भोपाल पुलिस ने e-FIR से हटा दिए आरोपियों के नाम, शिकायत से छेड़छाड़ करने पर हाईकोर्ट सख्त
News in short
- e-FIR में आरोपियों के नाम हटाने का आरोप
- हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगी स्टेटस रिपोर्ट
- बयान दर्ज करने की प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य
- अब तक धारा 161 CrPC के तहत बयान नहीं हुआ दर्ज
- DGP, DCP सहित पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी
Intro
एमपी पुलिस जिस e-FIR को जनता के लिए सुविधा बताने का दावा करती है, वही अब पुलिसिया मनमानी का उदाहरण बन रही है। भोपाल में e-FIR से आरोपियों के नाम हटाने के गंभीर आरोपों पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और याचिकाकर्ता के बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य कर दी है।
News in detail
E-FIR पर पुलिस ने की मनमानी कार्रवाई
जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी जताते हुए कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो सकती है। यह मामला e-FIR में कथित छेड़छाड़ और आरोपियों को बचाने से जुड़ा है, जिसे कोर्ट ने बेहद गंभीर माना है।
e-FIR में छेड़छाड़ का आरोप, आरोपियों के नाम गायब
डेंटिस्ट डॉ. अंजलि मिश्रा भोपाल की शंकराचार्य नगर कॉलोनी बाग सेवनिया में रहती हैं, उन्होंने अपनी ही कॉलोनी के पदाधिकारियों के खिलाफ e-FIR दर्ज की थी। लेकिन पुलिस ने कार्यवाही के दौरान उनकी शिकायत का मूल स्वरूप भी बदल दिया। इसके बाद डॉक्टर अंजलि ने याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उन्होंने e- fir में सभी आरोपियों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज किए थे। इसके बावजूद पुलिस ने आधिकारिक FIR दर्ज करते समय केवल चुनिंदा लोगों को ही आरोपी बनाया। याचिकाकर्ता का दावा है कि पुलिस ने मूल शिकायत के साथ छेड़छाड़ कर मामले को कमजोर करने और आरोपों को हल्का करने की कोशिश की।
बयान दर्ज करने में लापरवाही, कोर्ट ने जताई चिंता
सुनवाई के दौरान या याचिकाकर्ता कि ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद अली और अधिवक्ता अमित रायजादा ने कोर्ट को बताया कि घटना के काफी समय बाद भी पुलिस ने धारा 161 CrPC के तहत याचिकाकर्ता का बयान दर्ज नहीं किया है। इस पर अदालत ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह जांच प्रक्रिया की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है, जो न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ बयान दर्ज करने का आदेश
जस्टिस बी.पी. शर्मा की बेंच ने निर्देश दिया कि जब भी पुलिस याचिकाकर्ता का बयान दर्ज करे, पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए। कोर्ट का मानना है कि इससे भविष्य में किसी भी प्रकार के हेरफेर या विवाद की संभावना खत्म होगी और जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
DGP सहित पुलिस अधिकारियों को नोटिस, जवाब तलब
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने DGP, DCP, भोपाल एसपी सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह पूरे प्रकरण पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करे। अदालत ने साफ कहा कि जांच की निष्पक्षता बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
अगली सुनवाई तय, सरकार देगी रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 15 जून को निर्धारित की है। तब तक राज्य सरकार को अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होगी। यह मामला अब प्रदेश में पुलिस की कार्यप्रणाली और e-FIR सिस्टम की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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