानक से ज्यादा पानी मिला डीजल बेचा जा रहा था। यह पुष्टि होते ही प्रशासन हरकत में आया। मौके पर मौजूद 9 हजार 787 लीटर डीजल तुरंत जब्त कर लिया गया। साथ ही टैंक और सभी चार नोजल सील कर दिए गए।
कलेक्टर के निर्देश पर हुई जांच
यह पूरी कार्रवाई कलेक्टर के निर्देश पर हुई। इसके लिए एक विशेष गोविंदपुरा जांच दल बनाया गया था। जांच के दौरान इंडियन ऑयल कंपनी का एक प्रतिनिधि भी मौजूद रहा। दल ने पंप का पूरी तरह औचक निरीक्षण किया।
जांच में ड्रिप रॉड तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इस जांच में डीजल में पानी की मात्रा करीब 4 प्रतिशत पाई गई। जबकि नियमानुसार डीजल में सिर्फ 3 प्रतिशत तक पानी ही स्वीकार्य माना जाता है। तय सीमा से ज्यादा पानी मिलते ही टीम ने तत्काल कार्रवाई कर दी।
भंडारण के रिकॉर्ड में भी मिली गड़बड़ी
जांच के दौरान सिर्फ मिलावट ही नहीं रिकॉर्ड में भी बड़ी गड़बड़ी सामने आई। अधिकारियों ने पाया कि दिसंबर, मार्च, मई, जून और जुलाई महीनों में पंप पर स्वीकृत क्षमता से ज्यादा पेट्रोल का भंडारण दर्ज था। यह अंतर करीब 3 हजार लीटर का था।
नियम के अनुसार इस पंप को अधिकतम 20 हजार लीटर पेट्रोल रखने की अनुमति है। वहीं जांच में रिकॉर्ड में 23 हजार लीटर पेट्रोल दर्ज मिला। यानी तय सीमा से करीब 3 हजार लीटर ज्यादा भंडारण दिखाया गया था।
ई-20 पेट्रोल की जानकारी छिपाने का मामला
जांच में एक और अहम बात सामने आई है। पंप पर बेचे जा रहे एक्स्ट्रा प्रीमियम पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाए जाने की पुष्टि हुई। इसे उपभोक्ताओं को ई-20 पेट्रोल के रूप में स्पष्ट रूप से प्रदर्शित नहीं किया गया था।
नियमानुसार अगर पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया गया है, तो इसकी जानकारी ग्राहकों को साफ तौर पर देना अनिवार्य है। ऐसा न करना उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन माना जाता है। जांच दल ने इस बिंदु को भी अपनी रिपोर्ट में दर्ज किया है।
पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने उठाए सवाल
इस कार्रवाई पर कारोबारियों ने भी सवाल खड़े किए हैं। पेट्रोल पंप एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने अपनी बात रखी। उनका कहना है कि सभी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंप पूरी तरह ऑटोमैटिक सिस्टम से संचालित होते हैं।
एसोसिएशन के मुताबिक डीजल टैंक में तय मात्रा से ज्यादा पानी रह ही नहीं सकता। पानी के स्तर की लगातार ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाती है। अगर पानी का स्तर सीमा से ज्यादा बढ़ता है, तो सेंसर उसे तुरंत पकड़ लेते हैं।
एसोसिएशन का यह भी दावा है कि अगर पानी मिला डीजल डिस्पेंसिंग सिस्टम तक पहुंच भी जाए, तो मशीन का नोजल अपने आप लॉक हो जाता है। इससे डीजल की आपूर्ति खुद-ब-खुद बंद हो जाती है। एसोसिएशन ने मामले की दोबारा जांच कराने की मांग की है।
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