पिछले दो मामलों में निष्कासित हुए थे बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी, तीसरी बार सॉरी से बनी बात
राजनीति में जुबान का फिसलना आम है, लेकिन जब जुबान मर्यादा की दहलीज पार कर जाए, तो परिणाम भारी होते हैं। मध्यप्रदेश के पिछोर से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। वहीं, इस बार कहानी थोड़ी अलग है।
विधायक अपने कड़े तेवरों के लिए जाने जाते हैं। उन्हें एक आईपीएस (IPS) अधिकारी को दी गई धमकी के बाद झुकना पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि लोधी का विवादों से पुराना नाता है। वे पहले दो बार पार्टी से निष्कासित हो चुके हैं, लेकिन इस बार सिर्फ एक सॉरी ने विधायक को बचा लिया।
बेटे की थार और पिता के तीखे तेवर
मामले की शुरुआत 16 अप्रैल 2026 को शिवपुरी में हुई एक सड़क दुर्घटना से हुई थी। विधायक के बेटे दिनेश लोधी ने अपनी तेज रफ्तार थार गाड़ी से पहले तीन बाइक सवारों को टक्कर मारी और फिर दो स्कूली छात्राओं को कुचल दिया।
शुरुआती तौर पर विधायक ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट लिखकर जनता को अपना परिवार बताया और बेटे पर एफआईआर की बात कही। लेकिन जैसे ही पुलिस ने सख्ती दिखाई, विधायक का जनता प्रेम गुस्से में बदल गया।
जब वर्दी को दी औकात में रहने की नसीहत
पुलिस की पूछताछ के दौरान जब एसडीओपी (आईपीएस आयुष जाखड़) ने दिनेश लोधी को भविष्य में सावधानी बरतने की सलाह दी, तो विधायक आगबबूला हो गए। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने सारी मर्यादाएं लांघ दीं।
उन्होंने आईपीएस अफसर को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि करेरा क्या तेरे डैडी की जागीर है? इतना ही नहीं, उन्होंने अफसर को अपनी औकात में रहने और अपना इतिहास देखने की धमकी तक दे डाली। यह वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया।
पहले के विवादित मामलों में निष्कासित हो चुके लोधी
प्रीतम लोधी के लिए विवाद कोई नई बात नहीं है। यदि उनके राजनीतिक करियर पर नजर डालें, तो वे पहले भी दो बार बड़े झटके झेल चुके हैं-
साल 2005 (पहला निष्कासन)
2005 में एक आपराधिक मामले में फरार होने के दौरान पुलिस ने प्रीतम लोधी को गिरफ्तार किया था। इस कारण उनकी छवि खराब हो गई थी और भाजपा ने उनसे किनारा कर लिया था। उस वक्त प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के चलते भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद वे उमा भारती की जनशक्ति पार्टी में शामिल हो गए थे। लेकिन जब उमा भारती भाजपा में वापस आईं, तो लोधी भी भाजपा में लौट आए।
साल 2022 (दूसरा निष्कासन)
शिवपुरी के बदरवास में वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी की जयंती पर 17 अगस्त 2022 को प्रीतम लोधी ने ब्राह्मण समाज और कथावाचकों को लेकर एक विवादित बयान दिया था। उन्होंने कथावाचकों पर लोगों को पागल बनाने और लूटने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इस बयान के बाद पूरे राज्य में विरोध हुआ और एफआईआर भी दर्ज की गई। उस वक्त प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने लोधी से ठीक से स्पष्टीकरण न मिलने पर उन्हें 6 साल के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था। हालांकि, 2023 में उन्हें फिर से पार्टी में शामिल किया गया।
एसोसिएशन की नाराजगी पर सॉरी का मरहम
विधायक के अमर्यादित बयानों के खिलाफ मप्र आईपीएस एसोसिएशन (MP IPS Association) और ऑल इंडिया आईपीएस एसोसिएशन ने मोर्चा खोल दिया था। दबाव बढ़ता देख भाजपा संगठन ने उन्हें नोटिस जारी किया है।
बाद में सीएम मोहन यादव से मुलाकात और सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करने के बाद मामला शांत हुआ। एसोसिएशन के अध्यक्ष एडीजी चंचल शेखर ने कहा कि विधायक की माफी के बाद वे अब इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते।
ये खबर भी पढ़िए...
बागी तेवरों वाले विधायक प्रीतम लोधी संगठन के आगे पड़े फीके, हाईकमान की क्लास के बाद बदले सुर
बड़बोले प्रीतम लोधी पर पार्टी सख्त, नोटिस देकर तीन दिन में मांगा जवाब
औकात में रह… कहने वाले BJP विधायक प्रीतम लोधी पर आईपीएस एसोसिएशन हमलावर
गोबर से भर देंगे आईपीएस का बंगला: बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी ने दी नई धमकी