भोपाल में बड़ा फर्जीवाड़ा: एक चेहरे से जारी हुए 200 सिम, AI सिस्टम ने पकड़ा पूरा खेल
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सिम कार्ड फर्जीवाड़ा का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। जांच में पता चला है कि एक ही व्यक्ति के चेहरे का इस्तेमाल करके करीब 200 नकलीमोबाइल सिम कार्ड जारी कर दिए गए। यह फर्जीवाड़ा अलग-अलग पहचान पत्रों के जरिए किया गया और इसमें तकनीक का दुरुपयोग कर फेस वेरिफिकेशन प्रक्रिया को भी धोखा दिया गया।
नियमों के मुताबिक किसी भी व्यक्ति के नाम और पहचान पत्र पर अधिकतम 9 मोबाइल सिम कार्ड ही जारी किए जा सकते हैं। लेकिन इस मामले में यह सीमा कई गुना पार कर दी गई। मामला सामने आने के बाद राज्य की साइबर पुलिस और दूरसंचार विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा संभावित खतरा मानकर जांच शुरू कर दी गई है।
कैसे हुआ सिम कार्ड फर्जीवाड़ा
जांच में सामने आया कि भोपाल के कई पीओएस (Point of Sale) एजेंटों की मदद से यह फर्जीवाड़ा किया गया। सिम कार्ड जारी करने के दौरान फेस वेरिफिकेशन सिस्टम को धोखा देने के लिए तकनीकी छेड़छाड़ की गई।
- इस्तेमाल की गई तकनीक
- वीडियो एडिटिंग तकनीक
- फोटो एडिटिंग और फिल्टर
- दाढ़ी और बालों की शैली में बदलाव
- अलग-अलग पहचान पत्रों का उपयोग
इन तकनीकों की मदद से एक ही चेहरे को अलग-अलग व्यक्तियों की तरह दिखाया गया और उसी आधार पर नकली सिम कार्डजारी कर दिए गए। यह पूरी प्रक्रिया इतनी व्यवस्थित तरीके से की गई कि शुरुआती स्तर पर किसी को भी इसकी भनक नहीं लगी।
AI आधारित निगरानी सिस्टम से खुला मामला
यह मामला तब सामने आया जब दूरसंचार विभाग के दिल्ली स्थित AI आधारित निगरानी सिस्टम ने सिम कार्ड जारी करने के पैटर्न में असामान्य गतिविधि को पहचाना। AI सिस्टम ने देखा कि अलग-अलग पहचान पत्रों के बावजूद चेहरे की संरचना एक जैसी है। फेस वेरिफिकेशन डेटा में समानता दिखाई दे रही है। कई सिम एक ही चेहरे से जुड़े हैं। AI ने इस पैटर्न को संदिग्ध गतिविधि के रूप में चिन्हित किया और इसकी जानकारी संबंधित एजेंसियों को भेज दी। इसके बाद जांच शुरू हुई और पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
‘ऑपरेशन फेस’ के तहत जांच
MP साइबर पुलिस मुख्यालय ने इस मामले की जांच के लिए “ऑपरेशन फेस” नाम से विशेष अभियान शुरू किया है।
जांच की प्रमुख दिशाएं
- भोपाल के सभी पीओएस एजेंटों की जांच
- संदिग्ध सिम कार्डों की पहचान
- फर्जी दस्तावेजों की जांच
- फेस वेरिफिकेशन डेटा का विश्लेषण
राज्य साइबर मुख्यालय के आईजी शियास मजीद के अनुसार इस मामले की गहन जांच की जा रही है। प्रारंभिक अनुमान है कि इस नेटवर्क के जरिए प्रदेश में एक लाख से अधिक मोबाइल सिम सक्रिय हो सकते हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी आशंका
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन सिम कार्डों का उपयोग कहीं साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी कॉल सेंटर संचालन, डिजिटल बैंकिंग धोखाधड़ी या आतंकी गतिविधियों में तो नहीं किया गया। अगर इन सिम कार्डों का उपयोग अपराधों में हुआ है तो यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
सिम कार्ड जारी करने के नियम
- एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 9 सिम कार्ड जारी हो सकते हैं
- सिम जारी करते समय KYC अनिवार्य है
- फेस वेरिफिकेशन और आधार आधारित प्रमाणीकरण किया जाता है
- पीओएस एजेंट को पूरी प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड रखना होता है
- इन नियमों का उद्देश्य फर्जी सिम कार्ड के जरिए होने वाले अपराधों को रोकना है।
- आप भी कर सकते हैं अपने नाम पर जारी सिम की जांच
यदि आपको संदेह है कि आपके नाम या पहचान पत्र का दुरुपयोग करके सिम कार्ड जारी किए गए हैं, तो आप खुद इसकी जांच कर सकते हैं।सरकार ने इसके लिए ‘संचार साथी’ पोर्टल शुरू किया है।
जांच करने की प्रक्रिया
- वेबसाइट पर जाएं – https://tafcop.sancharsaathi.gov.in
- अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें
- OTP के जरिए लॉगिन करें
- आपके नाम पर जारी सभी मोबाइल नंबरों की सूची दिखाई देगी
यदि कोई नंबर आपका नहीं है तो उसे रिपोर्ट कर ब्लॉक कराया जा सकता है।
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