भोपाल के होटल रेडिसन पर लगा जुर्माना, 60 रुपए की पानी की बोतल के वसूले थे 175

Aman Vaishnav | Jun 25, 2026, 09:34 IST
भोपाल के होटल रेडिसन पर लगा जुर्माना
भोपाल के होटल रेडिसन में 60 रुपए की पानी की बोतल पर अलग से जीएसटी वसूलना महंगा पड़ गया। उपभोक्ता आयोग ने होटल पर जुर्माना लगाते हुए पैसे लौटाने के आदेश दिए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • भोपाल के होटल रेडिसन में पानी की बोतल पर ज्यादा कीमत वसूली गई थी।
  • बोतल पर एमआरपी 60 रुपए थी, पर बिल में 175 रुपए जोड़े गए।
  • ग्राहक हुकुम सिंह ठाकुर ने इसका विरोध किया था।
  • मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा और जून 2026 में फैसला आया।
  • आयोग ने माना कि कीमत वसूलना सही है, लेकिन अलग से जीएसटी लेना गलत है।

घटना कब और कैसे हुई

दरअसल यह घटना अप्रैल 2022 की है। भोपाल के रायसेन रोड पर रहने वाले हुकुम सिंह ठाकुर अपने चार साथियों के साथ होटल रेडिसन गए थे। वे बुफे डिनर के लिए वहां पहुंचे थे।



खाने के दौरान उन्होंने मिनरल वॉटर की एक बोतल मंगाई। बोतल पर एमआरपी साफ-साफ 60 रुपए लिखी थी। लेकिन बिल में इस बोतल के 175 रुपए जोड़ दिए गए।



जब पूरा बिल आया तो राशि 6 हजार 809.88 रुपए थी। हुकुम सिंह को पानी की बोतल की कीमत देखकर आपत्ति हुई। उन्होंने तुरंत होटल स्टाफ से इसकी शिकायत की।



होटल प्रबंधन ने राशि वापस करने से इनकार कर दिया। बात बढ़ी तो दोनों पक्षों में बहस हो गई। आखिरकार हुकुम सिंह ने उपभोक्ता आयोग का रुख किया।



होटल ने क्या तर्क दिया

होटल प्रबंधन ने आयोग के सामने अपना पक्ष रखा। उनका कहना था कि होटल और रेस्टोरेंट में बिकने वाली चीजें सिर्फ प्रोडक्ट नहीं होती हैं।



इनके साथ एयर कंडीशनिंग, बैठने की सुविधा, लाउंज और संगीत जैसी सेवाएं भी मिलती हैं। इसलिए मेन्यू कार्ड में लिखी कीमत ही लागू होती है बोतल पर छपी एमआरपी नहीं।



होटल ने यह भी कहा कि एमआरपी सिर्फ रिटेल दुकानों के लिए तय होती है। होटल के अंदर परोसी जाने वाली चीजों पर यह नियम लागू नहीं होता है। साथ ही मेन्यू में पहले से लिखा था कि जीएसटी अलग से लगेगा।



आयोग का फैसला क्या रहा

जिला उपभोक्ता आयोग (विवाद प्रतितोषण) ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला भी दिया।



आयोग ने माना कि होटल जैसी जगहों पर एमआरपी से ज्यादा कीमत लेना अपने आप में गलत नहीं है। इसे सेवा में कमी भी नहीं माना जा सकता है।



लेकिन आयोग ने एक अहम बात भी कही थी। आयोग के मुताबिक 175 रुपए की तय कीमत में जीएसटी पहले से शामिल मानी जाएगी। इसी कीमत पर अलग से 18 प्रतिशत जीएसटी जोड़ना गलत है।



कितना मुआवजा मिलेगा

आयोग ने होटल को साफ निर्देश दिए हैं। होटल को अतिरिक्त वसूले गए 10.80 रुपए वापस करने होंगे।



इसके अलावा होटल को मानसिक प्रताड़ना के लिए पांच हजार रुपए और वाद व्यय के लिए तीन हजार रुपए चुकाने होंगे। तय समय में भुगतान न होने पर होटल को 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।



शिकायतकर्ता और वकील की बात

हुकुम सिंह ठाकुर का कहना है कि आपत्ति जताने पर होटल स्टाफ ने उनसे बहस की। उनके मुताबिक स्टाफ का व्यवहार अभद्र था।



हुकुम सिंह का यह भी कहना है कि आयोग से उन्हें आंशिक राहत ही मिली है। एमआरपी से ज्यादा कीमत वसूले जाने के मुद्दे पर फैसला उनके पक्ष में नहीं आया।



शिकायतकर्ता के वकील शशिकांत वर्मा ने इस फैसले को अहम बताया। उनका कहना है कि यह मामला सिर्फ 10.80 रुपए का नहीं है। वर्मा के मुताबिक होटल और रेस्टोरेंट अक्सर सुविधाओं के नाम पर ऊंची कीमतें वसूलते हैं। उनका कहना है कि यह फैसला उपभोक्ताओं को हक के लिए लड़ने का हौसला देता है।



ग्राहकों के लिए सीख

इस फैसले से होटल जाने वाले ग्राहकों को एक साफ सीख मिलती है। होटल मेन्यू कार्ड में लिखी कीमत वसूल सकते हैं, चाहे वह एमआरपी से ज्यादा ही क्यों न हो।



लेकिन उस कीमत पर अलग से जीएसटी जोड़ना गलत है, क्योंकि कीमत में टैक्स पहले से शामिल माना जाता है। ग्राहकों को बिल ध्यान से जांचना चाहिए और गड़बड़ी होने पर शिकायत करने से नहीं हिचकना चाहिए।



ये खबरें भी पढ़िए...

10 रुपए की पानी की बोटल छात्रा को ढाई लाख की पड़ी, एक सिंगल क्लिक से हुआ ये खेल



गूगल मैप की गलती से थमा गांव का विकास, नहीं बन रहे सरकारी कागज



एमपी न्यूज: दामाद ने सास से की शादी, लंबे समय से चल रहा था चक्कर, वीडियो बनाकर कहा...



मध्यप्रदेश न्यूज: अजब प्रेम की गजब कहानी, कोर्ट में चुना प्रेमी, बाहर आते ही पति संग पत्नी फरार





Tags:
  • एमपी न्यूज
  • मध्यप्रदेश न्यूज
  • भोपाल
  • पानी की बोतल
  • जिला उपभोक्ता आयोग
  • मिनरल वॉटर