भोपाल के कई इलाकों का पानी जहरीला, महापौर मालती राय बोली-लोगों को RO की जरूरत नहीं
समझें क्या है पूरा मामला...
- भोपाल नगर निगम शहर के अलग-अलग हिस्सों से पानी के 20 हजार 236 सैंपल जांचे हैं।
- सैंपलों में से लगभग आधे यानी नौ हजार 311 पानी के नमूने झुग्गीबस्ती वाले इलाकों से लिए गए थे।
- शहर के चार बड़े और प्रमुख इलाकों के पानी में खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला है।
- इस दौरान पांच हजार 573 पाइप लाइनों के लीकेज को सुधारने का काम किया है।
- मई महीने में ही सीएम और मेयर हेल्पलाइन पर गंदे पानी की 83 शिकायतें आई हैं।
भोपाल के लोगों को RO की जरूरत नहीं
मध्य प्रदेश विधानसभा के सामने नगर निगम के फिल्टर प्लांट का मंगलवार, 26 मई को भोपाल महापौर मालती राय ने निरीक्षण किया था। इस दौरान बड़ा तालाब से आए पानी को फिल्टर प्लांट में कैसे साफ किया जाता है? इसकी पूरी प्रक्रिया भी देखी। महापौर राय ने पानी की लेबोटरी में टेस्टिंग भी कराई। फिर इसे क्लीन चिट भी दी।
मालती राय ने कहा कि यहां पर बड़ा तालाब से रॉ वाटर आता है। इसे शुद्ध करके कई इलाकों में सप्लाई करते हैं। फिर भी शिकायत थी कि बड़ा तालाब से आधी आबादी को पानी पिलाता है, जो गंदा होता है।
इसलिए आज पूरा सिस्टम देखा। इसके बाद कह सकती हूं कि जिन इलाकों में बड़ा तालाब का पानी मिल रहा है, वहां रहने वाले लोगों को RO लगाने की जरूरत नहीं है। यहां से शुद्ध पानी दिया जा रहा है।
लैब रिपोर्ट ने खोली इन दावों की पोल
वहीं दूसरी ओर राजधानी भोपाल से एक डराने वाली हकीकत सामने आई है। एक तरफ नगर सरकार शहर में RO जैसा साफ पानी सप्लाई करने के दावे कर रही हैं। वहीं दूसरी तरफ नगर निगम की अपनी ही सरकारी लैब की रिपोर्ट ने इन दावों की पोल खोलकर रख दी है।
भोपाल नगर निगम की टेस्टिंग लैब में शहर के अलग-अलग इलाकों से पानी के कुल 20 हजार 236 सैंपल लेकर जांच की गई थी। इस जांच की जो रिपोर्ट आई है, उसने अधिकारियों से लेकर आम जनता तक के होश उड़ा दिए हैं।
झुग्गी बस्तियों में हालात सबसे ज्यादा खराब
इस पूरी जांच में सबसे ज्यादा चिंताजनक गरीब और मजदूर वर्ग के इलाकों की है। नगर निगम के 20 हजार 236 सैंपल में से लगभग नौ हजार 311 नमूने सिर्फ झुग्गीबस्ती क्षेत्रों के थे।
इन झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोग लंबे समय से गंदे पानी की शिकायतें कर रहे थे। लैब की रिपोर्ट ने भी यह साबित कर दिया है कि यहां पानी की शुद्धता को लेकर स्थिति बहुत ज्यादा गंभीर बनी हुई है।
लीकेज सुधारे गए, लेकिन नहीं थमी गंदगी
शहर में पानी की पाइप लाइनों के फूटने और उनसे गंदा पानी बहने की शिकायतें लगातार आ रही थीं। प्रशासन ने पिछले 145 दिनों के भीतर ही पांच हजार 573 पाइप लाइनों के लीकेज को सुधारा भी है।
इसके बावजूद लोगों के घरों तक पहुंचने वाले पानी में गंदगी का घुलना बंद नहीं हुआ है। पानी में मिली यह गंदगी सीधे तौर पर लोगों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ कर रही है।
सिर्फ मई महीने की बात करें, तो सीएम हेल्पलाइन और मेयर हेल्पलाइन पर दूषित पानी की कुल 83 शिकायतें दर्ज करवाई गई थीं। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने इनमें से 74 शिकायतों का निराकरण यानी समाधान कर दिया है।
इन 4 बड़े इलाकों की रिपोर्ट ने उड़ाए होश
भोपाल के चार प्रमुख रिहायशी और झुग्गी वाले इलाकों के पानी में खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया है। यह बैक्टीरिया इंसानों और जानवरों के मल में मिलता है।
पानी में इसका मिलना साफ तौर पर इस बात का सबूत है कि, पीने के पानी की लाइन में सीवेज यानी गंदे नाले का पानी मिक्स हो रहा है।
1. वाजपेयी नगर
इस इलाके से लिए गए पानी के सैंपल में ई-कोलाई बैक्टीरिया मौजूद मिला है। इसके साथ ही यहां पानी में टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड्स यानी टीडीएस (TDS) की मात्रा 156 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई है। वहीं मैग्नीशियम की मात्रा 11.42 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई है।
2. अवधपुरी
अवधपुरी जैसे बड़े रिहायशी इलाके में भी पानी ई-कोलाई बैक्टीरिया से संक्रमित मिला है। यहां टीडीएस (TDS) की मात्रा 323 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई है। जबकि 25 डिग्री सेल्सियस तापमान पर पानी की पीएच वैल्यू (pH Value) का मान 7.78 मापा गया है।
3. खानूंगांव
इस क्षेत्र में भी पीने का पानी सुरक्षित नहीं मिला है। यहां ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। खानूंगांव के पानी में टीडीएस की मात्रा 248 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई है।
इसके अलावा, टोटल हार्डनेस ऐज CaCO3 (Total Hardness as CaCO3) की मात्रा भी 145 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई है।
4. अर्जुन नगर
इस झुग्गी बहुल इलाके में भी ई-कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई है, जो सीधे तौर पर सेहत के लिए खतरा है। यहां पानी का टीडीएस 104 मिलीग्राम प्रति लीटर मिला है।
जलस्रोतों का घटता जलस्तर
भोपाल शहर में मुख्य रूप से बड़ा तालाब के साथ-साथ कोलार डैम और केरवा डैम से पीने के पानी की सप्लाई की जाती है। गर्मी के इस मौसम में इन जल स्रोतों का पानी भी तेजी से कम हो रहा है।
कोलार डैम की बात करें तो वहां अभी पानी का जलस्तर फुल टैंक लेवल के मुकाबले 9 मीटर कम हो चुका है। यानी डैम अभी सिर्फ 48 फीसदी तक ही भरा हुआ है। पिछले एक महीने के अंदर ही कोलार डैम का जलस्तर एक मीटर तक नीचे चला गया है।
इसी तरह भोपाल की लाइफलाइन कहे जाने वाले बड़े तालाब का सामान्य जलस्तर वैसे तो 1666.80 फीट होता है। मौजूदा समय में यह घटकर 1659.70 फीट पर पहुंच गया है। जलस्तर कम होने से भी कई बार पानी की क्वालिटी पर असर पड़ता है।
पीलिया और टाइफाइड का खतरा
इस पूरे मामले पर गांधी मेडिकल कॉलेज की डॉक्टर पूर्वा गोहिया ने अपनी महत्वपूर्ण राय दी है। उन्होंने बताया कि पानी के अंदर ई-कोलाई बैक्टीरिया मिलना खतरनाक संकेत देता है।
इसका सीधा और साफ मतलब यह होता है कि सीवेज का गंदा पानी किसी न किस जगह से पीने वाली पानी की लाइन में मिल रहा है। ऐसा दूषित पानी पीने से लोगों को पीलिया, टाइफाइड और पेट के कई तरह के गंभीर संक्रमण हो सकते हैं, जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक हैं।
FAQ
- भोपाल के किन प्रमुख इलाकों के पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला है?
भोपाल नगर निगम की लैब जांच में शहर के चार प्रमुख इलाकों- वाजपेयी नगर, अवधपुरी, खानूंगांव और अर्जुन नगर के पीने के पानी में खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला है। - पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिलने का क्या मतलब होता है?
ई-कोलाई बैक्टीरिया इंसानों और जानवरों के मल में पाया जाता है। पानी में इसका मिलना यह दिखाता है कि पीने के पानी की लाइन में सीवेज यानी गंदे नाले का पानी मिल रहा है। डॉक्टर के मुताबिक, ऐसा पानी पीने से पीलिया, टाइफाइड और पेट के गंभीर रोग हो सकते हैं।
ये खबरें भी पढ़िए...
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी बोले- इंदौर का 90 फीसदी पानी जहरीला
शिकायतों का अंबार, पर समाधान शून्य; बीजापुर के ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर
क्यों भड़की है पानी पर जंग? पांचना बांध को लेकर कमांड और डूब वाले गांव आमने-सामने
भोपाल का भोज वेटलैंड संकट में; गंदा पानी, कचरा और कब्जों ने बिगाड़ी झील की सेहत