जिस पुलिस पर साइबर अपराध रोकने की जिम्मेदारी, उसी के सिस्टम पर साइबर अटैक! डेटा लॉक

Arohi Raj | Sootr Creatives | Oct 29, 2026, 10:00 IST
भोपाल पुलिस के CCTNS सिस्टम पर हमला हुआ है।
A case of a cyberattack on a secure police network has come to light. A computer at the Ayodhya Nagar police station in Bhopal was hit by ransomware, which resulted in the locking of all data and files stored on the machine.
पुलिस के सुरक्षित नेटवर्क में साइबर हमले का मामला सामने आया है। भोपाल के अयोध्या नगर थाने के एक कंप्यूटर पर रैंसमवेयर अटैक हुआ है। इसके बाद कंप्यूटर में मौजूद डेटा और फाइलें लॉक हो गईं। प्रदेश में किसी पुलिस थाने के सिस्टम पर ऐसा हमला पहली बार हुआ है। बताया जा रहा कि प्रभावित कंप्यूटर क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क सिस्टम (CCTNS) के मेन सर्वर से जुड़ा था।

खबरों के मुताबिक, यह मेन सर्वर से जुड़ा एक क्लाइंट सिस्टम था। कंप्यूटर की स्क्रीन पर डेटा लॉक होने का मैसेज दिखने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। हालांकि, पुलिस का मेन सर्वर सुरक्षित है। लेकिन कंप्यूटर की हार्ड डिस्क में मौजूद डेटा लॉक हो गया है। उसमें सेव फाइलें भी अब एन्क्रिप्ट हो चुकी हैं। यानी इन फाइलों को सामान्य तरीके से खोलना मुश्किल हो गया है।



क्या है CCTNS

इसे अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम कहते हैं। यह देशभर के पुलिस थानों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने वाली व्यवस्था है। इसके जरिए पुलिस अपराधों और अपराधियों से जुड़ा रिकॉर्ड कंप्यूटर पर रखती है। इसका उद्देश्य पुलिस के कामकाज को आसान और तेज बनाना है।



कैसे काम करता है सीसीटीएनएस

  • एफआईआर और पुलिस में दर्ज शिकायतों की जानकारी डिजिटल रूप में सुरक्षित रखना।
  • अपराध की जांच के दौरान जुटाई गई जानकारियों को सिस्टम में दर्ज करना।
  • चार्जशीट और जांच से जुड़े जरूरी कागजात का रिकॉर्ड संभालकर रखना।
  • अपराधियों की जानकारी डिजिटल सिस्टम के जरिए तलाशना।
  • अलग-अलग पुलिस थानों के बीच जरूरी सूचनाओं का आदान-प्रदान करना।
  • जांच और अदालत से जुड़े दस्तावेजों को व्यवस्थित तरीके से रखना।

क्या होता है रैंसमवेयर अटैक?

रैंसमवेयर साइबर हमले का एक तरीका है। इसमें हैकर कंप्यूटर की फाइलें लॉक कर देते हैं। लॉक करने के लिए डेटा को कोड में बदला जाता है। इस तकनीक को डाटा एन्क्रिप्ट कहते हैं। फाइल खोलने के लिए एक खास डिजिटल कुंजी (Digital Key) चाहिए।



साइबर जानकारों के मुताबिक, डेटा वापस पाना आसान नहीं होता है। कई बार डिक्रिप्शन के बिना फाइलें नहीं खुलतीं। इस मामले में असर सिर्फ प्रभावित कंप्यूटर की हार्ड डिस्क पर हुआ है। मेन सर्वर का डेटा सुरक्षित बताया गया है। ऐसे हमले से सरकारी दफ्तरों और पुलिस विभाग का कामकाज प्रभावित हो सकता है। खासकर तब, जब किसी जरूरी मामले की जानकारी उसी कंप्यूटर में रखी हो।



डिजिटल रिकॉर्ड पर क्यों उठे सवाल?

पुलिस अब कई जरूरी काम कंप्यूटर के जरिए करती है। एफआईआर (First Information Report) दर्ज करना इनमें शामिल है। अपराधों की जांच और गवाहों के बयान का रिकॉर्ड भी इसमें आता है। केस डायरी और कोर्ट की प्रक्रिया में भी डिजिटल रिकॉर्ड काम आता है। यह जानकारी आगे की जांच का आधार बनती है। यह घटना मध्य प्रदेश पुलिस के डिजिटल कामकाज पर सवाल उठाती है।



तकनीकी टीम ने कैसे बचाया सर्वर?

हमले की जानकारी मिलते ही तकनीकी टीम एक्टिव हो गई। एसीपी मनोज शाह ने यह जानकारी दी। एससीआरबी (राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो) की टीम ने सिस्टम को अलग किया। इस कदम का मकसद वायरस को दूसरे सिस्टम तक पहुंचने से रोकना था। अधिकारियों के अनुसार वायरस मेन डेटाबेस तक नहीं पहुंच सका। यानी हमले का असर एक ही कंप्यूटर तक सीमित रही।



भोपाल पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, थाने में रोजमर्रा का काम बंद नहीं हुआ। एफआईआर और रिकॉर्ड से संबंधित काम सामान्य रूप से जारी हैं। राहत की बात है कि आम लोगों के लिए थाने का काम नहीं रुका है।



नेटवर्क कटने से छूटे डिजिटल सुराग

हमले के बाद प्रभावित कंप्यूटर को नेटवर्क से अलग कर दिया गया। इससे हमलावर के सर्वर से उसका संपर्क टूट गया। इसके कारण जांच से जुड़े कुछ डिजिटल सुराग जुटाने में परेशानी हुई। कंप्यूटर पर दिखाई देने वाला फिरौती संदेश, बिटकॉइन वॉलेट की जानकारी और हमलावर के डिजिटल फुटप्रिंट्स रिकॉर्ड नहीं हो सके। ये जानकारियां साइबर हमले के तरीके और हमलावर तक पहुंचने में मदद कर सकती हैं।



ऐसे मामलों में डिजिटल सबूतों की अहम भूमिका होती है। लेकिन इस घटना में नेटवर्क संपर्क टूटने से कुछ जानकारियां दर्ज नहीं हो सकीं। इससे तकनीकी जांच का काम प्रभावित हो सकता है।



MP-SRT की टीम कर रही फॉरेंसिक जांच

इस मामले की जानकारी एमपी-एसआरटी को भी दी गई है। अब उपलब्ध डेटा के आधार पर तकनीकी टीम जांच कर रही है। इस जांच में कंप्यूटर पर हुए हमले और उससे जुड़े डिजिटल सबूतों की पड़ताल की जा रही है। एमपी-एसआरटी के ज्वाइंट डायरेक्टर वैभव श्रीवास्तव के मुताबिक, पुलिस से मिलने वाले डेटा के आधार पर फॉरेंसिक जांच की जा रही है।



फिलहाल मेन सर्वर सुरक्षित है और थाने में सामान्य कामकाज जारी है। दूसरी ओर, प्रभावित कंप्यूटर की हार्ड डिस्क में मौजूद फाइलों को लेकर चुनौती बनी हुई है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि लॉक हुए डेटा में कौन-सी जानकारियां थीं और उन्हें वापस हासिल किया जा सकता है या नहीं।



FAQs



  1. भोपाल में रैंसमवेयर अटैक कहां हुआ?
    यह हमला भोपाल के अयोध्या नगर थाने में CCTNS से जुड़े एक कंप्यूटर पर हुआ।
  2. रैंसमवेयर अटैक से कंप्यूटर पर क्या असर पड़ा?
    कंप्यूटर की हार्ड डिस्क में मौजूद डेटा और फाइलें एन्क्रिप्ट होकर लॉक हो गईं।
  3. क्या हमले के बाद थाने का कामकाज बंद हो गया?
    नहीं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एफआईआर और रिकॉर्ड से जुड़े रोजमर्रा के काम सामान्य रूप से जारी हैं।
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