युवा विधायक सम्मेलन: तोमर का ‘स्टडी-डिसिप्लिन’ मंत्र, मंच से सिस्टम पर उठे तीखे सवाल
भोपाल में हुए युवा विधायक सम्मेलन के समापन पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने साफ कहा कि “10 मिनट में भी प्रभावी बात रखी जा सकती है, बशर्ते तैयारी और अध्ययन मजबूत हो।” उन्होंने ‘राष्ट्र प्रथम’ और अनुशासन को सबसे जरूरी बताया। वहीं, इसी मंच से विधायकों ने सिस्टम पर तीखे सवाल उठाए, कहीं फ्री योजनाओं पर रोक की मांग हुई, तो कहीं जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था पर बहस छिड़ गई।
सम्मेलन का टोन: अनुशासन बनाम असंतोष
दो दिन के इस सम्मेलन में एक तरफ अनुशासन और सीमित समय में बात रखने का फॉर्मेट दिखा, तो दूसरी ओर कई मुद्दों पर खुलकर असंतोष भी सामने आया। विधायकों ने अपनी ही व्यवस्था ब्यूरोक्रेसी, योजनाओं और शिक्षा सिस्टम पर सवाल खड़े किए।
मुख्य बातें (Key Points)
- तोमर ने ‘कम समय में सटीक बात’ और स्टडी पर जोर दिया
- कई विधायकों ने ब्यूरोक्रेसी की जवाबदेही तय करने की मांग की
- फ्री योजनाओं (Freebies) पर सवाल उठे
- सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर बहस
- टेक्नोलॉजी, स्वच्छता और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी चर्चा
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सरकारी स्कूलों पर बड़ा प्रस्ताव
राजस्थान के विधायक रवीन्द्र सिंह भाटी ने सबसे अलग सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा कानून बने, जिसमें जनप्रतिनिधियों के बच्चों के लिए भी सरकारी स्कूल अनिवार्य हों। उनका तर्क साफ था—जब तक नेता खुद सिस्टम से नहीं जुड़ेंगे, सुधार मुश्किल है।
फ्री योजनाओं पर सख्त राय
मध्य प्रदेश के विधायक हेमंत कटारे ने ‘लाड़ली बहना योजना’ जैसी योजनाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सीधे पैसे देने से सशक्तिकरण नहीं होगा, रोजगार और स्किल जरूरी हैं। कटारे ने साफ कहा लोकप्रियता से ज्यादा जरूरी सही फैसले हैं।
ब्यूरोक्रेसी पर सबसे ज्यादा निशाना
कई वक्ताओं ने माना कि सिस्टम में सबसे बड़ी चुनौती ब्यूरोक्रेसी की जवाबदेही है। मांग उठी कि जैसे जनप्रतिनिधियों का आकलन होता है, वैसे ही अफसरों की भी स्पष्ट जवाबदेही तय हो।
महिला नेतृत्व पर छोटा, लेकिन साफ संदेश
छत्तीसगढ़ की विधायक भावना बोहरा ने कहा कि राजनीति में महिलाओं को ‘डमी’ बनने से बचना होगा। उन्होंने जोर दिया कि नेतृत्व क्षमता के दम पर आगे बढ़ना जरूरी है, जेंडर बहस में उलझना नहीं।
तोमर का फोकस: स्टडी, अनुशासन और राष्ट्र प्रथम
नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सम्मेलन में 8-10 मिनट की समय सीमा ने एक नया अनुशासन तय किया। उन्होंने यह भी कहा कि युवा विधायकों को लगातार अध्ययन करते रहना चाहिए, तभी वे प्रभावी नेतृत्व दे पाएंगे। साथ ही, उन्होंने अधूरे कामों को पहले पूरा करने और गुणवत्ता पर जोर देने की बात कही।
टेक्नोलॉजी और विकास पर भी चर्चा सम्मेलन में AI
डिजिटल विधानसभा, सोलर एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दे भी उठे। फोकस इस बात पर रहा कि टेक्नोलॉजी को अवसर के रूप में अपनाया जाए, न कि चुनौती मानकर टाला जाए।
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मंच पर ‘युवा’ लेकिन सवाल पुराने सिस्टम पर
विधायकों ने खुद की व्यवस्था को ही कठघरे में खड़ा किया” यह सम्मेलन सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने साफ दिखाया कि सिस्टम के अंदर ही बदलाव को लेकर असंतोष और टकराव दोनों मौजूद हैं।