चीनी खरीदने पर लिमिट, अब 5-10 kg से ज्यादा नहीं मिलेगी शक्कर, थोक भाव के गिरे दाम
समझें क्या है पूरा मामला...
- शक्कर के दाम बढ़ने से बाजार में हलचल मची हुई है।
- कई बड़े स्टोर और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने शक्कर की खरीद सीमित कर दी है।
- चाय-कॉफी सेंटरों ने भी अपने दाम बढ़ा दिए हैं।
- थोक बाजार में हालांकि शक्कर की कमी नहीं है।
- व्यापारी महासंघ ने कम कीमत पर बिक्री की जांच की मांग की है।
बाजार में सीमित बिक्री शुरू
भोपाल के बाजार में शक्कर के दाम अचानक बढ़ गए हैं। इसका असर सीधे ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है। शहर के कई बड़े रिटेल स्टोर अब एक बार में सीमित शक्कर दे रहे हैं। कहीं यह सीमा 5 किलो है तो कहीं 10 किलो तय की गई है।
ऑनलाइन किराना प्लेटफॉर्म पर भी यही स्थिति देखी जा रही है। ग्राहक तय मात्रा से ज्यादा शक्कर नहीं खरीद पा रहे। इससे लोगों में आगे कमी की आशंका बढ़ गई है। कई परिवार जरूरत से ज्यादा शक्कर स्टोर करने की कोशिश में हैं।
चाय-कॉफी की कीमतें बढ़ीं
शक्कर महंगी होने का असर चाय-कॉफी सेंटरों पर भी पड़ा है। कई कैफेटेरिया ने अपने रेट बढ़ा दिए हैं। कुछ जगह चाय-कॉफी की कीमत में लगभग 20% तक इजाफा हुआ है। रोजाना चाय पीने वालों को अब ज्यादा दाम चुकाने पड़ रहे हैं।
मिठाई और बेकरी कारोबार पर भी असर साफ दिख रहा है। शक्कर की लागत बढ़ने से उत्पादन खर्च बढ़ गया है। इसका सीधा असर इन उत्पादों की कीमत पर पड़ सकता है। आने वाले त्योहारी सीजन में यह असर और बढ़ सकता है।
थोक बाजार में राहत की खबर
रिटेल बाजार में मची हलचल के उलट थोक बाजार से राहत की खबर है। थोक व्यापारी गोपाल बाहेती के मुताबिक शक्कर का स्टॉक फिलहाल कम नहीं हुआ है। पिछले दिनों की तुलना में थोक कीमत में करीब 2 रुपए प्रति किलो की गिरावट भी दर्ज हुई है।
बाहेती का कहना है कि मौजूदा हालात को स्टॉक की कमी से जोड़ना जल्दबाजी होगी। उनके मुताबिक बाजार में शक्कर की उपलब्धता बनी हुई है।
थोक भाव में आई गिरावट भी इसी बात का संकेत है। इससे साफ है कि रिटेल में सीमा और असली कमी अलग-अलग बातें हैं।
रोज हो रही 2 हजार क्विंटल खपत
बाहेती के अनुसार भोपाल में हर दिन लगभग 2 हजार क्विंटल यानी 2 लाख किलो शक्कर की खपत होती है। इसमें घर, होटल, रेस्तरां, कैफेटेरिया, मिठाई दुकानें और बेकरी शामिल हैं। भाव बढ़ने पर सबसे पहला असर चाय-कॉफी और मिठाई कारोबार पर पड़ता है।
कई छोटे कारोबारियों के लिए यह बढ़ोतरी बड़ी चुनौती बन गई है। लागत बढ़ने से उन्हें अपने उत्पादों के दाम भी बढ़ाने पड़ रहे हैं। इसका सीधा बोझ आखिरकार ग्राहकों पर ही आता है।
जांच की मांग उठी
भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू ने बड़े रिटेल और ऑनलाइन कंपनियों पर सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक कुछ कंपनियां बाजार भाव से कम कीमत पर शक्कर बेच रही हैं। उन्होंने इनके स्टॉक, खरीद स्रोत और लागत की जांच की मांग की है।
साहू का कहना है कि अगर यह किसी प्रमोशनल रणनीति का हिस्सा है तो इसकी जानकारी पारदर्शी होनी चाहिए। इससे उपभोक्ताओं और छोटे किराना व्यापारियों दोनों के हित सुरक्षित रहेंगे। उनकी मांग है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले।
कहां-कहां दिख रहा असर
शक्कर के बढ़ते दाम का असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग तरह से दिख रहा है।
घरेलू बाजार में सीमित खरीद से उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ी है। चाय-कॉफी कारोबार में लागत बढ़ने से कीमतें ऊपर गई हैं। मिठाई और बेकरी क्षेत्र में उत्पादन खर्च बढ़ गया है। वहीं थोक बाजार में स्टॉक पर्याप्त है और भाव में हल्की नरमी भी आई है।
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