भोपाल में स्कूलों की लापरवाही से अटकी हजारों बच्चों की छात्रवृत्ति, मान्यता रद्द होने का खतरा

Aman Vaishnav | Apr 11, 2026, 08:12 IST
bhopal school scholarship delay action against private schools
भोपाल के निजी स्कूलों की लापरवाही से हजारों छात्रों की करोड़ों की छात्रवृत्ति अटक गई है। अधिकारियों का कहना है कि तुरंत प्रक्रिया पूरी करनी होगी नहीं तो स्कूलों की मान्यता भी रद्द की जा सकती है।

News In Short

  • भोपाल के 200 निजी स्कूलों को शिक्षा विभाग ने थमाया नोटिस।
  • करीब 10 हजार से ज्यादा छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिल पाई है।
  • पोर्टल पर प्रोफाइल अपडेट न करने से छात्रवृत्ति राशि रुकी हुई है।
  • स्कॉलरशिप प्रदर्शन में शहर 45वें नंबर पर आया है।
  • लापरवाही जारी रही तो स्कूलों की मान्यता भी रद्द हो सकती है।

News In Detail

भोपाल के लगभग 200 निजी स्कूलों से एक बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। इन स्कूलों की वजह से 10 हजार से ज्यादा बच्चों की समग्र छात्रवृत्ति की राशि अटक गई है।



हैरानी की बात है कि ये राशि लगभग तीन करोड़ रुपए है, जो गरीब परिवारों के बच्चों की पढ़ाई पर असर डाल सकती है। इस मामले को गंभीर मानते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने अब इन स्कूलों को नोटिस भेजा है।



प्रदर्शन के मामले में पिछड़ा भोपाल

विभाग के मुताबिक कई स्कूलों ने MPTAAS Scholarship Portal पर छात्रों की प्रोफाइल अपडेट नहीं की गई। साथ ही प्रोफाइल लॉक और स्वीकृति की प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई।



वहीं, जिन छात्रों का भुगतान नहीं हो पाया उनके बैंक खातों की जानकारी भी अपडेट नहीं की गई। कई स्कूलों ने तो वन टाइम रजिस्ट्रेशन तक नहीं कराया।



अफसरों का कहना है कि प्रदर्शन के हिसाब से भोपाल प्रदेश में 45वें नंबर पर है जो कि इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर जैसे शहरों से भी पीछे है।



छात्रों के लिए चल रही कई सारी योजनाएं

समग्र छात्रवृत्ति योजना के तहत अलग-अलग तरह के छात्रों के लिए कई योजनाएं चल रही हैं। इनमें जनरल पुअर क्लास स्कॉलरशिप, सुदामा प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप दी जाती है।



दिवंगत या दिव्यांग सरकारी कर्मचारियों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति, मेधावी लड़कियों के लिए स्कॉलरशिप और इकलौती बेटी के लिए शिक्षा प्रोत्साहन योजना शामिल हैं।



इसके अलावा अजा-अजजा, पिछड़ा वर्ग और घुमंतू जनजातियों के बच्चों के लिए भी अलग-अलग छात्रवृत्तियां दी जाती हैं। इन योजनाओं की राशि दो से चार हजार रुपए सालाना है। नोडल ऑफिसर और प्राचार्य अभिषेक बैस ने बताया कि संबंधित स्कूलों को इस बारे में निर्देश दिए गए हैं।



मान्यता रद्द होने का खतरा

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