जनगणना ने खोला संपत्ति चोरी का पैटर्न, दो लाख संपत्तियों पर वसूली करेगी सरकार
पुराना भोपाल अपनी तंग व्यावसायिक गलियों और ऐतिहासिक इमारतों के लिए जाना जाता है। अब इन्हीं गलियों से एक बड़ा खुलासा सामने आया है। जानकारी के अनुसार यहां सालों से टैक्स चोरी का खेल चल रहा था। नगर निगम के अफसर खुद इस खुलासे से हैरान हैं।
जनगणना के तहत हुए हाउस लिस्टिंग सर्वे ने इस राज से पर्दा उठाया है। बताया जा रहा है कि पुराने भोपाल के कई इलाके दशकों से निगम की फाइलों से पूरी तरह गायब थे। सर्वे के बाद ये इलाके अचानक संपत्ति कर के दायरे में आ गए।
केवल तीन महीनों में पूरे शहर में एक लाख 82 हजार नई संपत्तियां सामने आईं। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा पुराने भोपाल का ही है। ये संपत्तियां सीवेज, पानी और सड़क जैसी सुविधाओं का पूरा फायदा उठा रही थीं, लेकिन सरकारी खजाने में इनका योगदान शून्य था।
जोन 5 में सबसे बड़ी बढ़त
बता दें कि सबसे बड़ा बदलाव पुराने भोपाल के जोन 5 में दर्ज हुआ। इसमें शाहजहानाबाद, रॉयल्टी मार्केट, लाल बहादुर शास्त्री वार्ड और मोती मस्जिद के आसपास का इलाका शामिल है।
मार्च 2025 तक यहां सिर्फ 16 हजार 795 संपत्तियां टैक्स के दायरे में थीं। सर्वे के बाद यह आंकड़ा बढ़कर करीब 39 हजार तक पहुंच गया। यह 132% की भारी बढ़ोतरी है।
हालांकि निगम अभी इन्हें दर्ज चूल्हों की संख्या बता रहा है। इसका मतलब है कि अंतिम आंकड़े आगे और बदल सकते हैं।
तंग गलियों में अवैध निर्माण
पुराने शहर का व्यापारिक गढ़ माना जाने वाला जोन 4 भी पीछे नहीं रहा है। इसमें जेपी नगर, इब्राहिम गंज, मोतीलाल नेहरू वार्ड और राम मंदिर क्षेत्र आते हैं। यहां 65.95% की बढ़त देखी गई और 11 हजार नए खाते सामने आए।
अधिकारियों का मानना है कि इन कमर्शियल इलाकों में कई मंजिला इमारतें तंग गलियों में बिना परमिशन खड़ी कर ली गईं।
निगम को इसकी जानकारी तक नहीं थी। जोन 2 के कोहेफिजा और ईदगाह हिल्स के पुराने हिस्सों में भी 60% तक बढ़ोतरी हुई है।
नए भोपाल में स्थिति अलग
नए भोपाल की तस्वीर पुराने शहर से काफी अलग है। कोलार और दानिश कुंज वाले जोन 18 में सिर्फ 7% की बढ़त हुई। मिसरोद और बागसेवनिया वाले जोन 13 में यह आंकड़ा 16% रहा।
इसकी वजह साफ है। इन इलाकों में संपत्तियां नई गाइडलाइन और टीएंडसीपी के नियमों के तहत पहले से दर्ज थीं। पुराने भोपाल में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी।
दो तरह की गड़बड़ियां मिलीं
सर्वे के दौरान दो तरह की गड़बड़ियां सामने आईं। कई जगह एक मंजिला मकान की परमिशन थी, लेकिन वहां तीन मंजिला मकान बना दिया गया। वहीं कई मकानों के खाते अब तक खुले ही नहीं थे।
अब निगम इन सभी का नए सिरे से सर्वे कर रहा है। हर खाते को अपडेट करने का काम चल रहा है।
अब क्या होगा एक्शन
निगम ने फिलहाल लोगों को एक मौका देने का फैसला किया है। अब तक सात हजार से ज्यादा नए खाते खुल चुके हैं। सभी को 31 अगस्त तक अपना संपत्ति कर खाता खुलवाने का समय दिया गया है।
भोपाल नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने इस पर साफ चेतावनी दी है। अगर तय समय के बाद भी लोग खुद खाता नहीं खुलवाते, तो ऐसी प्रॉपर्टी चिह्नित की जाएगी। इसके बाद मूल्यांकन कर रजिस्ट्री की तारीख से 5 गुना पेनल्टी लगाई जाएगी।
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