इंस्पेक्टर की इस शर्मनाक हरकत से नाराज एमपी हाईकोर्ट, कहा- महिला की गरिमा से समझौता नहीं

Neel Tiwari | Mar 26, 2026, 10:19 IST
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भोपाल के डायल-100 कंट्रोल रूम में हुई एक चौंकाने वाली घटना पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। महिला कर्मचारी के चेहरे पर फूंक मारकर शराब जांच करने के तरीके को कोर्ट ने अपमानजनक बताया है।

News In Short

  • इंस्पेक्टर पर महिला कर्मचारी के चेहरे पर फूंक मारकर शराब जांच करने का आरोप है।
  • घटना भोपाल के डायल 100 कंट्रोल रूम की है।
  • CCTV फुटेज के आधार पर इंस्पेक्टर को बर्खास्त किया गया था।
  • सिंगल बेंच ने बर्खास्तगी रद्द की, अब डिवीजन बेंच ने रोक लगाई है।
  • हाईकोर्ट ने कहा - यह तरीका महिला की गरिमा के खिलाफ है।

News In Detail

भोपाल के डायल-100 कंट्रोल रूम में 30-31 अगस्त 2025 की रात एक बेहद आपत्तिजनक घटना सामने आई थी। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद इंस्पेक्टर राजेश कुमार त्रिपाठी ने एक महिला पुलिसकर्मी को ब्रेथ एनालाइजर की तरह इस्तेमाल किया था। पुरुष कर्मचारियों के शराब सेवन की जांच के लिए एक महिला कर्मचारी को खड़ा किया गया और सभी कर्मचारियों को उसके चेहरे पर फूंक मारने को कहा गया था।



इस अजीब और अपमानजनक तरीके से यह पता लगाने की कोशिश की गई कि कौन नशे में है। हालांकि यह मामला कभी प्रकाश में नहीं आ पाया लेकिन पुलिस ने इसमें गुपचुप जांच कर कार्रवाई भी कर दी थी।



CCTV फुटेज से खुली पोल, हुई कार्रवाई

इस पूरे घटनाक्रम का CCTV फुटेज सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया। हालांकि जिस जगह पर खड़े होकर महिला पुलिसकर्मी के चेहरे पर फूंक मारी जा रही थी वह सीसीटीवी का लगभग ब्लैक स्पॉट था, लेकिन दूसरे कैमरे से यह फुटेज कैद हो गया।



विभागीय दबाव में महिला पुलिसकर्मी ने इस मामले की शिकायत नहीं की थी। इसके बाद भी मामला सामने आने पर फुटेज के आधार पर 8 सितंबर 2025 को राज्य सरकार ने संबंधित इंस्पेक्टर को बर्खास्त कर दिया था।



सिंगल बेंच से मिली राहत, फिर सरकार पहुंची डिवीजन बेंच

बर्खास्तगी के खिलाफ कंट्रोल रूम के प्रभारी इंस्पेक्टर राजेश कुमार त्रिपाठी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद 19 फरवरी 2026 को सिंगल बेंच ने बिना विभागीय जांच के कार्रवाई को गलत मानते हुए बर्खास्तगी आदेश रद्द कर दिया था। बाद में राज्य सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच में अपील दायर की थी।



चीफ जस्टिस की बेंच में पेश किया गया सीसीटीवी फुटेज

डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान जब CCTV फुटेज पेश किया गया, तो कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी महिला के चेहरे पर फूंक मारकर नशे की जांच करना न केवल अनुचित है, बल्कि उसकी गरिमा के खिलाफ भी है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि कोविड के बाद इस तरह का व्यवहार बिल्कुल स्वीकार्य नहीं हो सकता।



सिंगल जज के आदेश पर रोक, नोटिस जारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही संबंधित इंस्पेक्टर को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा गया है। अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2026 को होगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।



यह मामला न केवल पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि पुलिस विभाग जैसे कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा को लेकर भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।



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