आंदोलन नहीं, सियासी ड्रामा- जीतू पटवारी पर भाजपा का हमला, आशीष अग्रवाल ने कहा, यह सोची-समझी नौटंकी
BHOPAL. मध्य प्रदेश कांग्रेस के हालिया आंदोलन को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा ने इसे जनआंदोलन मानने से इनकार करते हुए “सोची-समझी नौटंकी” करार दिया है। पार्टी का कहना है कि सड़कों पर दिखा हंगामा स्वतः स्फूर्त नहीं, बल्कि नेतृत्व के इशारे पर रचा गया ड्रामा था।
आशीष अग्रवाल का सीधा आरोप
एमपी बीजेपी मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो कांग्रेस की कथित षड्यंत्रकारी राजनीति को बेनकाब करता है।
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बस का वीडियो और बड़ा दावा
आशीष अग्रवाल के मुताबिक, जिस बस में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी बैठे थे, उसी बस से कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हाथ से धकेलकर आगे बढ़ने का इशारा किया गया। आरोप है कि इसके बाद जानबूझकर हालात बिगाड़े गए।
टकराव की पटकथा पहले से तय?
भाजपा का दावा है कि कार्यकर्ताओं को बस के सामने खड़ा किया गया, ताकि पुलिस से टकराव हो। इसके बाद धक्का-मुक्की, अफरा-तफरी और अव्यवस्था का माहौल बनाया गया। सवाल उठ रहा है कि यह आंदोलन था या पूर्व नियोजित सियासी स्क्रिप्ट।
पुराने घटनाक्रम से जोड़कर हमला
भाजपा नेताओं का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब जीतू पटवारी के नेतृत्व में कांग्रेस ने टकराव की राजनीति अपनाई हो। पहले भी विरोध प्रदर्शनों में कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ और कार्यकर्ताओं को आगे कर खुद सुरक्षित रहने के आरोप लगते रहे हैं।
नेतृत्व पर बड़ा सवाल
आशीष अग्रवाल ने तीखे शब्दों में कहा कि जो नेता अपने ही कार्यकर्ताओं को टकराव की आग में झोंक दे, वह प्रदेश की जनता की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी कैसे निभाएगा।
‘संघर्ष नहीं, अराजकता’ का आरोप
भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस की राजनीति अब जनहित के संघर्ष से हटकर अराजकता की पहचान बन चुकी है। सड़कों पर अव्यवस्था फैलाकर सहानुभूति बटोरना ही कांग्रेस की नई रणनीति है।
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सियासी बंटवारे में पटवारी निशाने पर
भाजपा ने साफ कर दिया है कि इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में जीतू पटवारी हैं। पार्टी इसे नेतृत्व की विफलता और जानबूझकर हालात बिगाड़ने की कोशिश बता रही है।
आगे क्या?
इस बयानबाजी के बाद प्रदेश की राजनीति और गर्माने के संकेत हैं। सवाल यही है कि कांग्रेस इन आरोपों का जवाब कैसे देगी। क्या आंदोलन की यह रणनीति पार्टी को सियासी फायदा दिला पाएगी या उल्टा नुकसान।