UCC के खिलाफ भोपाल में महिलाएं संभालेंगी मोर्चा, पूरे प्रदेश में होगा विरोध

Sanjay Dhiman | Aug 10, 2026, 17:03 IST
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भोपाल में UCC के खिलाफ 16 से ज्ञापन अभियान शुरू होगा। महिलाएं अगुवाई करेंगी। आरिफ मसूद और मुफ्ती जुनैद ने सरकार पर सवाल उठाए। कानूनी लड़ाई की भी तैयारी।

भोपाल में UCC के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने सरकार पर संविधान से खिलवाड़ का आरोप लगाया। 16 से 20 तारीख तक हर जिले में ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस अभियान की अगुवाई महिलाएं करेंगी।



सरकार पर सीधा निशाना

भोपाल में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद, इंदौर से आए मुफ्ती जुनैद और भोपाल के मौलाना माज ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की। तीनों ने मिलकर यूसीसी (UCC – Uniform Civil Code) के खिलाफ अपनी बात रखी।



आरिफ मसूद ने कहा कि हाल ही में लाया गया बिल सिर्फ मुसलमानों को नहीं छूता। उनके मुताबिक यह पूरे संविधान का मजाक उड़ाता है। उन्होंने इसे मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया।



मसूद ने संविधान के आर्टिकल 25 का हवाला दिया। यह अनुच्छेद हर धर्म को अपनी परंपरा मानने की आजादी देता है। उनका कहना था कि नया कानून इसी आजादी को कमजोर करेगा।



उन्होंने चेतावनी भी दी। उनके अनुसार अभी असर सिर्फ मुसलमानों पर दिख रहा है। आने वाले समय में बाकी समुदायों को भी नुकसान झेलना पड़ सकता है।



विधानसभा में मांग खारिज

मसूद ने बताया कि उन्होंने विधानसभा में संशोधन प्रस्ताव रखा था। उनकी मांग थी कि मामला प्रवर समिति यानी सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाए। इससे विषय पर गहराई से चर्चा हो सकती थी।



लेकिन सरकार ने यह मांग नहीं मानी। मसूद के मुताबिक सरकार अपने रुख पर अड़ी रही। उन्होंने कहा कि ऐसे में जनता तक बात पहुंचाना जरूरी हो जाता है।



16 से शुरू होगा ज्ञापन अभियान

अभियान दो चरणों में चलेगा। पहला चरण 16 से 20 तारीख तक चलेगा। इस दौरान हर जिले में राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे।



हर जिले के प्रतिनिधिमंडल में सिर्फ 21 लोग शामिल होंगे। इनमें से 15 से 17 सदस्य महिलाएं और युवा होंगे। यह टीम कलेक्टर से मिलकर अपनी बात रखेगी।



दूसरा चरण जन-संवाद का होगा। हर जिले में डायलॉग सेंटर बनाए जाएंगे। यहां दूसरे समुदायों के प्रमुख लोगों को बुलाया जाएगा। उन्हें कानून के संभावित खतरों के बारे में बताया जाएगा।



कानूनी मोर्चे पर भी तैयारी

आरिफ मसूद ने साफ किया कि कानूनी कार्रवाई की तैयारी भी पूरी है। वकीलों की टीम पहले से सक्रिय है। उन्होंने बताया कि यह लड़ाई किसी एक संगठन तक सीमित नहीं रहेगी।



इसमें ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड शामिल होगा। जमीयत उलेमा-ए-हिंद भी साथ आएगी। साथ ही कई अन्य सामाजिक और धार्मिक संगठन भी जुड़ेंगे।



वंचितों के लिए नया मंच

मुफ्ती जुनैद ने भी अपनी बात रखी। उनके मुताबिक कॉमन सिविल कोड जैसे कानूनों में गरीब वर्गों का ध्यान नहीं रखा गया। उन्होंने बेरोजगारी, ओबीसी (OBC – Other Backward Classes) आरक्षण और आदिवासी मुद्दों का जिक्र किया।



उन्होंने महिलाओं के गायब होने के मसले पर भी चिंता जताई। इसी क्रम में उन्होंने एक नए मंच का ऐलान किया। इसका नाम 'राइट ऑफ द अनहर्ड' रखा गया है।



उनके अनुसार यह मंच संवैधानिक दायरे में काम करेगा। इसका मकसद वंचित वर्गों की आवाज सरकार तक पहुंचाना है। जुनैद ने कहा कि यह पहल राज्य स्तर पर जल्द शुरू होगी।



आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है। सरकार का आधिकारिक जवाब अभी सामने नहीं आया है। स्थिति पर आगे भी नजर बनी रहेगी।



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