बेटा घर लौट आएगा... इस भरोसे में गंवाए 1 करोड़ रुपए! भोपाल में तंत्र-मंत्र के नाम पर महिला से ठगी
साकेत नगर से शुरू हुआ पूरा मामला
बता दें कि भोपाल के साकेत नगर में रहने वाली एक महिला का बेटा परिवार से अलग रहता था। महिला चाहती थीं कि उनका बेटा वापस घर आ जाए। इसी दौरान एक पड़ोसन ने उनकी मुलाकात अवधपुरी की आशा यादव से कराई। यहीं से ठगी (महिला से ठगी) का पूरा खेल शुरू हुआ।
तंत्र-मंत्र के नाम पर दिया झांसा
आशा ने ही महिला को बताया कि उसका भाई मुकेश तंत्र-मंत्र के जरिए बेटे को वश में कर सकता है। इससे वह वापस घर लौट आएगा। आरोपियों ने पूजा-पाठ के नाम पर पहले 20 हजार रुपए लिए। इसके बाद घर में क्लेश और अशांति का डर दिखाकर और पैसे मांगने लगे। उन्होंने महिला को भरोसा दिलाया कि उनका बेटा घर लौट आएगा और परिवार में शांति हो जाएगी। धीरे-धीरे यह मामला पैसों से सोने-चांदी के गहनों तक पहुंच गया।
16 महीने में ऐसे ठगे करीब एक करोड़ रुपए
जानकारी के अनुसार आरोपियों ने महिला को 16 महीने तक अपने जाल में फंसाए रखा। इस दौरान उनसे 7.16 लाख रुपए ऑनलाइन और 12.54 लाख रुपए नकद लिए गए। इसके अलावा 625 ग्राम सोने और 500 ग्राम चांदी के गहने भी ले लिए। इस तरह कुल ठगी (तंत्र-मंत्र के नाम पर ठगी) करीब एक करोड़ रुपए की बताई जा रही है।
भरोसा जीतने के लिए दिए 10 करोड़ के चेक
महिला का भरोसा बनाए रखने के लिए आरोपियों ने उन्हें 10 करोड़ रुपए के 8 चेक दिए। इसके अलावा एक खाली चेक और 6 एटीएम कार्ड भी दिए गए। महिला इन चेक और कार्ड के भरोसे आरोपियों पर विश्वास करती रहीं। इस तरह ठगी का सिलसिला लंबे समय तक चलता रहा।
चेक बाउंस हुआ तो खुला ठगी का मामला
इस पूरे मामले का खुलासा 29 सितंबर 2026 को हुआ। महिला ने 17 लाख रुपए के जेवर खरीदने के बदले चेक दिया था। जब यह चेक बाउंस हो गया तो सराफा कारोबारी ने महिला के पति को फोन किया। इसके बाद परिवार को ठगी का पता चला।
गोल्ड लोन कंपनियों में गिरवी रखे गहने
पुलिस जांच में पता चला कि आरोपियों ने महिला से ठगे गए गहने गोल्ड लोन कंपनियों में गिरवी रख दिए थे। अब पुलिस आरोपियों के बैंक खातों और पैसों के लेन-देन की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि गहने किन-किन कंपनियों में गिरवी रखे गए थे।
तीन आरोपी गिरफ्तार, मुकेश फरार
भोपाल क्राइम ब्रांच ने इस मामले में आशा यादव, उसके पति हरीश और साथी श्यान खान को गिरफ्तार किया है। वहीं आशा का भाई और खुद को तांत्रिक बताने वाला मुकेश अभी फरार है। फिलहाल सभी आरोपी हैं और उनके खिलाफ लगे आरोप अदालत में साबित होना बाकी हैं।
गिरोह के दूसरे शिकार भी हो सकते हैं
क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि यह गिरोह एक संगठित रैकेट की तरह काम कर रहा था। पुलिस को शक है कि आरोपियों ने दूसरे लोगों को भी इसी तरह ठगा होगा। फिलहाल उनके पैसों के लेन-देन और गिरोह से जुड़े दूसरे लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।
इस मामले में आरोपियों ने महिला की सबसे बड़ी कमजोरी यानी बेटे को लेकर उनकी चिंता का फायदा उठाया। परिवार को फिर से साथ लाने की उम्मीद दिखाकर उनसे पैसे और गहने ऐंठते रहे। यही वजह रही कि महिला लंबे समय तक उनके झांसे में फंसी रहीं।
यह खबर क्यों जरूरी है?
तंत्र-मंत्र के नाम पर किसी परिवार की भावनाओं का इस्तेमाल गंभीर अपराध है। ऐसे मामले बताते हैं कि अंधविश्वास का फायदा संगठित गिरोह भी उठा रहे हैं। पुलिस की जांच से यह तय होगा कि और कितने लोग इस जाल में फंसे। संविधान हर नागरिक को अपनी संपत्ति और सम्मान की सुरक्षा का अधिकार देता है। यह मामला उसी अधिकार की याद दिलाता है।