NGT की रोक फिर भी यूका की जमीन पर प्लॉटिंग की तैयारी, किसके इशारे पर हो रहा कब्जा

Sanjay Sharma | Jul 23, 2026, 19:02 IST
Photograph: (THESOOTR)
NGT के संज्ञान के बाद भी भोपाल में यूनियन कार्बाइड के जहरीले तालाबों को प्राइवेट बिल्डर 5 महीने से ध्वस्त कर रहा है। एक तरफ HC में सफाई का हलफनामा, दूसरी तरफ उसी जमीन पर प्लाटिंग की तैयारी।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...

  • यूनियन कार्बाइड के जहरीले तालाबों में हो रही फिलिंग।
  • कलेक्टर, गैस राहत, MPPCB से शिकायत बेअसर।
  • एक तरफ हाईकोर्ट में हलफनामा, दूसरी तरफ प्लॉटिंग की कोशिश।
  • यूका की जमीन पर खुलेआम कब्जे को किया जा रहा नजरअंदाज।
  • एनजीटी के निर्देश और आवासीय उपयोग पर पाबंदी की भी अनदेखी।

BHOPAL.गैस त्रासदी के 40 साल बाद भी यूनियन कार्बाइड ( Union Carbide ) फैक्ट्री की जहरीली विरासत खत्म होने का नाम नहीं ले रही। फैक्ट्री के पीछे बने सोलर इवेपोरेशन पॉन्ड्स यानी SEP को एक प्राइवेट बिल्डर द्वारा पिछले 5 महीने से लगातार ध्वस्त किया जा रहा है।



राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के संज्ञान के बावजूद यह काम नहीं रुका। गैस पीड़ित संगठन मार्च 2026 से भोपाल कलेक्टर, गैस राहत एवं पुनर्वास आयुक्त और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को लगातार फोटो और वीडियो भेज रहे हैं।



इसके बावजूद प्रशासन कार्रवाई नहीं कर रहा है। शिकायतकर्ताओं को यूका की जमीन पर राजनीतिक संरक्षण में कब्जा जमाने की साजिश का अंदेशा है।



NGT


विभाग का हलफनामा झूठा

एक तरफ गैस राहत विभाग ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में हलफनामा देकर कहा है कि SEP में भरे जहरीले कचरे के आकलन और सफाई के लिए कंपनी चुनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वहीं दूसरी तरफ उसी जमीन पर मशीनें चलाकर मिट्टी डाली जा रही है और प्लाट काटे जा रहे हैं।



NGT (2)


प्लॉटिंग बढ़ाएगी भूजल प्रदूषण

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इन तालाबों में हेप्टाक्लोर जैसे कैंसरकारक रसायन हैं। इन्हें पाट देने से भूजल प्रदूषण और बढ़ेगा। आसपास की बस्तियों में रहने वाले हजारों लोगों की सेहत सीधे खतरे में है।



पीड़ित संगठन अब NGT में अवमानना याचिका और आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। उनकी मांग है कि काम तुरंत रोका जाए, दोषियों पर FIR हो और NGT की निगरानी में सफाई हो।



सफाई का वादा,जमीन पर कब्जा

हाईकोर्ट में गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग ने हलफनामा देकर कहा था कि यूनियन कार्बाइड की जमीन की सफाई और SEP में भरे जहरीले रसायनों के ट्रीटमेंट के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।



विभाग ने वैज्ञानिक तरीके से कचरे का निपटारा करने का दावा किया था, लेकिन हकीकत इसके उलट है। हलफनामे के महीनों बाद भी न तो कोई कंपनी मैदान में उतरी, न ही सफाई शुरू हुई। इसके बजाय उसी जमीन पर JCB से तालाब पाटे जा रहे हैं और प्लाटिंग की तैयारी है।



FAQ

  1. SEP यानी सोलर इवेपोरेशन पॉन्ड क्या है और यह खतरनाक क्यों है?
    SEP यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के जहरीले रसायनों को डालने के लिए बनाए गए तालाब हैं। इनमें हेप्टाक्लोर, HCH जैसे कैंसरकारक तत्व हैं। इन्हें पाटने से जहर जमीन में जाएगा और भूजल दूषित होगा।
  2. सरकार एक तरफ सफाई की बात और दूसरी तरफ कब्जा क्यों होने दे रही है?
    गैस राहत विभाग ने HC में कहा है कि सफाई के लिए कंपनी चुनी जा रही है। लेकिन जमीनी स्तर पर तालाब पाटे जा रहे हैं। पीड़ित संगठन इसे प्रशासन की उदासीनता और राजनैतिक संरक्षण मानते हैं।
  3. पीड़ित संगठन अब क्या करेंगे?
    संगठनों ने 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है। मांग पूरी न होने पर वे NGT में अवमानना याचिका दायर करेंगे और भोपाल में बड़ा आंदोलन करेंगे।

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