अपने घर का सपना अधूरा: 9 साल बाद भी हजारों परिवारों को नहीं मिला पीएम आवास

Ramanand Tiwari | Jun 18, 2026, 08:30 IST
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भोपाल में PM आवास योजना के 21 प्रोजेक्ट में से 40% अभी अधूरे हैं। 9 साल में सिर्फ 6500 मकान बने, लक्ष्य 11400 का था। हजारों परिवार EMI और किराया दोनों भर रहे हैं।

राजधानी भोपाल में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर पाने का सपना देखने वाले हजारों परिवार आज भी इंतजार की कतार में खड़े हैं। कई हितग्राहियों ने वर्षों पहले अपनी जमा-पूंजी लगाकर और बैंक से ऋण लेकर मकान बुक किए थे, लेकिन उन्हें अब तक अपने घर का कब्जा नहीं मिला है। नतीजा यह है कि बड़ी संख्या में परिवार एक साथ बैंक की EMI और किराए का खर्च उठाने को मजबूर हैं।



ऐसे समझें पीएम आवास योजना का गणित

भोपाल में पीएम आवास योजना के तहत 21 आवासीय परियोजनाएं शुरू हुई थीं। करीब 11,400 से अधिक मकानों का लक्ष्य तय किया गया था। लगभग 9 साल बाद भी सिर्फ 6,500 के आसपास मकान ही पूरे हो पाए हैं।



  • करीब 40 प्रतिशत परियोजनाएं विभिन्न कारणों से अटकी हुई हैं।
  • कई परियोजनाओं में बुनियादी सुविधाओं का काम अधूरा है।
  • हितग्राही EMI और किराए की दोहरी आर्थिक मार झेल रहे हैं।
  • विपक्ष ने योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े किए हैं।

‘हाउसिंग फॉर ऑल’ मिशन की रफ्तार क्यों हुई धीमी?

केंद्र सरकार के ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ मिशन के तहत भोपाल में आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम आय वर्ग के लोगों को किफायती आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 21 प्रोजेक्ट शुरू किए गए थे।



इन परियोजनाओं के जरिए 11 हजार 400 से अधिक मकानों का निर्माण कर पात्र हितग्राहियों को सौंपने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, योजना शुरू होने के लगभग नौ वर्ष बाद भी लक्ष्य का बड़ा हिस्सा अधूरा पड़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक करीब 6,500 मकानों का निर्माण ही पूरा हो पाया है।



अधूरी परियोजनाओं ने बढ़ाई हितग्राहियों की परेशानी

मकानों का समय पर निर्माण और आवंटन नहीं होने से सबसे ज्यादा परेशानी उन परिवारों को हो रही है, जिन्होंने बैंक ऋण लेकर आवास बुक कराया था। ऐसे परिवार एक तरफ बैंक की मासिक किश्तें चुका रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ किराए के मकानों में रहने का खर्च भी उठा रहे हैं। सीमित आय वाले परिवारों के लिए यह स्थिति आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव दोनों बढ़ा रही है।


कई हितग्राहियों का कहना है कि जिस योजना से उन्हें स्थायी आशियाना मिलने की उम्मीद थी, वही अब उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ का कारण बन गई है।



कई प्रोजेक्ट वर्षों से समयसीमा से पीछे

शहर की कई आवासीय परियोजनाएं तय समयसीमा से काफी पीछे चल रही हैं। अरेरा कॉलोनी 12 नंबर स्टॉप, गंगा नगर-श्याम नगर और राहुल नगर-2 जैसी परियोजनाओं का काम अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया है।



कुछ स्थानों पर भवनों का ढांचा तैयार हो चुका है, लेकिन पानी, बिजली, सड़क और सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाएं अभी तक विकसित नहीं की गई हैं। वहीं कुछ परियोजनाओं में निर्माण गतिविधियां लंबे समय से ठप बताई जा रही हैं।



नगर निगम का दावा: समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया जारी

पूरे मामले पर भोपाल की महापौर मालती राय का कहना है कि नागरिकों की समस्याओं को नियमित रूप से सुना जा रहा है और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।



महापौर के अनुसार, जिन आवासीय परियोजनाओं का निर्माण पूरा हो चुका है या विभिन्न चरणों में हैं, उनमें आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। साथ ही प्रत्येक परियोजना के लिए समयसीमा भी निर्धारित की गई है।



विपक्ष का आरोप: योजना के क्रियान्वयन पर उठे सवाल

विपक्ष ने आवास परियोजनाओं में हो रही देरी को लेकर सरकार को निशाने पर लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जेपी धनोतिया का आरोप है कि योजना का लाभ पात्र लोगों तक समय पर नहीं पहुंच पाया। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में लोग आज भी किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं और उन्हें अपने आवास का कब्जा नहीं मिला है। उन्होंने योजना के क्रियान्वयन में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए हैं।



घर का सपना कब होगा पूरा?

प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य कमजोर और मध्यम आय वर्ग के परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना था। लेकिन भोपाल की कई परियोजनाओं में निर्माण और आवंटन में हुई देरी ने हजारों परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।



अब हितग्राहियों की नजर इस बात पर टिकी है कि अधूरी परियोजनाएं कब पूरी होंगी और वर्षों से इंतजार कर रहे परिवारों को आखिर अपने घर की चाबी कब मिलेगी।



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